Thu Oct 8, 2026 | 06:03 PM IST

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ड्राई ब्रशिंग से वाकई त्वचा साफ होती है या सिर्फ एक ट्रेंड? एक्सपर्ट से जानें

ड्राई ब्रश‍िंग तकनीक को लोग त्‍वचा की सफाई और डेड स्‍क‍िन सेल्‍स हटाने के ल‍िए इस्‍तेमाल करते हैं, लेक‍िन क्‍या यह तकनीक वाकई असरदार है या केवल एक ट्रेंड है? जानें क्‍या है एक्‍सपर्ट की राय?
ड्राई ब्रशिंग से वाकई त्वचा साफ होती है या सिर्फ एक ट्रेंड? एक्सपर्ट से जानेंड्राई ब्रशिंग से वाकई त्वचा साफ होती है या सिर्फ एक ट्रेंड? एक्सपर्ट से जानें

इन दिनों ड्राई ब्रश‍िंग तकनीक इंटरनेट पर काफी लोकप्रि‍य हो रही है। इस तकनीक में ड्राई त्वचा पर एक खास तरह के ब्रश को हल्के हाथों से चलाया जाता है। सोशल मीडिया पर इस तकनीक को त्वचा की गहराई से सफाई, डेड स्किन सेल्स हटाने और ब्लड सर्कुलेशन सुधारने से जोड़ा जाता है, लेक‍िन क्‍या वाकई ड्राई ब्रशिंग तकनीक त्वचा को साफ करती है या यह सिर्फ एक ट्रेंड है? आइए एक्‍सपर्ट की मदद से समझते हैं। बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Chandni Jain Gupta, Dermatologist, Cosmetologist And Hair Transplant Surgeon At Elantis Healthcare, New Delhi से बात की।

क्‍या ड्राई ब्रश‍िंग तकनीक से त्‍वचा साफ होती है?

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ब्रशिंग तकनीक त्वचा की ऊपरी सतह पर मौजूद डेड सेल्‍स को हटाने में मदद कर सकती है ज‍िससे त्‍वचा साफ होती है। इससे त्वचा कुछ समय के लिए मुलायम और चिकनी महसूस हो सकती है। ब्रश की मदद से ब्‍लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाने में मदद म‍िलती है। हालांक‍ि, डीप क्‍लीन‍िंग के ल‍िए यह तकनीक कारगर नहीं मानी जाती है।

साल 2021 में AYUSH: Dhara में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, घर्षण कर्म (Gharshana Karma), आयुर्वेद में बताई गई एक प्रक्र‍िया है ज‍िसमें त्‍वचा पर क‍िसी पदार्थ से एक्‍सफोल‍िएशन क‍िया जाता है। स्‍टडी में मुंहासों से बने दाग-धब्बों में सुधार के लिए इस तकनीक को फायदेमंद बताया गया है।

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ड्राई ब्रशिंग के लिए किस तरह के ब्रश का इस्तेमाल करें?

ड्राई ब्रशिंग के लिए ऐसा ब्रश चुनें जिसके ब्रिसल्स नर्म या मुलायम हों। बहुत कठोर या नुकीले ब्रिसल्स त्वचा पर खरोंच, रेडनेस और जलन पैदा कर सकते हैं। सेंस‍िट‍िव स्‍क‍िन वाले लोगों को विशेष रूप से मुलायम ब्रश का इस्तेमाल करना चाहिए।

सेंस‍िट‍िव स्किन वाले लोग भी ड्राई ब्रशिंग कर सकते हैं?

सेंस‍िट‍िव स्‍क‍िन वाले लोग ड्राई ब्रश‍िंग तकनीक का इस्‍तेमाल करने से बचना चाह‍िए। बहुत ज्यादा दबाव या बार-बार ब्रश करने से जलन, रेडनेस और त्वचा में ड्राईनेस बढ़ सकती है। अगर जलन या खुजली हो, तो इसका इस्तेमाल तुरंत बंद कर दें।

American Academy Of Dermatology Association के मुताबि‍क, एक्सफोलिएशन त्वचा की बाहरी परत से डेड स्किन सेल्स को हटाने की प्रक्रिया है। हालांक‍ि, यह हर क‍िसी के ल‍िए सही नहीं होती। इससे सेंस‍िट‍िव स्‍क‍िन में जलन हो सकती है और कॉम्‍ब‍िनेशन त्‍वचा ड्राई हो सकती है।

ड्राई ब्रशिंग तकनीक कैसे की जाती है?

  • ड्राई ब्रशिंग हमेशा सूखी त्वचा पर और नहाने से पहले की जाती है।
  • ब्रश को त्वचा पर हल्के हाथों से चलाएं और बहुत ज्यादा दबाव न डालें।
  • पैरों के तलवों से शुरू करके धीरे-धीरे ऊपर हार्ट की ओर ले जाएं।
  • टखनों से जांघों की तरफ ऊपर की दिशा में हल्के स्ट्रोक करें।
  • हथेलियों से शुरू करके कंधों की दिशा में ब्रश करें।
  • पेट पर हल्के गोलाकार स्ट्रोक किए जा सकते हैं। हालांकि, पेट को जोर से रगड़ने से बचें।
  • कमर के निचले हिस्से से ऊपर की ओर और गर्दन के आस-पास नीचे की दिशा में हल्के स्ट्रोक करें।
  • ब्रश करने के बाद नहाकर त्वचा पर मॉइश्चराइजर लगाना जरूरी है, खासकर अगर त्वचा रूखी रहती है।

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स्क्रबिंग और ड्राई ब्रशिंग में क्या अंतर है?

दोनों ही त्वचा की ऊपरी सतह से डेड सेल्‍स को हटाने वाली एक्सफोलिएशन तकनीक हैं, लेकिन इनके तरीके अलग हैं। ड्राई ब्रशिंग सूखी त्वचा पर नहाने से पहले की जाती है और इसमें केवल ब्रश की जरूरत होती है। वहीं, स्क्रबिंग आमतौर पर नहाते समय गीली त्वचा पर की जाती है और इसमें स्क्रब या एक्सफोलिएटिंग क्रीम का इस्तेमाल होता है।

ड्राई ब्रशिंग कितनी बार करनी चाहिए?

ड्राई ब्रशिंग रोजाना करना जरूरी नहीं है। ज्यादा बार या ज्यादा जोर से ब्रश करने पर त्वचा की प्राकृतिक सुरक्षा परत प्रभावित हो सकती है। शुरुआत में हफ्ते में एक से दो बार करना काफी है।

ड्राई ब्रशिंग करने का सबसे अच्छा समय क्या है?

इसे आमतौर पर नहाने से पहले किया जाता है, क्योंकि इस समय त्वचा ड्राई होती है। ड्राई ब्रशिंग के बाद नहाने से त्वचा पर हटे हुए डेड स्किन सेल्स और अन्य कण साफ हो जाते हैं। नहाने के बाद मॉइश्चराइजर लगाने से त्वचा में नमी बनाए रखने में मदद मिलती है।

ड्राई ब्रशिंग के नुकसान क्या हैं?

गलत तरीके से या बहुत ज्यादा ड्राई ब्रशिंग करने पर त्वचा को नुकसान हो सकता है। जैसे-

  • त्वचा में रेडनेस और जलन हो सकती है।
  • ड्राई स्‍क‍िन की समस्या बढ़ सकती है।
  • ज्यादा दबाव से खरोंच या चोट लग सकती है।
  • सेंस‍िट‍िव त्वचा में खुजली या जलन बढ़ सकती है।
  • पहले से मौजूद मुंहासों या त्वचा की सूजन में परेशानी बढ़ सकती है।
  • इसलिए इसे हल्के हाथों से करना चाहिए और त्वचा में दर्द या तेज जलन होने पर तुरंत रोक देना चाहिए।

किन लोगों को ड्राई ब्रशिंग नहीं करनी चाहिए?

जिन लोगों की त्वचा पर खुले घाव, कट, सनबर्न, इंफेक्‍शन, एक्‍ट‍िव स्‍क‍िन ड‍िजीज या गंभीर जलन है, उन्हें प्रभावित हिस्से पर ड्राई ब्रशिंग नहीं करनी चाहिए। एक्जिमा या सोरायसिस जैसी त्वचा संबंधि‍त समस्या वाले लोगों को इसे शुरू करने से पहले डॉक्‍टर की सलाह लेनी चाहिए। इसी तरह, शरीर के किसी हिस्से पर दर्द, सूजन या चोट होने पर वहां ब्रश नहीं करना चाहिए।

निष्कर्ष:

त्‍वचा को साफ करने के ल‍िए ड्राई ब्रश‍िंग तकनीक असरदार माना जाती है। इससे त्‍वचा को गहराई से साफ नहीं क‍िया जा सकता, लेक‍िन यह ऊपरी परत से डेड स्‍क‍िन सेल्‍स हटाने में मदद कर सकती है। साथ ही, ड्राई ब्रश‍िंग तकनीक ब्‍लड सर्कुलेशन को भी बेहतर करने में मदद करती है। ड्राई ब्रश‍िंग के ल‍िए मुलायम ब्र‍िसल्‍स वाले ब्रश का इस्‍तेमाल क‍िया जाता है। सेंस‍िट‍िव स्‍क‍िन वाले लोगों को इससे बचने की सलाह दी जाती है। ड्राई ब्रश‍िंग तकनीक को सूखी त्‍वचा पर नहाने से पहले इस्‍तेमाल क‍िया जाता है। यह तकनीक स्‍क्रब‍िंग से अलग होती है। स्‍क्रब‍िंग को गीली त्‍वचा पर क‍िया जाता है और उसमें क्रीम या क‍िसी उत्‍पाद का इस्‍तेमाल होता है, जबक‍ि ड्राई ब्रश‍िंग में केवल ब्रश की मदद से ड्राई स्‍क‍िन पर एक्‍सफोल‍िएशन क‍िया जाता है। ड्राई ब्रश‍िंग तकनीक को हफ्ते में 1 से 2 बार इस्‍तेमाल कर सकते हैं। इस तकनीक को ज्‍यादा तेज करने से जलन, खुजली, रेडनेस जैसी समस्‍याएं हो सकती हैं। ज‍िन लोगों को स्‍क‍िन ड‍िजीज है, सनबर्न है, इंफेक्‍शन है उन्‍हें इसे अपनाने से बचना चाह‍िए।

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FAQ

  • ड्राई ब्रशिंग कितनी देर करनी चाहिए?

    पूरे शरीर पर ड्राई ब्रश‍िंग तकनीक को 3 से 5 म‍िनट तक कर सकते हैं। लंबे समय तक या बहुत ज्यादा दबाव के साथ ब्रश करने से त्‍वचा पर रैशेज हो सकते हैं।
  • क्या ड्राई ब्रशिंग से मुंहासे कम होते हैं?

    ड्राई ब्रशिंग को मुंहासों का इलाज नहीं माना जाता। एक्‍टि‍व मुंहासों वाली त्वचा को रगड़ने से जलन बढ़ सकती है।

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Disclaimer

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Yashaswi Mathur

Health Journalist

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े।

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    Oct 08, 2026 17:00 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Chandni Jain Gupta
  • Oct 08, 2026 17:00 IST

    Published By : Yashaswi Mathur