Fri Sep 25, 2026 | 08:02 PM IST

Medically Reviewed by Dr Smita Singh , Dietitian

क्या हाई BP के मरीजों के ल‍िए नमक पूरी तरह छोड़ देना सही है? जानें क्‍या कहते हैं एक्‍सपर्ट?

हाई बीपी के मरीजों को अक्‍सर यह डर होता है क‍ि नमक का सेवन करने से बीपी बढ़ जाएगा और वे नमक का सेवन बंद कर देते हैं, लेक‍िन क्‍या ऐसा करना सेहत के ल‍िए सही है? जानें एक्‍सपर्ट की राय। 
क्या हाई BP के मरीजों के ल‍िए नमक पूरी तरह छोड़ देना सही है? जानें क्‍या कहते हैं एक्‍सपर्ट?क्या हाई BP के मरीजों के ल‍िए नमक पूरी तरह छोड़ देना सही है? जानें क्‍या कहते हैं एक्‍सपर्ट?

ज्‍यादा नमक का सेवन करने से वॉटर र‍िटेंशन की समस्‍या होती है और उससे बीपी बढ़ने की आशंका होती है। इसल‍िए हाई बीपी में नमक का सेवन कम करने की सलाह दी जाती है, लेक‍िन कुछ मरीज हाई बीपी में नमक का सेवन पूरी तरह से बंद कर देते हैं। हालांक‍ि, एक्‍सपर्ट्स का मानना है क‍ि हाई बीपी में पूरी तरह से नमक बंद नहीं करना चाह‍िए। शरीर के ल‍िए नमक का सीम‍ित सेवन भी जरूरी है। हार्ट ब्‍लॉकेज में भी नमक बंद करने की सलाह नहीं दी जाती है। ज‍िन मरीजों को हाई बीपी है, पैर में सूजन होती है, लंग्‍स में पानी जमा होता है या वॉटर रि‍टेंशन की समस्‍या है, तो उन्‍हें नमक का सेवन कम करने की सलाह दी जाती है। ऐसे में नमक को पूरी तरह से बंद नहीं करना चाह‍िए। आइए नमक और हाई बीपी के संबंध को व‍िस्‍तार से समझते हैं। बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Smita Singh, Chief Dietitian At Midland Hospital & Director At Wellness Diet Clinic, Lucknow से बात की।

सॉल्‍ट सेंस‍िट‍िव हाई बीपी मरीज घटाएं नमक की मात्रा

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कुछ ऐसे मरीज होते हैं ज‍ि‍नमें नमक का सेवन घटाते ही बीपी कंट्रोल हो जाता है। ऐसे मरीजों को सॉल्‍ट सेंस‍िट‍िव हाई ब्‍लड पेशेंट कहा जाता है। ऐसे मरीजों को नमक का सेवन कम करने की सलाह दी जाती है। नॉर्मल बीपी 120 से 125 के बीच होना चाह‍िए। अगर बीपी ज्‍यादा होगा, तो हार्ट को पंप करने के ल‍िए जोर लगाना होता है ज‍िससे हार्ट पर दबाव बढ़ता है और हार्ट ड‍िजीज का खतरा बढ़ जाता है।

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लो सोड‍ियम सॉल्‍ट चुन सकते हैं

हाई बीपी के मरीज नमक को पूरी तरह बंद करने के बजाय लो सोड‍ियम सॉल्‍ट चुन सकते हैं। सामान्‍य नमक की तुलना में इसमें सोड‍ियम की मात्रा कम होती है। इसमें सोड‍ियम क्‍लाेराइड की जगह आमतौर पर पोटैश‍ियम क्‍लोराइड का इस्‍तेमाल क‍िया जाता है। ध्‍यान रखें क‍ि लो सोडियम नमक हर व्यक्ति के लिए सुरक्षित नहीं होता। इसमें पोटैशियम ज्यादा हो सकता है ज‍िससे किडनी की बीमारी या अन्‍य समस्‍या हो सकती है इसल‍िए डॉक्‍टर की सलाह पर ही नमक का चयन करें।

हाई बीपी के मरीज द‍िनभर में क‍ितना नमक ले सकते हैं?

American Heart Association के मुताब‍िक, एक दिन में 2300 मिलीग्राम से ज्यादा सोडियम नहीं लेना चाहिए। ज्यादातर वयस्कों के लिए, खासकर हाई ब्लड प्रेशर वाले लोगों के लिए, सोडियम की मात्रा 1500 मिलीग्राम प्रतिदिन से अधिक नहीं होनी चाहिए। रोजाना सोडियम का सेवन सिर्फ 1000 मिलीग्राम कम करने से भी ब्लड प्रेशर और हार्ट हेल्‍थ में सुधार हो सकता है।

शरीर के ल‍िए क्‍यों जरूरी है नमक?

नमक यानी सोडियम शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्वों में से एक है। यह शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखने और मांसपेशियों के सही तरीके से काम करने में मदद करता है। सोडियम शरीर में ब्‍लड की मात्रा और बीपी कंट्रोल करने में भी अहम भूमिका निभाता है। हालांकि, शरीर को सोडियम की जरूरत सीमित मात्रा में होती है। जरूरत से ज्यादा नमक खाने से शरीर में सोडियम बढ़ सकता है, जिससे पानी जमा होने और ब्लड प्रेशर बढ़ने का खतरा हो सकता है।

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डाइट में नमक कम करने के उपाय

  • खाने में ऊपर से नमक डालना बंद करें।
  • इंस्टेंट और प्रोसेस्ड फूड का सेवन कम करें क्योंकि इनमें सोडियम की मात्रा ज्‍यादा हो सकती है।
  • पैकेज्ड फूड का लेबल पढ़ें। चिप्स, नमकीन, इंस्टेंट नूडल्स, सूप और सॉस में सोडियम ज्यादा हो सकता है।
  • नमक की जगह मसालों और जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करें। नींबू, धनिया, पुदीना, जीरा, काली मिर्च और लहसुन स्वाद बढ़ा सकते हैं।
  • फास्‍ट फूड का सेवन सीमित करें क्योंकि इन फूड्स में नमक की मात्रा ज्‍यादा हो सकती है।
  • अचार, पापड़ और चटनी कम खाएं क्योंकि इनमें नमक ज्यादा होता है।

समय-समय पर बीपी चेक करें

नमक का सेवन कम करने के साथ-साथ ब्लड प्रेशर की नियमित जांच करना भी जरूरी है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलती है कि डाइट में किए गए बदलावों का ब्लड प्रेशर पर कैसा असर हो रहा है? खासकर हाई बीपी वाले लोगों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित रूप से बीपी चेक करना चाहिए। अगर बीपी लगातार बढ़ा हुआ आता है, तो केवल नमक कम करने पर निर्भर न रहें और डॉक्टर से सलाह लें।

न‍िष्‍कर्ष:

हाई बीपी के मरीजों को नमक का सेवन पूरी तरह से बंद करने की सलाह नहीं दी जाती है। अगर हाई बीपी है, पैर में सूजन है, लंग्‍स में पानी है, वॉटर र‍िटेंशन की समस्‍या है, तो नमक की मात्रा को कम करने की सलाह दी जाती है। सॉल्‍ट सेंस‍िट‍िव हाई बीपी मरीजों को भी नमक की मात्रा कम करने के ल‍िए कहा जाता है। अगर आप हाई बीपी के मरीज हैं, तो पूरी तरह नमक का सेवन बंद करने के बजाय लो सोड‍ियम सॉल्‍ट चुन सकते हैं। हालांक‍ि, क‍िडनी के मरीजों को डॉक्‍टर की सलाह पर ही इसका सेवन करना चाह‍िए क्‍योंक‍ि लो सोड‍ियम सॉल्‍ट में पोटैश‍ियम की मात्रा ज्‍यादा हो सकती है जो क‍िडनी मरीजों के ल‍िए हान‍िकारक मानी जाती है। अमेर‍िकन हार्ट एसोस‍िएशन के मुताब‍िक, हाई बीपी के मरीजों को 1500 मिलीग्राम प्रतिदिन से अध‍िक नमक का सेवन नहीं करना चाह‍िए।

image credit: magnific

FAQ

  • क्या सेंधा नमक हाई बीपी के मरीजों के लिए सुरक्षित है?

    सेंधा नमक और काला नमक दोनों में ही सोड‍ियम होता है इसल‍िए इसे सामान्‍य नमक का बेहतर व‍िकल्‍प नहीं समझना चाह‍िए और हाई बीपी में इसकी भी सीमि‍त मात्रा का सेवन करना चाह‍िए।
  • क्या नमक कम करने से हाई बीपी की दवा बंद की जा सकती है?

    नहीं, नमक कम करने से बीपी को कंट्रोल करने में मदद म‍िलती है, लेक‍िन डॉक्‍टर की सलाह के बगैर बीपी की दवा बंद नहीं करना चाह‍िए।  

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Sep 25, 2026 18:39 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Smita Singh

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