चेहरे पर अचानक उभरने वाले भूरे या गहरे रंग के पैच अक्सर लोगों के लिए चिंता का कारण बन जाते हैं। खासकर गालों, माथे, नाक के आसपास और ऊपरी होंठ पर दिखाई देने वाले इन निशानों को कई बार लोग केवल धूप में रहने का नतीजा मान लेते हैं। हालांकि, मेलाज्मा (Melasma) एक ऐसी त्वचा संबंधी समस्या है, जिसके पीछे सिर्फ सूर्य की अल्ट्रावायलेट रेज ही जिम्मेदार नहीं होतीं। हार्मोनल बदलाव, आनुवंशिक कारक, थायराइड से जुड़ी समस्याएं, कुछ दवाएं और यहां तक कि त्वचा पर पड़ने वाली गर्मी भी इसके उभरने या बढ़ने में भूमिका निभा सकती है।
क्या है मेलाज्मा और क्यों होते हैं भूरे पैच?
Cause Of Melasma Brown Patches On Face
राजौरी गार्डन स्थित Advanced Skin Clinic की Founder, Aesthetic Physician, Cosmetologist And Skin Specialist डॉ. करुणा मल्होत्रा के अनुसार, "मेलाज्मा त्वचा में मेलेनिन यानी रंग बनाने वाले पिग्मेंट के अधिक उत्पादन के कारण होने वाली पिग्मेंटेशन की समस्या है। इसमें चेहरे पर भूरे, हल्के भूरे (Grey-brown) रंग के धब्बे दिखाई देने लगते हैं। यह समस्या महिलाओं में अधिक देखी जाती है, हालांकि पुरुष भी इससे प्रभावित हो सकते हैं। मेलाज्मा आमतौर पर गालों, माथे, नाक और ऊपरी होंठ पर दिखाई देता है। यह संक्रामक नहीं है, लेकिन कई बार लंबे समय तक बना रह सकता है और दोबारा उभर सकता है।"
NCBI के StatPearls डेटाबेस में प्रकाशित एक अध्ययन गाइड के अनुसार, मेलाज्मा केवल सामान्य टैनिंग या सामान्य पिग्मेंटेशन नहीं है, बल्कि यह एक क्रोनिक और बार-बार लौटने वाली समस्या है। वहीं, Springer के मेडिकल जर्नल Dermatology and Therapy में प्रकाशित शोध से पता चलता है कि मेलाज्मा केवल धूप या सतही कारणों से नहीं होता है। यह आनुवंशिक, अल्ट्रा वायलेट रेज, हार्मोनल बदलाव (गर्भावस्था, गर्भनिरोधक गोलियां) का परिणाम भी हो सकता है।
इसे भी पढ़ें: चेहरे के काले-भूरे धब्बों को न करें नजरअंदाज, मेलाज्मा का हो सकता है संकेत
सूरज की रोशनी के अलावा ये कारण भी हैं जिम्मेदार
1. हार्मोनल बदलाव
महिलाओं में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन के स्तर में बदलाव मेलाज्मा को प्रभावित कर सकते हैं। गर्भावस्था के दौरान होने वाले हार्मोनल परिवर्तन के कारण कई महिलाओं के चेहरे पर पिग्मेंटेशन बढ़ जाता है। इसी वजह से इसे कभी-कभी प्रेग्नेंसी मास्क भी कहा जाता है। गर्भनिरोधक गोलियों और हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी के दौरान भी कुछ महिलाओं में मेलाज्मा की समस्या हो जाती है।
2. आनुवंशिक कारण
अगर परिवार में माता-पिता या किसी करीबी रिश्तेदार को मेलाज्मा की समस्या रही है, तो दूसरे सदस्यों में भी इसका जोखिम बढ़ सकता है। जिन लोगों की त्वचा में पिग्मेंटेशन बनने की प्रवृत्ति अधिक होती है, उनमें यह समस्या आसानी से उभर सकती है।
3. गर्मी और इंफ्रारेड किरणें
बहुत से लोग मानते हैं कि सनस्क्रीन लगाने के बाद मेलाज्मा की चिंता खत्म हो जाती है। लेकिन ऐसा नहीं है। तेज गर्मी, गर्म वातावरण और इंफ्रारेड किरणें भी त्वचा में पिग्मेंटेशन को बढ़ावा दे सकती हैं। लगातार गर्मी के संपर्क में रहना, रसोई में लंबे समय तक काम करना या अत्यधिक गर्म वातावरण में रहना कुछ लोगों में समस्या को बढ़ा सकता है।
इसे भी पढ़ें: धूप से होने वाली पिग्मेंटेशन से कैसे बचें? डर्मेटोलॉजिस्ट से जानें
4. तनाव और नींद की कमी
लंबे समय तक तनाव में रहना और पर्याप्त नींद न लेना त्वचा की सेहत को प्रभावित कर सकता है। तनाव शरीर में हार्मोनल और सूजन संबंधी प्रक्रियाओं को प्रभावित करता है। हालांकि तनाव को मेलाज्मा का सीधा और प्रमाणित कारण नहीं माना जाता, लेकिन यह त्वचा की मौजूदा समस्याओं को संभालना मुश्किल बना सकता है।
5. थायराइड और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं
कुछ अध्ययनों में मेलाज्मा और थायराइड संबंधी विकारों के बीच संभावित संबंध देखा गया है। हालांकि, हर मेलाज्मा मरीज में थायराइड की समस्या हो, यह जरूरी नहीं है। इसलिए केवल चेहरे पर भूरे पैच देखकर किसी बीमारी का निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए।
6. दवाएं और कॉस्मेटिक प्रोडक्ट का प्रभाव
कुछ दवाएं त्वचा को प्रकाश के प्रति अधिक संवेदनशील बना सकती हैं। इसके अलावा, तेज केमिकल वाले स्किनकेयर उत्पाद, गलत तरीके से किए गए पील्स या त्वचा में जलन पैदा करने वाले कॉस्मेटिक्स भी पिग्मेंटेशन को बढ़ा सकते हैं।
मेलाज्मा से बचाव और उपचार के लिए क्या करें?
मेलाज्मा को नियंत्रित करने के लिए सबसे पहले इसके संभावित कारणों और ट्रिगर्स को समझना जरूरी है। रोजाना ब्रॉड-स्पेक्ट्रम SPF 30 या उससे अधिक वाला सनस्क्रीन लगाएं। मेलाज्मा की समस्या में आयरन ऑक्साइड युक्त टिंटेड सनस्क्रीन विशेष रूप से उपयोगी हो सकता है। बाहर रहने पर हर दो से तीन घंटे में सनस्क्रीन दोबारा लगाएं। इसके साथ टोपी, छाते और धूप से बचाव करने वाले कपड़ों का इस्तेमाल करें।
त्वचा पर बिना डॉक्टर की सलाह के ब्लीच, तेज एक्सफोलिएटिंग उत्पाद या स्टेरॉयड युक्त क्रीम का इस्तेमाल न करें। त्वचा विशेषज्ञ की सलाह से एजेलिक एसिड, विटामिन सी, नियासिनामाइड या अन्य उपयुक्त पिग्मेंटेशन कम करने वाले उपचार अपनाए जा सकते हैं। कुछ मामलों में केमिकल पील्स और लेजर उपचार की भी जरूरत पड़ सकती है, लेकिन इनका चुनाव त्वचा की स्थिति और मेलाज्मा की गहराई को देखकर ही करना चाहिए।
इसे भी पढ़ें: कहीं आपकी ड्राई स्किन का कारण कम पानी पीने की आदत तो नहीं? डर्मेटोलॉलिज्ट से समझें पूरा साइंस
निष्कर्ष
डॉ. करुणा मल्होत्रा के अनुसार, "मेलाज्मा का उपचार केवल चेहरे के दाग-धब्बे हल्के करने तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसके पीछे मौजूद ट्रिगर्स की पहचान करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यह एक ऐसी समस्या है जिसमें परिणाम आने में समय लग सकता है और दोबारा पिग्मेंटेशन होने की आशंका भी रहती है। इसलिए नियमित सन प्रोटेक्शन, सही स्किनकेयर और त्वचा विशेषज्ञ की निगरानी में उपचार अपनाना जरूरी है।" जल्द रिजल्ट पाने के लिए बिना सोचे-समझे कोई भी ट्रीटमेंट न लें। इसके बजाय धैर्य रखें और अपनी स्किन टाइप के अनुसार अपने लिए सही ट्रीटमेंट चुनें। यह अधिक फायदेमंद होगा।
All Image Credit: Magnific
FAQ
क्या लैपटॉप और मोबाइल की स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी (Blue Light) भी मेलाज्मा बढ़ा सकती है?
हां, डिजिटल स्क्रीन्स से निकलने वाली हाई-एनर्जी विजिबल (HEV) लाइट त्वचा के मेलानोसाइट्स को उत्तेजित करके मेलाज्मा का कारण बन सकती है।क्या चेहरे पर मेलाज्मा होने पर वैक्सिंग या थ्रेडिंग करवानी चाहिए?
एक्सपर्ट सलाह देते हैं मेलाज्मा होने पर वैक्सिंग या थ्रेडिंग नहीं करवानी चाहिए। वैक्सिंग की गर्मी और खिंचाव से त्वचा में पोस्ट-इंफ्लेमेटरी हाइपरपिग्मेंटेशन (PIH) हो सकता है, जिससे मेलाज्मा के पैच और अधिक उभरने लगते हैं।
इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।
How we keep this article up to date:
We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.
-
Current Version
Oct 31, 2026 10:51 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Karuna Malhotra
