Fri Sep 11, 2026 | 09:04 PM IST

Medically Reviewed by Neha Mohan Sinha , Clinical Nutrition and Dietetics

गाजर में मौजूद बीटा-कैरोटीन है हेल्‍दी त्‍वचा का सीक्रेट, जानें कैसे पहुंंचाता है लाभ?

बीटा-कैरोटीन गाजर में पाए जाने वाला नारंगी पि‍ग्‍मेंट है जो डाइट से ल‍िया जाता है और यह स्‍क‍िन हेल्‍थ के ल‍िए बेहद फायदेमंद है। यह शरीर में विटामिन-ए (रेटिनॉल) में बदल जाता है जो स्‍क‍िन को बाहरी नुकसार से बचाने में मदद करता है।

Benefits Of Beta Carotene Present In Carrot For Skin: सर्द‍ियों की खास सब्‍जी गाजर (Carrot) आ चुकी है। लाल-लाल गाजर खाने में ज‍ितनी स्‍वाद‍िष्‍ट लगती है उतनी ही यह त्‍वचा के ल‍िए फायदेमंद होती है। गाजर में मौजूद बीटा-कैरोटीन त्‍वचा को कई लाभ पहुंचाते हैं। बीटा-कैरोटीन यूवी रेड‍िएशन, प्रदूषण और ऑक्‍सीडेट‍िव स्‍ट्रेस से बनने वाले फ्री रेड‍िकल्‍स को बेअसर करता है जो समय से पहले एज‍िंंग का मुख्‍य कारण है। इन हान‍िकारक तत्‍वों को खत्‍म करके बीटा-कैरोटीन स्‍क‍िन सेल्‍स को डैमेज से बचाता है ज‍िससे फाइन लाइन्‍स, झुर्र‍ियां और एज‍िंग स्‍पॉट्स कम नजर आते हैं। जर्नल ऑफ इन्वेस्टिगेटिव डर्मेटोलॉजी सहित कई स्टडी से पता चलता है कि गाजर जैसे बीटा-कैरोटीन से भरपूर फूड्स का न‍ियम‍ित सेवन करने से त्‍वचा स्‍मूथ और ज्‍यादा जवां नजर आती है। इस लेख में हम जानेंगे त्‍वचा के ल‍िए गाजर में मौजूद बीटा-कैरोटीन के फायदे। इस व‍िषय पर बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Neha Sinha, Nutritionist At The Nutriwise Clinic, Lucknow और Dr. Sherin Jose, Consultant Dermatologist,Yashoda Hospitals, Hyderabad से बात की।

फाइन लाइन्‍स और रिंकल्‍स दूर होते हैं

Nutritionist Neha Sinha ने बताया क‍ि गाजर में एंटीऑक्‍सीडेंट्स और प्रो व‍िटाम‍िन-ए होता है जो व‍िटाम‍िन-ए में कंवर्ट हो जाता है। गाजर का सेवन करने से नए सेल्‍स बनने में म‍दद म‍िलती है। गाजर में मौजूद एंटीऑक्‍सीडेंट्स से फ्री रेड‍िकल्‍स से लड़ने में मदद म‍िलती है और फाइन लाइन्‍स और र‍िंकल्‍स की समस्‍या दूर होती है।

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स्‍क‍िन को हाइड्रेट रखता है गाजर में मौजूद बीटा-कैरोटीन

Dr. Sherin Jose ने बताया क‍ि गाजर में मौजूद बीटा-कैरोटीन से सेरामाइड प्रोडक्‍शन को सपोट म‍िलता है। इससे स्‍क‍िन को हाइड्रेशन म‍िलता है। सेरामाइड प्रोडक्‍शन जरूरी ल‍िप‍िड हैं जो नमी को लॉक करते हैं और वॉटर लॉस को रोकते हैं। बीटा-कैरोटीन एक्‍ज‍िमा जैसी ड्राई और पपड़ीदार स्‍क‍िन की समस्‍याओं के ल‍िए फायदेमंद है। इससे स्‍क‍िन इलाास्‍ट‍िस‍िटी में सुधार आता है।

स्‍क‍िन को र‍िपेयर करता है बीटा-कैरोटीन

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गाजर में मौजूद बीटा-कैरोटीन त्‍वचा को र‍िपेयर करता है और रीजनरेशन में मदद करता है। इससे घाव जल्‍दी भरते हैं और मुंहासों के न‍िशान या सनस्‍पॉट्स से होने वाली हाइपरप‍िंग्‍मेंटेशन की समस्‍या दूर होती है। तेज धूप से त्‍वचा का बचाव करने के ल‍ि‍ए भी बीटा-कैरोटीन फायदेमंद है।

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त्‍वचा की बीमा‍र‍ियों से बचाव होता है

गाजर में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो त्‍वचा को सोरायस‍िस या रोसैस‍िया जैसी बीमार‍ियों से बचाते हैं। गाजर से म‍िलने वाला डाइटरी बीटा-कैरोटीन ज्‍यादा सुरक्ष‍ित है और यह आंखों और त्‍वचा को बेहतर रखने के ल‍िए दूसरे न्‍यूट्र‍िएंट्स के साथ म‍िलकर काम करता है।

गाजर को कच्‍चा या हल्‍का स्‍टीम करके खाएं

  • गाजर के ज्‍यादा से ज्‍यादा फायदे प्राप्‍त करने के ल‍िए उसे कच्‍चा या हल्‍का स्‍टीम करके खाएं।
  • रोजाना एक से दो मीड‍ियम आकार की गाजर खा सकते हैं। इसके साथ ही अलग-अलग प्रकार की चीजों को भी डाइट में शाम‍िल करना जरूरी है।

न‍िष्‍कर्ष:

गाजर में मौजूद बीटा-कैरोटीन स्किन को पोषण देता है। इसका सेवन शरीर के ल‍िए सुरक्ष‍ित है। फ‍िर भी अगर आपको कोई बीमारी है, तो डॉक्‍टर की सलाह लेकर ही गाजर का सेवन करें।

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jan 17, 2026 14:58 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
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