कम उम्र में सफेद हो रहे हैं बाल तो वात, पित्त और कफ दोष के अनुसार लगाएं तेल, जानें आपके लिए सही हेयर ऑयल

आयुर्वेद के अनुसार शरीर की तरह हमारे बाल भी तीन दोषों से जुड़े हुए हैं। ऐसे में बालों की समस्याएं इनके अनुसार हेयर ऑयल चुन कर ही दूर की जा सकती हैं।

Pallavi Kumari
Written by: Pallavi KumariPublished at: Oct 12, 2021
कम उम्र में सफेद हो रहे हैं बाल तो वात, पित्त और कफ दोष के अनुसार लगाएं तेल, जानें आपके लिए सही हेयर ऑयल

आयुर्वेद हमारे शरीर को बाकी दूसरी चीजों से बिलकुल अलग रख कर देखता है। आयुर्वेद के अनुसार शरीर पांच तत्व से बना है और इनका असंतुलन ही हमें बीमार बनाता है। पर इसके अलावा आयुर्वेद में शरीर के लिए कुछ अलग-अलग दोषों की भी बात की गई है जिससे लोगों की त्वचा और बालों का स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है। आयुर्वेद के अनुसार वात, पित्त और कफ दोष, जो कि हमारे शरीर की एनर्जी हैं इससे हमारे बालों का स्वास्थ्य भी जुड़ा हुआ है। हमारे बालों की समस्याएं इसी से जुड़ी होती हैं और जब हमें इन समस्याओं का इलाज करना होता है तो, हमें इन्हें ही बैलेंस करना पड़ता है। पर आज हम बात बालों के लिए आयुर्वेद के अनुसार इस्तेमाल किए जाने वाले तेलों (hair oil according to your hair dosha types) की करेंगे, जो कि अलग-अलग दोषों से जुड़े हुए हैं और बालों को अलग-अलग फायदे पहुंचाते हैं। इसी बारे में हमने  डॉ. संजय शास्त्री  से बात की जो कि एक आयुर्वेदिक डॉक्टर हैं और लखनऊ आयुर्वेदा क्लीनिक में कार्यरत हैं। 

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आयुर्वेद के अलग-अलग दोषों के अनुसार बालों का स्वास्थ्य- Hair dosha types

डॉ. संजय शास्त्री के अनुसार हमारी स्कैल्प ऊर्जा से भरपूर कई बिंदुओं से बना है। जब हम बालों में तेल लगाते हैं तो ये इससे कई दोषों को निकालने में मदद मिलती है जिससे बालों में तनाव कम होता है और संतुलन बना रहता है। एक बार जब संतुलन बहाल हो जाता है, तो हम कई दोषों के कारण होने वाली बालों की समस्याओं से बच सकते हैं। जैसे कि 

-समय से पहले सफेद होना

- बालों का झड़ना

- मोटे बाल और रूसी 

इसके अलावा, आयुर्वेद के अनुसार बालों में तेल लगाने से बालों की जड़ों को मजबूत करने और बालों को पोषण देने में मदद मिलती है। साथ ही इससे नए बालों के विकास को बढ़ावा मिलता है, बालों की कंडीशनिंग होती है और बाल जड़ों से मजबूत बने रहते हैं।

आयुर्वेद के अनुसार बढ़े हुए दोषों के लक्षण -Hair dosha Symptoms

1. वात (vata) दोष बढ़ने के लक्षण 

-घुंघराले बाल

-ड्राई स्कैल्प

-पतले बाल

-दोमुंहे बाल

2. पित्त (pitta) दोष बढ़ने के लक्षण 

-रूसी के साथ ऑयली स्कैल्प

- समय से पहले बालों का सफेद होना 

-बालों में दर्द। 

3. कफ (Kafa) दोष बढ़ने के लक्षण 

-खुजलीदार स्कैल्प

-चिकना रूसी वाले घने बाल 

-ऑयली और भारी बाल

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दोषों के अनुसार बालों के लिए सही तेल-Hair oil according to your hair dosha types

1.  वात दोष में तेल (vata hair oil)

अगर आपके बाल वात दोष वाले हैं, तो 

-बादाम का तेल

- तिल का तेल

-अरंडी का तेल

-जैतून का तेल 

ये बालों के लिए बहुत पौष्टिक हो सकता है। ये स्कैल्प की ड्राईनेस को कम करता है। साथ ही आपको वात दोष के लिए बालों की देखभाल के रूटीन में कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। जैसे कि जब वात दोष में असंतुलन होता है, तो यह परतदार रूसी, अत्यधिक सूखापन और बालों के पतले होने का कारण बनता है। ऐसे में

- अपने बालों में हफ्ते में कम से कम 2 से 3 बार तेल लगाएं। 

- आप बालों को मजबूत करने वाली जड़ी-बूटियों जैसे भृंगराज, अश्वगंधा, शतावरी, आदि का उपयोग कर सकते हैं।

-वात एक शुष्क और ठंडा दोष है। तो, आपको वार्मिंग और पौष्टिक खाद्य पदार्थ जैसे बीज और नट्स का सेवन करना चाहिए। इसके अलावा, अपने आहार में ओमेगा 3 फैटी एसिड से भरपूर फूड्स भी शामिल करें।

2. पित्त दोष में तेल (Pitta hair oil)

अगर आप पित्त प्रधान वाले हैं, तो नारियल का तेल (coconut oil benefits) पित्त को शांत कर सकता है। साथ ही आप आर्गन ऑयल ऑयल का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा आप अपने हेयर केयर रूटीन में कुछ बातों को शामिल कर सकते हैं। जैसे कि पित्त दोष वाले बालों में अतिरिक्त गर्मी हो सकती है और यह हानिकारक हो सकता है। यह आपके बालों के जल्दी सफेद होने या पतले होने का कारण बन सकता है। ऐस में आंवला, गुड़हल और कलौंजी के बीजों जैसी ठंडी जड़ी-बूटियों को नारियल तेल में मिला कर लगाएं। साथ ही आप ब्राह्मी का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। साथ ही पित्त दोष वाले लोगों को मसालेदार भोजन से बचना चाहिए और ठंडी चीजों का सेवन करना चाहिए। 

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3. कफ दोष में तेल (Kafa hair oil)

अगर आपके बाल कफ प्रधान हैं, तो तिल या जैतून का तेल आपके लिए सबसे अच्छा विकल्प है। इसमें अगर आप डैंड्रफ से जूझ रहे हैं, तो सप्ताह में हर दिन नीम का तेल लगाएं। आयुर्वेदिक में, कफ दोष के लिए बालों की देखभाल की व्यवस्था स्कैल्प और बालों पर केंद्रित है। आपको सप्ताह में 2 से 3 बार त्रिफला, रीठा और शिकाकाई पाउडर जैसी जड़ी-बूटियों से अपने बालों को साफ करने की जरूरत है। कफ दोष वाले लोगों के आहार में हल्का, गर्म भोजन शामिल होना चाहिए। 

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बालों में तेल कब और कैसे लगाएं?

आयुर्वेद के अनुसार सप्ताह में एक बार अपने बालों में तेल लगाएं और इसलिए सप्ताह में एक बार अपने बालों को धोएं। अगर आपके बाल ज्यादा सूखे हैं या उनमें बहुत अधिक रूसी है, तो आप सप्ताह में दो या तीन बार बालों में तेल लगाना चाहिए, लेकिन उससे ज्यादा नहीं।बालों में तेल लगाने का सबसे अच्छा तरीका है कि एक छोटी कटोरी में गुनगुना तेल लें, दूसरे हाथ से सिर के ऊपर के बालों को अलग करते हुए तेल में उंगलियों को डुबोएं और बालों को लगाएं। फिर, बालों को बगल वाली जगह पर बांट लें और तेल लगाएं और इस प्रक्रिया को तब तक दोहराएं जब तक कि आप अपने पूरे सिर पर तेल न लगा लें। अंत में, ब्लड सर्कुलेशन को सही रखने के लिए गोलाकार गति में  अपने स्कैल्प की हल्की मालिश करें, जिससे सिर ठंडा हो जाए और अतिरिक्त दोषों से स्कैल्प मुक्त हो जाए।

आयुर्वेद के अनुसार बाल में तेल रात को लगाना चाहिए। फिर रात भर तेल को बालों में छोड़ दें और अगली सुबह इसे एक सौम्य शैम्पू  और गुनगुने पानी से धो लें। सोने से एक घंटे पहले ये करने से ये नींद की गुणवत्ता में सुधार करता है। ध्यान रहे कि आयुर्वेद में नहाने के बाद बालों में तेल लगाने की सलाह नहीं दी जाती है क्योंकि धूप में बाहर निकलने पर यह धूल को आकर्षित कर सकता है जिससे गंदगी के कारण स्कैल्प इंफेक्शन और डैंड्रफ हो जाते हैं। 

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