स्ट्रोक को पहचानने में मदद कर सकता है ये 'F.A.S.T फॉर्मूला', जानें क्या है ये और स्ट्रोक से बचाव के उपाय

जितनी जल्दी किसी व्यक्ति को स्ट्रोक होता है, उतनी ही जल्दी उसका इलाज करना बेहद जरूरी है। ऐसे में आपको इस फॉर्मूले के बारे में जानना चाहिए। 

Pallavi Kumari
Written by: Pallavi KumariPublished at: Apr 15, 2021
स्ट्रोक को पहचानने में मदद कर सकता है ये 'F.A.S.T फॉर्मूला', जानें क्या है ये और स्ट्रोक से बचाव के उपाय

स्ट्रोक, ब्रेन के भीतर अचानक से होने वाली एक गड़बड़ी है, जिसमें ब्रेन के अंदर अचानक से खून की कमी या फिर क्लॉटिंग या फिर ब्लीडिंग होने लगती है।  से स्थिति काफी डरावनी होती है और इसमें मरीज को बचाने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है कि आप इसकी पहचान जल्द से जल्द करें, ताकि मरीज को समय रहते सही इलाज मिल सके। इसी बारे में हमने लखनऊ के उद्यान हेल्थ केयर में कार्यरत डॉ. राजीव सरदाना से भी बात की, जिन्होंने स्ट्रोक के बारे में जानकारी देते हुए इसे पहचानने का एक स्मार्ट तरीका बताया।  डॉ. राजीव कहते हैं कि दुनियाभर में ब्रेन स्ट्रोक से ज्यादातर लोगों की मृत्यु बस इस वजह से हो जाती है, क्योंकि समय रहते वो डॉक्टर तक नहीं पहुंच पाते हैं और इलाज से वंचित रह जाते हैं। ऐसे में आम लोगों में इसके प्रति थोड़ी जागरूकता होना बेहद जरूरी है। पर उससे पहले जानते हैं क्या होता है स्ट्रोक के प्रकार और लक्षण। 

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क्या है स्ट्रोक -What is Stroke?

डॉ. राजीव की मानें, तो स्ट्रोक तब होता है जब आपके मस्तिष्क में खून सही से पहुंच नहीं पाता है या रूक जाता है, जिसके चलते मस्तिष्क में ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की कमी हो जाती है और मस्तिष्क की कोशिकाएं काम करना बंद कर देती हैं या कहिए कि मरने लगती हैं। मेडिकल टर्म में बात करें, तो मोटे तौर पर 2 मिलियन मस्तिष्क कोशिकाएं स्ट्रोक के हर मिनट के दौरान मर जाती हैं, जिससे मृत्यु या मस्तिष्क क्षति का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए इस दौरान जल्द से जल्द डॉक्टर के पास पहुंचना बेहद जरूरी हो जाता है।  

स्ट्रोक के प्रकार-Types of Stroke

स्ट्रोक के दो मुख्य कारण हैं।  एक अवरुद्ध धमनी यानी कि इस्केमिक स्ट्रोक (ischemic stroke) या हेमरेजिक (रक्तस्रावी) स्ट्रोक (hemorrhagic stroke)जिसमें ब्लड वेसेल्स का रिसाव होता है या ये फट जाती हैं। कुछ लोगों के मस्तिष्क में अनाचक से ब्लड सर्कुलेशन रूक सकता है, जिसे क्षणिक इस्केमिक अटैक (टीआईए) के रूप में जाना जाता है, जिसके लक्षण लंबे समय तक नहीं रहते हैं। तो, आइए इन तीनों को थोड़ा विस्तार से समझ लेते हैं।

1. इस्केमिक स्ट्रोक (Ischemic Stroke)

इस्केमिक स्ट्रोकऑन सबसे आम प्रकार का स्ट्रोक है। यह तब होता है जब मस्तिष्क की ब्लड वेसेल्स संकुचित हो जाती हैं या ब्लॉक हो जाती हैं, जिससे ब्लड सर्कुलेशन में तेजी से कमी आ जाती है। इसमें ब्रेन के अंदर खून या ऑक्सीजन की कमी हो जाती है और स्ट्रोक आ जाता है। 

2. हेमरेजिक स्ट्रोक (Hemorrhagic Stroke)

हेमरेजिक स्ट्रोक तब होता है जब आपके मस्तिष्क में ब्लड वेसेल्स लीक या टूट जाती है। ब्रेन हेमरेज कई स्थितियों से हो सकता है जो आपके रक्त वाहिकाओं को प्रभावित करते हैं। हेमरेजिक स्ट्रोक के संबंधित कारकों में शामिल हैं:

  • -अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर
  • -आपके रक्त वाहिका की दीवारों में कमजोर धब्बे (एन्यूरिज्म)
  • -ट्रामा (जैसे कार दुर्घटना)
  • -ब्लड वेसेल्स में प्रोटीन का जमा हो जाना

3. क्षणिक इस्केमिक स्ट्रोक या हल्का स्ट्रोक (Transient ischemic attack)

ये एक क्षणिक इस्केमिक अटैक (टीआईए) है, जिसे कभी-कभी मिनिस्ट्रोक के रूप में जाना जाता है। ये अचानक से मस्तिष्क के हिस्से में खून की अस्थायी कमी के कारण होता है, जो पांच मिनट तक रह सकता है। पर इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ऐसा इसलिए क्योंकि अगर आपको TIA है, तो इसका मतलब है कि आपके मस्तिष्क में आंशिक रूप से अवरुद्ध या संकुचित धमनी हो सकती है। टीआईए होने से बाद में स्ट्रोक होने का खतरा और बढ़ जाता है।

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स्ट्रोक को पहचानने का 'F.A.S.T फार्मूला'

F.A.S.T स्ट्रोक पहचानने का सबसे आसान तरीका है। दरअसल, इसमें हमें स्ट्रोक वाले व्यक्ति में बस 4 चीजों को देखना है। जैसे कि

F-Face Drooping

इसका मतलब ये है कि हमें देखना है कि कहीं व्यक्ति के चेहरे का एक हिस्सा छुका हुआ सा तो नहीं है। या फिर हल्का टेढ़ा सा या अलग सा। ऐसे में व्यक्ति को मुस्कुराने के लिए कहना चाहिए ताकि आप उसकी शक्ल को देख कर तुरंत पहचान सके कि ये स्ट्रोक है या नहीं। 

A- Arm Weakness

इसमें हम व्यक्ति के हाथ की ताकत को चेक करते हैं कि कहीं उसका एक हाथ कमजोर तो नहीं है। या फिर क्या एक हाथ कमजोर या सुन्न है? इसके लिए व्यक्ति को दोनों हाथ ऊपर उठाने के लिए कहें। अगर इस दौरा एक हाथ नीचे की ओर जाने लगे या खुद ही बहने लगे, तो ये स्ट्रोक का संकेत है। 

S-Speech

स्पीच टेस्टिंग यानी कि इस दौरान ये देखना बहुत जरूरी है कि कहीं व्यक्ति को बोलने में तो कुछ दिक्कत नहीं हो रही। या आवाज लड़खड़ा तो नहीं रही। या व्यक्ति बोलने में असमर्थ है या समझने में मुश्किल हो रही है? ऐसे में व्यक्ति को एक साधारण वाक्य दोहराने के लिए कहें और फिर अगर कोई परेशानी हो रही है, तो ये स्ट्रोक का संकेत हो सकता है। 

T-Time to Call

इसका मतलब ये है कि बिना देरी किए अपने डॉक्टर को कॉल करें और आपात मदद लें। 

स्ट्रोक के लक्षण- Symptoms of Stroke

मस्तिष्क में ब्लड सर्कुलेशन का नुकसान मस्तिष्क के भीतर ऊतकों को नुकसान पहुंचाता है। मस्तिष्क के क्षतिग्रस्त क्षेत्रों द्वारा नियंत्रित शरीर के अलग-अलग अंगों में स्ट्रोक के लक्षण दिखाई देते हैं।  इस कारण से, हम शरीर के विभिन्न अंगों में स्ट्रोक के लक्षणों को देख सकते हैं। जैसे कि -

  • -हाथ, चेहरे और पैर में सुन्नता या कमजोरी
  • -शरीर के किसी एक तरफ कमजोरी
  • -बोलने या समझने में परेशानी
  • -उलझन
  • -दृष्टि की समस्याएं, जैसे कि एक या दोनों आंखों में देखने में परेशानी
  • -चलने में परेशानी
  • -चक्कर आना
  • - अचानक सिरदर्द

स्ट्रोक के जोखिम कारक-Risk factors

आज कल की खराब लाइफ स्टाइल के चलते युवा लोगों में स्ट्रोक के मामले तेजी से बढ़ते जा रहा हैं। हालांकि, युवाओं के अलावा ऐसे कई लोग और भी हैं, जिन्हें स्ट्रोक का खतरा बहुत ज्यादा है। जैसे कि

  • -हाई बीपी के मरीज को
  • -डायबिटीज के मरीज को
  • -अनियमित दिल की धड़कन वाले लोगों को
  • -बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रोल होने पर
  • -ज्यादा वजन वाले लोगों में
  • -स्मोकिंग करने वालों में
  • -शराब का भारी सेवन करने वालों में

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स्ट्रोक से बचाव के उपाय-Prevention tips for stroke

आप स्वस्थ जीवन शैली जीकर स्ट्रोक को रोकने के लिए बहुत कुछ कर सकते हैं। इसके लिए आपको अपने जीवन में कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। जैसे कि

  • -धूम्रपान छोड़ दें। इससे आपको हाई बीपी का खतरा रहता है।
  • -वजन संतुलित रखें। 
  • -ऐसे आहार का सेवन करें जो फलों और सब्जियों से भरा हो।
  • -कोलेस्ट्रॉल, ट्रांस वसा और संतृप्त वसा वाले खाद्य पदार्थ कम खाएं।
  • -शारीरिक रूप से सक्रिय रहें। यह आपको स्वस्थ वजन बनाए रखने में मदद करेगा और आपके रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद करेगा।

इसके अलावा ध्यान रखें कि रेगुलर बॉडी चेकअप करवाएं। जैसे कि अपने कोलेस्ट्रॉल और रक्तचाप की जांच करवाएं। अपनी जीवन शैली में जरूरत हो तो बदलाव करें। अपने चिकित्सक के साथ अपने दवा विकल्पों पर चर्चा करें। दिल की किसी भी बीमारी का इलाज करवाएं और डायबिटीज है, तो इसके सतुंलिच रखें। इस तरह आप खुद को स्ट्रोक से बचा सकते हैं। साथ ही ध्यान रखें कि इस फॉर्मूले को अपने जीवन में जरूर याद रखें और कभी किसी को जरूरत हो तो, तो तुरंत स्ट्रोक की पहचान करके डॉक्टर से मदद लें। 

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