आयुर्वेदाचार्य से जानें 'स्वर्ण भस्म' का सेवन करने के 7 फायदे और सही तरीका

Gold or Swarna Bhasma : स्वर्ण भस्म एक आयुर्वेदिक औषधि है। इसका इस्तेमाल कई रोगों को दूर करने के लिए किया जाता है। जानें इसके फायदे और उपयोग का तरीका

Anju Rawat
Written by: Anju RawatPublished at: Jun 18, 2021Updated at: Jun 21, 2021
आयुर्वेदाचार्य से जानें 'स्वर्ण भस्म' का सेवन करने के 7 फायदे और सही तरीका

क्या आपने कभी स्वर्ण भस्म के बारे में सुना है? स्वर्ण भस्मा एक आयुर्वेदिक औषधि है, जिसका उपयोग शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने (Swarna Bhasma Increase Immunity) और बीमारियों को दूर करने के लिए किया जाता है। आयुर्वेद में इसका इस्तेमाल रोगों का इलाज करने के लिए किया जाता है। स्वर्ण भस्म एक रसायन होता है। इसे गोल्ड भस्म और स्वर्णा भस्म (Gold or Swarna Bhasma) के नाम से भी जाना जाता है। राम हंस चेरीटेबल हॉस्पिटल के आयुर्वेदाचार्य डॉक्टर श्रेय शर्मा (Dr Shrey Sharma, Ayurvedacharya of Ram Hans Charitable Hospital) बताते हैं कि स्वर्ण भस्म के इस्तेमाल से स्वास्थ्य को कई फायदे मिलते हैं। यह बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास (Physical and Mental Development) में बेहद लाभकारी होता है।

डॉक्टर श्रेय बताते हैं कि स्वर्ण भस्म तासीर में ठंडी होती है, ऐसे में पित्त प्रकृति वाले लोग भी इसका सेवन कर सकते हैं। इसमें कई सारे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जिससे आप एकदम स्वस्थ रह सकते हैं। 

स्वर्ण भस्म में पोषक तत्व (Nutrients in Swarna or Gold Bhasma)

स्वर्ण भस्म में कई सारे पोषक तत्व पाए जाते हैं, तभी इसे सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है। इसमें मौजूद सभी पोषक तत्व हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी और लाभकारी होते हैं।

  • आयरन (Iron)
  • सिलिका (Silica)
  • कैल्शियम (Calcium)
  • सल्फर (Sulphur)
  • कॉपर (Copper)
  • पोटैशियम (Potassium)
  • सोडियम (Sodium)
  • फेरस ऑक्साइड (Ferrous Oxide)
Swarna Bhasma for Makes Strong

1. पुरानी बीमारियों के इलाज में सहायक स्वर्ण (Swarna Bhasma Helpful in Chronic Diseases)

डॉक्टर श्रेय शर्मा बताते हैं कि स्वर्ण भस्म का उपयोग तब किया जाता है, जब व्यक्ति को किसी दवा से आराम नहीं मिलता है। यानी यह सभी तरह की बीमारियों को ठीक करने में मददगार होता है। आयुर्वेद में स्वर्ण भस्म का उपयोग पुरानी से पुरानी बीमारियों को ठीक करने के लिए किया जाता है।

2. ताकतवर बनाता है स्वर्ण भस्म (Swarna Bhasma Makes Powerful)

जो लोग शारीरिक रूप से कमजोर होते हैं, उन्हें इसका सेवन जरूर करना चाहिए। स्वर्ण भस्म शरीर की कमजोरी को दूर करने में मदद करते हैं। अगर आपको दुबले-पतले हैं, तो आप डॉक्टर की सलाह पर इसका सेवन कर सकते हैं। इससे भूख में वृद्धि होती है, जिससे आप ताकतवर बनते हैं। भूख न लगने की स्थिति में भी इसका सेवन किया जा सकता है। बच्चों को शारीरिक विकास करने और उन्हें ताकतवर बनाने के लिए आप बच्चों को स्वर्ण भस्म का सेवन करवा सकते हैं। 

इसे भी पढ़ें - पित्त को बढ़ाते हैं ये 7 फूड्स, पित्त प्रकृति वाले न करें इनका सेवन

3. मानसिक विकास और स्वास्थ्य ठीक करें स्वर्ण भस्म (Swarna Bhasma Beneficial for Mental Health)

बच्चों को नियमित रूप से स्वर्ण भस्म का सेवन करवाने से उनका मानसिक विकास बहुत तेजी से होता है। स्वर्ण भस्म लेने वाला बच्चा दूसरे बच्चों की तुलना में ज्यादा समझदार, सक्रिय और विकसित होता है। साथ ही यह मानसिक स्वास्थ्य को भी बेहतर रखता है। इसके सेवन से मन शांत होता है, एकाग्रता और स्मरण शक्ति बढ़ती है। तनाव, चिंता और अवसाद की स्थिति में इसका सेवन किया जा सकता है।

4. यौन स्वास्थ्य में फायदेमंद (Swarna Bhasma Beneficial in Sexual Health)

स्वर्ण भस्म का इस्तेमाल पुरुष अपनी यौन शक्ति को बढ़ाने के लिए कर सकते हैं। इसके सेवन से पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या या स्पर्म काउंट (Sperm Count) में वृद्धि होती है। साथ ही यह शीघ्रपतन की समस्या में भी लाभकारी होता है। अगर आप इन समस्याओं से परेशान हैं, तो इसका सेवन आसानी से कर सकते हैं। यह महिला और पुरुषों दोनों की फर्टिलिटी को भी बढ़ाता है। 

Swarna Bhasma Increase Immunity

5. इम्यूनिटी बढ़ाने में मददगार (Swarna Bhasma Increase Immunity Power)

शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए स्वर्ण भस्म का सेवन करना बेहद लाभकारी होता है। आयुर्वेद में इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है। स्वर्ण भस्म में कई ऐसे पोषक तत्व होते हैं, जो बच्चे बड़े और बुजुर्गों की इम्यूनिटी पावर को बढ़ाने में मदद करते हैं। कोरोना काल में इम्यूनिटी का मजबूत होना बहुत जरूरी है, ऐसे में आप उन्हें इसका सेवन करवा सकते हैं।

6. कैंसर से करे बचाव (Swarna Bhasma Prevent From Cancer)

स्वर्ण भस्म में कई सारे ऐसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर में कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने से रोकते हैं। साथ ही आयुर्वेद में कैंसर का उपचार करने के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जाता है। यह एंटी-कैंसर दवा के रूप में काम करती है। लेकिन अगर आप कैंसर से पीड़ित हैं, तो डॉक्टर की सलाह पर ही इसका सेवन करें।

इसे भी पढ़ें - पिठवन के जड़ और पत्ते हैं औषधीय गुणों से भरपूर, जानें इस पौधे के फायदे और नुकसान

7. हृदय को रखे स्वस्थ स्वर्ण भस्म (Swarna Bhasma for Healthy Heart)

स्वर्ण भस्मा शरीर में रक्त संचार या ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर करने में मदद करता है। अपने दिल की सेहत (Heart Health) को हमेशा स्वस्थ रखने के लिए आप इसका सेवन कर सकते हैं। यह शरीर में खून के थक्के या ब्लड क्लॉट बनने से रोकता है। साथ ही हृदय के कार्यों में बाधा डालने वाले तत्वों को दूर करता है। आयुर्वेद में दिल से जुड़ी समस्याओं को ठीक करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन आप आपको दिल की कोई बीमारी है, तो डॉक्टर के परामर्श पर ही आपको इसका सेवन करना चाहिए।

Doctor on Swarna Bhasma

स्वर्ण भस्म के अन्य फायदे (Other Benefits of Swarna Bhasma)

  • फेफड़े मजबूत बनाएं स्वर्ण भस्म
  • पाचन तंत्र मजबूत बनाए स्वर्ण भस्म
  • स्किन से जुड़ी समस्याएं दूर करे स्वर्ण भस्म
  • आंखों के लिए भी फायदेमंद है स्वर्ण भस्म

स्वर्ण भस्म को लेने का तरीका (How to Use Swarna Bhasma)

स्वर्ण भस्म का सेवन बच्चे, बड़े और बुजुर्ग सभी आसानी से कर सकते हैं। आयुर्वेद में इसका इस्तेमाल कई बीमारियों को ठीक करने के लिए किया जाता है। साथ ही स्वस्थ व्यक्ति भी बीमारियों से अपना बचाव करने के लिए इसका सेवन कर सकता है। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाकर रोगों से लड़ने की शक्ति देता है।

  • बच्चे (Children) : 2-5 मिली ग्राम प्रतिदिन रोज सुबह दूध के साथ
  • वयस्क (Adult) : 5-20 मिली ग्राम प्रतिदिन रोज सुबह दूध के साथ

आप भी स्वर्ण भस्म के फायदों को पाने के लिए इसका सेवन कर सकते हैं। लेकिन ज्यादा मात्रा में आपको इसका सेवन करने से बचना चाहिए। अति हर चीज की बुरी होती है, इसका भी ज्यादा सेवन करने से नुकसान हो सकता है। साथ ही अगर आप किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं, तो डॉक्टर के परामर्श पर ही इसका सेवन करें। आप चाहें तो इसका सेवन शुरू करने से पहले अपने नजदीकी आयुर्वेदिक डॉक्टर से सलाह ले सकते हैं। 

Read More Articles on Ayurveda in Hindi

Disclaimer