Mon Sep 21, 2026 | 02:40 PM IST

Medically Reviewed by Dr Chandni Jain Gupta , Dermatologist

घर के पालतू जानवर से हो सकती हैं स्किन से जुड़ी ये 5 समस्‍याएं, डॉक्‍टर से जानें बचाव के उपाय

पालतू जानवरों से रेबीज समेत कई त्‍वचा रोगों का खतरा होता है। इनकी त्‍वचा पर मौजूद बैक्‍टीर‍िया और सूक्ष्‍मजीव, इंसानों को बीमार बना सकते हैं और त्‍वचा में इंफेक्‍शन का कारण बन सकते हैं। जानें ऐसी 5 समस्‍याओं के बारे में।
घर के पालतू जानवर से हो सकती हैं स्किन से जुड़ी ये 5 समस्‍याएं, डॉक्‍टर से जानें बचाव के उपाय
घर के पालतू जानवर से हो सकती हैं स्किन से जुड़ी ये 5 समस्‍याएं, डॉक्‍टर से जानें बचाव के उपाय

पालतू जानवर से लोगों को अलग ही प्रकार का लगाव होता है। वे इंसानों के सबसे करीबी दोस्‍त माने जाते हैं। हालांक‍ि, पालतू जानवर आपके सेहत के ल‍िए हानि‍कारक भी साबि‍त हो सकते हैं। उनसे फैलने वाले त्‍वचा रोग, कई गंभीर समस्‍याओं का कारण बन सकते हैं। पालतू जानवरों से इंसानों को रेबीज, र‍िंगवर्म, लेप्टोस्पायरोसिस, स्‍केबीज, कैट स्‍क्रैच ड‍िजीज जैसी कई समस्‍याएं हो सकती हैं। आइए जानते हैं पालतू जानवर से इंसानों को होने वाले त्‍वचा रोगों के बारे में और साथ ही आपको बताएंगे इनसे बचाव के उपाय। बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Chandni Jain, Dermatologist, Cosmetologist And Hair Transplant Surgeon At Elantis Healthcare, New Delhi से बात की।

रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (CDC) के मुताब‍िक,
जूनोटिक रोग (Zoonotic Diseases), वे रोग होते हैं जो जानवरों से इंसानों में फैलते हैं। जूनोट‍िक रोग, वायरस, बैक्टीरिया, पैरासाइट और फंगस जैसे हानिकारक कीटाणुओं से होती हैं। ये रोग वैसे, तो क‍िसी को भी हो सकते हैं, लेक‍िन इन लोगों को खतरा ज्‍यादा होता है-

  • 5 साल से कम उम्र के बच्चे,
  • 65 साल से ज्‍सरइर उम्र के वयस्क,
  • कमजाेर इम्यून‍िटी वाले लोग और
  • गर्भवती महिलाएं।

  बीमारी कारण
 1. रेबीज वायरस 
 2. रिंगवर्म फंगस
 3. स्केबीज माइट
 4. लेप्टोस्पायरोसिस लेप्टोस्पाइरा बैक्टीरिया
 5. कैट स्क्रैच डिजीज बार्टोनेला हेन्सेले बैक्टीरिया

1. रेबीज

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क्‍या है यह बीमारी?

पालतू जानवरों से होने वाली बीमारी रेबीज (Rabies) के बारे में आपने जरूर सुना होगा। कई बार खबरों में आता है क‍ि पालतू जानवर से होने वाली बीमारी रेबीज के कारण व्‍यक्‍त‍ि के अंग को काटना पड़ा ताक‍ि इंफेक्‍शन न फैल जाए। यह एक गंभीर बीमारी है। यह एक तरह का फंगल इंफेक्‍शन है। रेबीज होने पर त्‍वचा पर अक्‍सर लोग खुजली वाले चकत्ते नजर आते हैं।

लक्षण:

  • लाल या खुजलीदार चकत्ते होना।
  • स्‍कैल्‍प पर इंफेक्‍शन फैलने पर हेयर फॉल होना।
  • प्रभाव‍ित ह‍िस्‍से में खुजली होना।
  • त्‍वचा पर पपड़ी नजर आना या त्‍वचा में ड्राईनेस नजर आना।

पालतू जानवर से क्यों होती है यह बीमारी?

संक्रम‍ित ब‍िल्‍ली, कुत्ते या दूसरे पालतू जानवर की त्‍वचा और बालों यह फंगल इंफेक्‍शन इंसानों को हो सकता है। संक्रम‍ित जानवरी की चीजों के संपर्क में आने से भी यह इंफेक्‍शन हो सकता है।

यह भी पढ़ें- कुत्ते के काटने के बाद रेबीज के लक्षण कितने दिनों में दिखते हैं?

2. र‍िंगवर्म

क्‍या है यह बीमारी?

र‍िंगवर्म (Ringworm) एक तरह का फंगल इंफेक्‍शन है जो त्‍वचा, बाल और नाखूनों को प्रभाव‍ित कर सकता है। र‍िंगवर्म के कारण अक्‍सर त्‍वचा पर गोल या खुजलीदार चकत्ते दिखाई दे सकते हैं।

लक्षण:

  • रि‍ंगवर्म होने पर त्‍वचा में खुजली होती है।
  • नाखून संक्रमि‍त होने पर वह ह‍िस्‍सा माेटा हो जाता है या रंग बदल सकता है।

क्यों होती है यह बीमारी?

र‍िंगवर्म से संक्रमि‍त कुत्ते, बिल्ली या दूसरे पालतू जानवर की त्‍वचा या बालों के संपर्क में आने से फंगल इंसानों तक पहुंच सकता है। संक्रम‍ित जानवर की दूष‍ित चीजों के संपर्क से संक्रमण फैल सकता है।

यह भी पढ़ें- Ringworm और Eczema में फर्क कैसे पहचानें? डॉक्टर से जानें

3. स्केबीज

क्‍या है यह बीमारी?

स्केबीज (Scabies), स्‍केबीज माइट से होने वाल इंफेक्‍शन है। इसमें माइट त्‍वचा की ऊपरी परत में मौजूद रहता है। स्‍केबीज होने पर तेज खुजली होती है और त्‍वचा पर दाने नजर आते हैं।

लक्षण:

  • त्‍वचा पर छोटे दाने नजर आना।
  • तेज खुजली होना।
  • उंगल‍ियों के बीच, कलाई, कोहनी, बगल, कमर जैसी जगहों पर दाने होना।
  • त्‍वचा पर बारीक रेखाएं नजर आना।

पालतू जानवर से क्यों होती है यह बीमारी?

पालतू जानवर सीधे तौर पर स्‍केबीज का कारण नहीं बनते। जानवरों के शरीर में मौजूद माइट्स, इंसानों की त्‍वचा पर आ जाते हैं और इंफेक्‍शन का कारण बनते हैं। हालांक‍ि, ये माइट्स इंसानों की त्‍वचा पर जीव‍ित रहकर प्रजनन नहीं कर पाते हैं।

4. लेप्टोस्पायरोसिस

क्‍या है यह बीमारी?

लेप्टोस्पायरोसिस (Leptospirosis), लेप्टोस्पाइरा नाम के बैक्‍टीर‍िया से होने वाल इंफेक्‍शन है। संक्रमि‍त जानवरों के पेशाब से यह बैक्‍टीर‍िया पानी या म‍िट्टी में पहुंच सकता है और इंसानों को इंफेक्‍शन हो सकता है। यह बीमारी कुत्तों सहित कई अन्‍य पालतू जानवरों से भी फैल सकती है।

लक्षण:

  • लेप्टोस्पायरोसिस होने पर बुखार या ठंड लगने जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं।
  • कुछ मरीजों को उल्‍टी या मतली भी महसूस हो सकती है।
  • पेट दर्द, स‍िरदर्द या मांसपेश‍ियों में दर्द हो सकता है।
  • थकान या कमजोरी महसूस होना।
  • आंखों में रेडनेस होना।
  • कुछ मामलों में पील‍िया भी हो सकता है।

क्यों होती है यह बीमारी?

संक्रम‍ित जानवर के पेशाब से दूष‍ित पानी, म‍िट्टी या सतह के संपर्क में आने से बैक्‍टीर‍िया इंसान के शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। क‍िसी कट या घाव के जर‍िए भी बैक्‍टीर‍िया शरीर में प्रवेश कर सकता है।

5. कैट स्क्रैच डिजीज

क्‍या है यह बीमारी?

कैट स्क्रैच डिजीज (Cat Scratch Disease), बार्टोनेला हेन्सेले (Bartonella Henselae) नाम के बैक्टीरिया से होने वाला एक तरह का इंफेक्‍शन है। यह खासकर बिल्लियों के खरोंचने के बाद हो सकता है।

लक्षण:

  • कैट स्क्रैच डिजीज होन पर हल्‍का बुखार आ सकता है।
  • थकान या कमजोरी महसूस हो सकती है।
  • खरोंच के पास ल‍िम्‍फ नोड्स में सूजन या दर्द महसूस हो सकता है।
  • खरोंच वाली जगह पर छोटा दाना या फुंसी हो सकती है।

क्यों होती है यह बीमारी?

अगर ब‍िल्ली के शरीर में बार्टोनेला हेन्सेले बैक्‍टीर‍िया मौजूद हैं और उसके शरीर पर संक्रम‍ित प‍िस्‍सू हैं, तो ब‍िल्‍ली के खरोंचने पर बैक्‍टीरिया, इंसान के शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। ऐसा ब‍िल्‍ली के काटने या खुले घाव को चाटने के कारण हो सकता है।

पालतू जानवरों से होने वाली त्‍वचा संबंध‍ित समस्‍याओं से कैसे बचें?

  • पालतू जानवर की चीजें जैसे बि‍स्‍तर, कंबल और दूसरी चीजों को न‍ियम‍ित तौर पर साफ करें।
  • घर में क‍िसी व्‍यक्‍त‍ि या जानवर को त्‍वचा रोग हो, तो उसकी चीजों को अलग रखें और उसे क‍िसी के साथ शेयर न करें।
  • अगर पालतू जानवर को त्‍वचा रोग है, तो उसके संपर्क के बाद हाथों को साबुन से अच्‍छी तरह से धोकर साफ करें।
  • संक्रम‍ित जानवर को छूते समय दस्‍तानों का इस्‍तेमाल करें।
  • संक्रम‍ित जानवर से सीधे संपर्क करने से बचें।
  • अगर पालतू जानवर की त्‍वचा पर गोल चकत्ते, खुजली जैसे लक्षण हों, तो डॉक्‍टर से संपर्क करने में देरी न करें।
  • पालतू जानवर को अपने बेड पर न सुलाएं। साथ ही जानवर के सोने के स्‍थान को न‍ियम‍ित रूप से साफ करें।
  • पालतू जानवर के पेशाब या अन्‍य गंदगी को सीधे हाथों के संपर्क से दूर रखें।
  • पालतू जानवर को दूषि‍त जगह या पानी के आस-पास जाने से बचाएं।
  • पशु चिकित्सक की सलाह पर पेट्स को जरूरी वैक्‍सीन लगवाएं।

न‍िष्‍कर्ष:

पालतू जानवरों से इंसानों को कई त्‍वचा रोग हो सकते हैं ज‍िनमें 5 मुख्‍य समस्‍याएं हैं- रेबीज जो क‍ि एक वायरल इंफेक्‍शन है, र‍िंगवर्म एक फंगल इंफेक्‍शन है, स्‍केबीज माइट्स के कारण होता है, लेप्टोस्पायरोसिस एक प्रकार का बैक्‍टीर‍ियल इंफेक्‍शन है और बार्टोनेला हेन्सेले नामक बैक्‍टीर‍िया के कारण कैट स्‍क्रैच ड‍िजीज हो सकता है। बचाव के ल‍िए पालतू जानवरों को वैक्‍सीन लगाएं, सोने वाली जगह से दूर रखें, संपर्क के बाद हाथों को अच्‍छी तरह से साफ करें और त्‍वचा पर गोल चकत्ते, खुजली जैसे लक्षण नजर आने पर डॉक्‍टर से संपर्क करें।

image credit: magnific

FAQ

  • क्या कुत्ते के काटने पर हमेशा रेबीज होता है?

    नहीं, हर कुत्ते को रेबीज नहीं होता। अगर संक्रम‍ित जानवर काट लें, तो इंफेक्‍शन हो सकता है इसल‍िए कुत्ते के काटने पर तुरंत डॉक्‍टर से संपर्क करें।
  • जानवर के काटने या खरोंचने पर तुरंत क्या करें?

    घाव को तुरंत साबुन और पानी से अच्छी तरह साफ करें। अगर जानवर को रेबीज का खतरा है, तो डॉक्टर से जल्‍द संपर्क करें।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Sep 21, 2026 13:33 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
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