यूं ही नहीं होती शादी की रस्में, छिपे होते हैं ये 5 स्वास्थ्य लाभ

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
May 21, 2018
Quick Bites

  • सुखद वैवाहिक जीवन के लिये बहुत से रीतिरिवाजों और परंपराओं को निभाया जाता है।
  • हल्दी की रस्म शादी के मुख्य रस्मों में से एक है
  • बिंदी सिर्फ चेहरे को आकर्षक बनाने के लिए नहीं होते

 

दुनिया भर में भारतीय शादियां अपनी चमक-दमक और रीतिरिवाजों के कारण चर्चित हैं। भारतीय समाज शादी जैसे पवित्र बंधन में जब किसी युवक और युवती को बांधता है तो उनके भावी जीवन के लिये सब कुछ शुभ ही चाहता है इसलिये उनके सुखद वैवाहिक जीवन के लिये बहुत से रीतिरिवाजों और परंपराओं को निभाया जाता है। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि इन रस्मों के पीछे छुपे कारण महज धार्मिक नहीं, बल्कि पूरी तरह वैज्ञानिक हैं।

1. मेहंदी की रस्म

दुल्हन के हाथों पर रची मेहंदी का गाढ़ा रंग देखकर बेशक लोग कयास लगाएंगे कि उसकी शादीशुदा जिन्दगी कितनी प्यार भरी होने वाली है, लेकिन कम ही लोग ये जानते हैं कि मेहंदी लगाने की मुख्य वजह साजन का प्यार नहीं, मेहंदी के औषधीय गुण हैं। मेहंदी की खुशबू और ठंडक शादी ब्याह के दौरान होने वाले स्ट्रेस को कम करती है। यही वजह है कि कई राज्यों में मेहंदी की रस्म का बहुत अधिक महत्व होता है। दूल्हा-दुल्हन के अलावा बाकी औरतें भी इसे हाथ पैर में जरूर लगाती हैं।

2. हल्दी की रस्म

हल्दी की रस्म शादी के मुख्य रस्मों में से एक है। इस रस्म में दूल्हा-दुल्हन के शरीर पर अपने- अपने घरों में हल्दी से बना लेप लगाया जाता है क्योंकि इससे त्वचा की रंगत निखरती है। हल्दी केऔषधीय गुण शरीर और त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं। यह त्वचा में मौजूद बैक्टीरिया नष्ट करती है। हल्दी के लेप में तेल, गुलाबजल आदि मिलाया जाता है ताकि यह त्वचा की नमी को भी बनाये रखे। इसे लगाने से ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है और त्वचा प्राकृतिक रूप से निखरती है।

3. कंगन, बिछिया का आकर्षण

शादी के बाद दुल्हन की पहचान उसके हाथ के कंगन की खनक और पैर में बिछिया की चमक से भी होती है। जेवर पहनना शुभ तो है, लेकिन इनको पहनने के वैज्ञानिक कारण भी हैं। कंगन या चूडियां हाथ के एक्यूप्रेशर पॉइंट्स को प्रेस करती रहती हैं। इनके आगे-पीछे होने से फ्रिक्शन पैदा होता है और हाथ का ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है। सिन्दूर पडऩे के साथ ही लगभग सभी शादीशुदा महिलाएं पैर में बिछिया जरूर पहनती हैं। बिछिया चांदी से बनी रिंग होती है जिसे पैर की ऊंगलियों में पहना जाता है। चांदी एक गुड कंडक्टर धातु है और इसी वजह से यह पृथ्वी से ध्रुवीय ऊर्जा खींचकर हमारे शरीर में पहुंचाती है। पैर की दूसरी ऊंगली के नर्व गर्भाशय से जुड़ी होती हैं। बिछिया पहनने से ये नर्व ज्यादा एक्टिव रहती है जिससे गर्भाशय हेल्दी रहता है व मासिक चक्र नियमित रहता है।

4. सिन्दूर भरी मांग

मांग में चुटकी भर सिन्दूर सिर्फ आपका मैरिटल स्टेटस नहीं बताता, ये आपको हैल्दी व ठंडा रखने में भी कारगर है। सिन्दूर में हल्दी, नींबू और बहुत थोड़ी मात्रा में मरकरी डाला जाता है। शादी के दौरान जब दुल्हन की मांग में सिन्दूर डाला जाता है, तो सिन्दूर में मिला मरकरी उसे रिलैक्स कर ठंडक का एहसास देता है। वैज्ञानिकों के अनुसार मरकरी की वजह से ही सेक्स की इच्छा भी बनी रहती है। इसी वजह से कुंवारी लड़कियां व सिंगल वीमेन सिन्दूर नहीं लगाती।

5. माथे पर बिंदी और तिलक

बिंदी सिर्फ चेहरे को आकर्षक बनाने के लिए नहीं होते। दरअसल हमारे ऑय ब्रोज के बीच मौजूद नर्व हमारे शरीर को हेल्दी बनाये रखने में महत्वपूर्ण योगदान देती है। तिलक या कुमकुम शरीर की ऊर्जा नष्ट नहीं होने देते। तिलक के लिए चन्दन का इस्तेमाल करने पर शरीर को ठंडक मिलती है क्योंकि चन्दन की तासीर ठंडी होती है। गौरतलब है कि कृत्रिम बिंदी से भी प्रेशर पॉइंट दबते हैं और चेहरे का ब्लड सर्कुलेशन बढ़ जाता है।

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6. लाल आलता

बंगाल, ओडि़सा, बिहार जैसे राज्यों में दुल्हन के पैर में आलता लगाने (कहीं-कहीं दूल्हे के पैर में भी) से जुड़ी रस्म होती है। आलता मेहंदी की ही तरह पैर को ठंडक देता है। इसे लगाने पर तनाव कम होता है। प्राकृतिक तरीके से आलता का निर्माण पान के पत्ते या लाक से होता है। वैसे आजकल सिंथेटिक आलता भी मिलने लगा है।

7. अग्नि की मौजूदगी

अलग-अलग परिवारों में शादी की कई तरह की रस्में होती हैं लेकिन लगभग सभी शादियों में अग्नि को साक्षी रखकर दूल्हा-दुल्हन का सात फेरे लेना अहम होता है। इतना ही नहीं शादी के पहले होने वाली पूजा में भी अग्नि की भूमिका अहम मानी जाती है। दरअसल अग्नि वातावरण को शुद्ध करने के लिए जरूरी है। इससे नकारात्मकऊर्जा नष्ट होती है और सकारात्मक उर्जा का संचार होता है। हवन के दौरान अग्नि में डाली जाने वाली लकड़ी, चावल, घी आदि से उठने वाला धुआं घर के कीटाणुओं को नष्ट करता है और वातावरण को शुद्ध करता है।

8. स्वागत हाथ जोड़कर

सदियों से भारतीय संस्कृति में नमस्कार करके अतिथि के अभिवादन की प्रथा रही है। हालांकि आजकल लोग आपसी व्यवहार में हाय-हेलो ज्यादा करते हैं लेकिन बारातियों के स्वागत के लिए आज भी दुल्हन के परिवार वाले नमस्ते करना ही पसंद करते हैं।नमस्ते करते हुए हमारे दोनों हाथों की उंगलियों के टिप आपस में मिलकर वहां मौजूद प्रेशर पॉइंट्स को दबाते हैं। इससे सारी नर्व सक्रिय होती हैं और इसका असर सीधे हमारे आंख, कान और दिमाग पर पड़ता है। यही वजह है कि हमें ऐसे मेहमान लम्बे समय तक याद भी रहते हैं।

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