Thu Sep 24, 2026 | 01:56 PM IST

Medically Reviewed by Dr Smita Singh , Dietitian

क्या लहसुन खाने से हाई बीपी कंट्रोल हो सकता है? एक्‍सपर्ट से जानें

क्‍या आप भी ब्‍लड प्रेशर कंट्रोल करने के ल‍िए लहसुन का सेवन करते हैं? एक्‍सपर्ट से जानें यह बीपी को वाकई कंट्रोल कर सकता है या नहीं?
क्या लहसुन खाने से हाई बीपी कंट्रोल हो सकता है? एक्‍सपर्ट से जानेंक्या लहसुन खाने से हाई बीपी कंट्रोल हो सकता है? एक्‍सपर्ट से जानें

हाई बीपी के मरीज अक्‍सर ऐसी चीजों की तलाश में रहते हैं ज‍िनका सेवन करने से उन्‍हें बीपी कंट्रोल करने में मदद म‍िले और इस ल‍िस्‍ट में ऐसा ही एक कॉमन इंग्रीड‍िएंट है लहसुन। ज्‍यादातर घरों में लहसुन का इस्‍तेमाल लगभग रोज क‍िया जाता है। कुछ शोधों में बताया गया है कि लहसुन के सेवन का अच्‍छा असर स‍िस्‍टोल‍िक और डायस्‍टोल‍िक बीपी पर देखा गया है। साथ ही, लहसुन में कई प्रकार के एक्‍ट‍िव यौग‍िक पाए जाते हैं ज‍िनमें से एक है एल‍िस‍िन (Allicin)। कई स्‍टडीज में इसका संबंध बीपी कंट्रोल के साथ देखा गया है। आइए जानते हैं क‍ि क्‍या वाकई लहसुन खाने से बीपी कंट्रोल हो सकता है? बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Smita Singh, Chief Dietitian At Midland Hospital & Director At Wellness Diet Clinic, Lucknow से बात की।

हाई बीपी मैनेजमेंट में लहसुन को डाइट का ह‍िस्‍सा बना सकते हैं, लेक‍िन यह दवा का व‍िकल्‍प नहीं है। 

अगर व्‍यक्‍त‍ि गंभीर बीपी कंडीशन में है या बीपी 170 या उससे अध‍िक है, तो लहसुन का सेवन करना पर्याप्‍त नहीं माना जाना चाह‍िए। 
अध‍िक मात्रा में लहसुन के सेवन से पाचन समस्‍याएं हो सकती हैं इसल‍िए इसे सीमि‍त मात्रा में हेल्‍दी डाइट का ह‍िस्‍सा बनाएं। 
लहसुन को काटकर तुरंत इस्‍तेमाल करें, कटे हुए लहसुन को ज्‍यादा देर रखकर नहीं खाना चाह‍िए।

हाई बीपी में दवा का व‍िकल्‍प नहीं बन सकता लहसुन

  • लहसुन में मौजूद एल‍िस‍िन से ब्‍लड वेसल्‍स को आराम म‍िलता है इसल‍िए कुछ हद तक बीपी कंट्रोल होता है। हालांक‍ि, बीपी में बदलाव बहुत कम मात्रा में होता है और हर मरीज पर इसका प्रभाव अलग हो सकता है। साथ ही, फ‍िलहाल कोई बड़ा डेटा मौजूद नहीं है ज‍ि‍सके आधार पर कहा जा सके क‍ि लहसुन खाने से बीपी में कोई मुख्‍य बदलाव होता है।
  • दवाओं के बगैर लहसुन का सेवन करने से हाई बीपी की समस्‍या को कंट्रोल नहीं क‍िया जा सकता है।
  • अगर क‍िसी व्‍यक्‍त‍ि का बीपी 170-180 या उससे ज्‍यादा है, तो केवल लहसुन खाने से बीपी कंट्रोल करना संभव नहीं है।
  • हाई बीपी के मरीज दवाओं और हेल्‍दी लाइफस्‍टाइल को फॉलो करने के साथ-साथ हेल्‍दी डाइट में लहसुन को शाम‍िल कर सकते हैं।

क्‍या कहती हैं स्‍टडीज?

साल 2016 में The Journal Of Nutrition में प्रकाश‍ित एक मेटा-एनालिसिस में लहसुन का सेवन करने से सिस्टोलिक 5.1 और डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर 2.5 mmHg तक कम हुआ। हालांकि, लंबे समय तक इनके प्रभाव को समझने के लिए और शोध की जरूरत बताई गई।

साल 2019 में Experimental And Therapeutic Medicine में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, लहसुन के सप्लीमेंट लेने से सिस्टोलिक 8.32 और डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर 5.48 mmHg तक कम हुआ। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि शोध में मुख्य रूप से सप्लीमेंट का अध्ययन किया गया था इसलिए इसे कच्चे लहसुन के बराबर नहीं माना जाना चाहिए।

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लहसुन का सेवन कैसे करें?

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  • लहसुन को अच्‍छी तरह से पीस लें या बारीक टुकड़ों में काट लें।
  • सूप या सब्‍ज‍ियों में इसका इस्‍तेमाल कर सकते हैं।
  • कटे हुए लहसुन को ज्‍यादा देर न रखें क्‍योंक‍ि लहसुन में मौजूद एल‍िस‍िन (Allicin) धीरे-धीरे खराब होने लगता है और इसकी सक्र‍ियता कम होने लगती है।
  • तेज आंच पर लहसुन को ज्‍यादा देर न रखें, इससे एल‍िस‍िन तेजी से खराब होता है।
  • ज्‍यादा लहसुन का सेवन न करें, इससे पाचन संबंध‍ित समस्‍याएं हो सकती हैं।

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हाई बीपी को कैसे कंट्रोल करें?

  • कम फैट युक्‍त भोजन लें।
  • डाइट में ताजी सब्‍ज‍ियों को शाम‍िल करें।
  • रोज 4 से 5 ग्राम से अध‍िक नमक का सेवन न करें। हाई बीपी में नमक की मात्रा कंट्रोल करना चाह‍िए।
  • कैफीन, धूम्रपान और अल्‍कोहल का सेवन न करें।
  • अचार, पापड़, नमकीन, ब‍िस्‍क‍िट, ब्रेड, सॉस जैसे पैक्‍ड फूड्स का सेवन न करें।
  • प्रोसेस्‍ड फूड्स से भी परहेज करें।
  • पोटैश‍ियम र‍िच फूड्स को डाइट में शाम‍िल करें, इससे ब्‍लड वेसल्‍स र‍िलैक्‍स हो जाती हैं। इन फूड्स का सेवन करें जैसे- केला, पालक, स्‍वीट पोटैटो।
  • पर्याप्‍त मात्रा में पानी प‍िएं और नींद पूरी करें।
  • रोजाना आधा घंटे ब्र‍िस्‍क वॉक करें, डीप ब्रीद‍िंग एक्‍सरसाइज करें।
  • स्‍ट्रेस मैनेजमेंट पर भी गौर करें। जरूरत पड़ने पर थेरेपी की मदद लें।

न‍िष्‍कर्ष:

लहसुन को हाई बीपी मैनेजमेंट के ल‍िए फायदेमंद माना जाता है। कई स्‍टडीज और आयुर्वेद में इसे बीपी कंट्रोल करने के उपाय के तौर पर देखा गया है। हालांक‍ि लहसुन को बीपी की दवा का व‍िकल्‍प नहीं माना जा सकता, लेक‍िन इसमें मौजूद एल‍िस‍िन से ब्‍लड वेसल्‍स र‍िलैक्‍स होती हैं और लंबे समय में बीपी मैनेजमेंट में मदद म‍िलती है। हाई बीपी के मरीज इसे सीमि‍त मात्रा में अपनी डाइट का ह‍िस्‍सा बना सकते हैं, लेक‍िन जरूरत से ज्‍यादा लहसुन पाचन समस्‍याओं का कारण बन सकता है क्‍योंक‍ि लहसुन की तासीर गर्म होती है। हाई बीपी को कंट्रोल करने के ल‍िए एक्‍सरसाइज, एक्‍ट‍िव लाइफस्‍टाइल, हेल्‍दी डाइट जरूरी है। लहसुन को हेल्‍दी डाइट का ह‍िस्‍सा बना सकते हैं।

image credit: magnific

FAQ

  • क्या खाली पेट लहसुन खाना सही है?

    खाली पेट लहसुन खाने से कुछ लोगों को पेट में जलन, एस‍िड‍िटी या गैस हो सकती है। इसे भोजन के साथ म‍िलाकर खाया जा सकता है।
  • क्या लहसुन खाने से वजन कम होता है?

    वेट लॉस के ल‍िए लहसुन के सीमि‍त फायदे देखे गए हैं। इसे वेट लॉस डाइट का ह‍िस्‍सा बना सकते हैं, लेक‍िन वजन घटाने के ल‍िए डाइट, एक्‍सरसाइज और हेल्‍दी लाइफस्‍टाइल पर फोकस करें।

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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Sep 24, 2026 12:15 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Sep 24, 2026 12:15 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Smita Singh

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