Fri Sep 11, 2026 | 06:53 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shobha Gupta , Medical Director and IVF Consultant

क्या वाकई ब्रेस्टफीडिंग के दौरान असुरक्षित सेक्स से प्रेग्नेंसी का खतरा नहीं होता? जानें डॉक्टर से

ब्रेस्टफीडिंग के दौरान असुरक्षित सेक्स से प्रेग्नेंसी का खतरा नहीं होता है, यह एक गलतफहमी है। असल में, ब्रेस्टफीडिंग के दौरान एक ऐसा हार्मोन रिलीज होता है, जो कि कंसीव करने से रोकता है। मगर यह प्रेग्नेंसी के खतरे को पूरी तरह नहीं टालता है। क्यों? जानें इस लेख में।

अक्सर महिलाओं को लगता है कि ब्रेस्टफीडिंग के दौरान असुरक्षित यौन संबंध बानाने पर प्रेग्नेंसी का खतरा नहीं होता है। यही कारण है कि जब महिलाएं यौन संबंध बनाने के लिए पूरी तरह सक्षम हो जाती हैं, मेंटली-फिजिकली खुद को तैयार कर लेती हैं, इसके बाद सेक्शुअल रिलेशनशिप के लिए वे सुरक्षा का इस्तेमाल नहीं करती हैं। जबकि यह सही नहीं है। ब्रेस्टफीडिंग कराने के दौरान भले ही प्रेग्नेंसी की संभावना कम होती है, लेकिन सौ फीसदी गारंटी नहीं है कि प्रेग्नेंसी नहीं होगी। आइए, जानते और समझते हैं इन्हीं बातों को और भी विस्तार से। इस बारे में जानने के लिए हमने वृंदावन स्थित Mumma's Blessing IVF और Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट और IVF स्पेशलिस्ट डॉ. शोभा गुप्ता से बात की।

क्या ब्रेस्टफीडिंग के दौरान प्रेग्नेंसी का रिस्क नहीं होता है?

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Harvard Health Publishing की मानें, तो अक्सर लोगों को लगता है कि ब्रेस्टफीड कराने के दौरान महिलाएं कंसीव नहीं कर पाती हैं, जबकि यह पूरा सच नहीं है। हकीकत यह है कि ब्रेस्टफीडिंग के दौरान कंसीव करने की संभावना कम होती है, लेकिन प्रेग्नेंसी न हो, इसकी गारंटी नहीं होती है।

डॉ. शोभा गुप्ता समझाती हैं, "निश्चित तौर पर ब्रेस्टफीडिंग के दौरान शरीर में ऐसे हार्मोन रिलीज होते हैं, जिनकी वजह से एग्स रिलीज बनने की संभावना कम हो जाती है। इसके बावजूद, यह नहीं कहा जा सकता है कि ब्रेस्टफीडिंग के दौरान असुरक्षित सेक्स करने से महिलाएं कंसीव नहीं कर सकती हैं।" डॉ. शोभा गुप्ता आगे कहती हैं, "दरअसल, डिलीवरी के बाद पहला पीरियड आने से पहले ही अंडा रिलीज हो सकता है। इसका मतलब है कि महिला की फर्टिलिटी यानी प्रजनन क्षमता वापस आने का एहसास होने से पहले ही वह कंसीव कर सकती हैं।"

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ब्रेस्टफीडिंग फर्टिलिटी को कैसे प्रभावित करती है?

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प्रोलैक्टिन हार्मोन का बढ़नाः डिलीवरी के बाद महिलाओं के शरीर में प्रोलैक्टिन हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। यह हार्मोन महिलाओं में मिल्क प्रोडक्शन को बढ़ाने में का काम करता है। जब शरीर में इस हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, तो कई महिलाओं में एग्स बनने की प्रक्रिया रुक जाती है।

लैक्टेशनल एमेनोरिया मेथडः यह एक तरह से प्राकृतिक गर्भनिरोधक है। इसका मतलब है कि जब महिलाएं अपने शिशु को पूरी तरह से सिर्फ और सिर्फ अपना दूध पिलाती हैं, शिशु की उम्र 6 माह से कम है और महिला के पीरियड्स नहीं आए हैं। इन तीनों स्थिति को ही लैक्टेशनल एमेनोरिया मेथड कहा जाता है, जिससे महिला असुरक्षित यौन संबंध बनाने के बावजूद कंसीव नहीं करती हैं। लेकिन इसे भी स्थायी गर्भनिरोध नहीं माना जाना चाहिए।

अनजान संकेतः जैसा कि कुछ देर पहले ही बताया है कि ब्रेस्टफीडिंग के दौरान कई बार महिला को ओव्यूलेशन हो जाता है, लेकिन पीरियड्स नहीं आते हैं। ओव्यूलेशन के दौरान असुरक्षित सेक्स किया जाए, तो कंसीव करने की संभावना बनी रहती है। इसलिए, ध्यान रखें कि पीरियड न आने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप प्रेगनेंसी से पूरी तरह सुरक्षित हैं।

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कंसीव करने की संभावना कब बढ़ती है?

ब्रेस्टफीडिंग कराने के बावजूद कंसीव करने की संभावना कई मामलों में बढ़ जाती है, जैसे-

  1. अगर शिशु को दूध लंबे-लंबे गैप के बाद पिलाती हैं, तो इससे असुरक्षित यौन संबंध बनाने के कारण कंसीव करने की संभावना बढ़ जाती है। विशेषकर, रात के समय शिशु को दूध पिलाने में लंबे गैप का ध्यान रखा जाना चाहिए।
  2. अगर आप शिशु को ऊपरी खाना या फॉर्मूला जैसी ठोस चीजें खाने के लिए दे रही हैं, पानी और डिब्बाबंद दूध भी दे रही हैं, तो महिला में मिल्क प्रोडक्शन बाधित होने लगता है। 
  3. शिशु अपने भरण-पोषण के लिए सिर्फ मां पर निर्भर नहीं है। वहीं, अगर शिशु ठोस आहार ले रहा है, तो भी महिला द्वारा कंसीव करने की संभावना बढ़ जाती है।
  4. अगर मां शिशु को सीधे अपने स्तन से दूध पिलाने के बजाय ब्रेस्ट पंप का इस्तेमाल करती हैं, तो महिला के शरीर में वैसे हार्मोन नहीं होते जैसे बच्चे के सीधे दूध पीने से होते हैं।

किन बातों का रखें ध्यान?

अगर आपका शिशु अभी छोटा है और फिलहाल आप कंसीव नहीं करना चाहती हैं, तो कुछ बातों का ध्यान रख सकती हैं, जैसे-

  • डाॅक्टर की सलाह पर गर्भनिरोधक गोलियां ले सकती हैं। हालांकि, ब्रेस्टफीडिंग के दौरान किस तरह की दवा लेनी चाहिए और किस तरह की की नहीं, इसकी सटीक जानकारी आपको डॉक्टर से लेनी चाहिए।
  • अनचाही प्रेग्नेंसी रोकने के लिए महिलाएं IUD लगवा सकती हैं। यह एक छोटा सा डिवाइस होता है, जिसे गर्भाशय में लगाया जाता है। आईयूडी लगाने पर असुरक्षित यौन संबंध बनाने के बावजूद कंसीव करने की संभावना लगभग खत्म हो जाती है।
  • अनचाही प्रेग्नेंसी से बचने के लिए सबसे अच्छा तरीका है, कंडोम का इस्तेमाल करना। आपका शिशु बहुत छोटा है, ब्रेस्टफीड करता है, तो ऐसे में आवश्यक है कि आप यौन संबंध बनाने के लिए सुरक्षा का उपयोग करें। इसे कई बीमारियों से भी बचाव होता है।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर कहने का मतलब यह है कि ब्रेस्टफीडिंग कराते हुए असुरक्षित यौन संबंध बनाने के बावजूद आप कंसीव कर सकती हैं। ऐसा खासकर, तब होता है जब शिशु मां के दूध के साथ-साथ बाहरी चीजों का भी सेवन करता है। असल में, जब शिशु सिर्फ मां का ही दूध पीता है, तो महिला के शरीर में ऐसे हार्मोन रिलीज होते हैं, जो गर्भनिरोध की तरह काम करते हैं।

All Image Credit: Magnific

FAQ

  • डिलीवरी के कितने समय बाद कॉपर-टी (IUD) या अन्य बर्थ कंट्रोल मेथड अपनाना सुरक्षित माना जाता है?

    ज्यादातर मामलों में डिलीवरी के तुरंत बाद या 6 सप्ताह बाद डॉक्टर की सलाह पर नॉन-हार्मोनल IUD (जैसे कॉपर-टी) आदि लगाया जा सकता है।
  • क्या पंपिंग करने से लैक्टेशनल एमेनोरिया मेथड (LAM) का असर कम हो जाता है?

    हां, जब शिशु सीधे स्तन से दूध पीता है, तो त्वचा के संपर्क (Nipple Stimulation) से प्रोलैक्टिन और ऑक्सीटोसिन हार्मोन अधिक मात्रा में रिलीज होते हैं। पंप का इस्तेमाल करने से हार्मोनल रिस्पॉन्स बदल जाता है।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Meera Tagore

Meera Tagore

Senior Sub Editor

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Aug 21, 2026 17:26 IST

    Published By : Meera Tagore
    Reviewed By : Dr Shobha Gupta

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