45 साल से कम उम्र के लोगों को भी हो सकता है स्ट्रोक, डॉक्टर से जानें बचाव के लिए जरूरी बातें

स्ट्रोक की परेशानी सिर्फ उम्रदराज लोगों को ही हो, ऐसा जरूरी नहीं है। आज कल युवाओं में भी स्ट्रोक से जुड़ी परेशानी सामने आ रही है। डॉक्टर से जानें कारण।

Monika Agarwal
अन्य़ बीमारियांWritten by: Monika AgarwalPublished at: Jan 01, 2021
45 साल से कम उम्र के लोगों को भी हो सकता है स्ट्रोक, डॉक्टर से जानें बचाव के लिए जरूरी बातें

उम्रदराज लोगों में स्ट्रोक की समस्या आम होती है। कम उम्र के लोगों के लिए स्ट्रोक होने की संभावना अविश्वसनीय सी है। लेकिन आपकी लाइफस्टाइल, आपकी आदतों में बदलाव किसी भी उम्र में स्ट्रोक (Having stroke) के खतरे को बढ़ा सकती है। शोध की मानें तो जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, स्ट्रोक का खतरा और भी बढ़ जाता है। लेकिन स्ट्रोक नवजात, बच्चों और युवाओं में भी होता है। कोलंबिया एशिया हॉस्पिटल गाजियाबाद के कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर भूपेंद्र सिंह के अनुसार 10 से 15 प्रतिशत के स्ट्रोक के मामले 18 से 45 साल (stroke under 45) तक के लोगों में होता है। वो दौर अब बीत गया जब स्ट्रोक का खतरा सिर्फ उम्रदराज लोगों को होता था। आजकल युवा भी इससे ग्रसित हैं। शुरुआत में ही स्ट्रोक जैसे बड़े खतरे को रोका जा सकता है। जब हम युवा रोगी की बात कर रहे हैं, तो सबसे पहले जानने की जरूरत है कि ऐसा क्यों होता है। दरअसल स्ट्रोक भी 4 तरह के होते हैं। जो निम्न हैं।

stroke at young age

स्ट्रोक के प्रकार

1. पेटेंट फोरामेन ओवल (Patent Foramen Ovale)

पेटेंट फोरामेन स्ट्रोक को कभी-कभी पहचानना मुश्किल होता है। खासतौर पर युवाओं में इसके लक्षण को जल्दी नहीं पहचाना जा सकता। क्योंकि आमतौर पर वृद्धों में इसके लक्ष्ण अलग होते हैं। इस तरह का स्ट्रोक हर 4 में से 1 लोगों को होता है। इसमें जन्म के समय में ही दिल में छेद होता है।

2. आर्टरी में छेद होना

आमतौर पर इसकी जांच नहीं की जाती। जिससे ज्यादातर लोगों को अपनी इस बीमारी के बारे में पता ही नहीं होता। वहीं 45 साल से कम उम्र के लोगों में 25 फीसदी गर्दन में एक नस के कारण भी इसका खतरा बन सकता है। इसके शुरूआती लक्षण क्या हैं, आप भी जान लीजिये।

  • आपको अक्सर सिर दर्द की समस्या रह सकती है।
  • गर्दन से लेकर चेहरे और आंखों के आस-पास दर्द रह सकता है।
  • स्वाद में अचानक बदलाव भी इसका बड़ा लक्ष्ण है।
  • डबल दिखना या ड्रूपी आईलिड

3. क्लॉटिंग डिसॉर्डर

शरीर में कहीं भी क्लॉटिंग डिसॉर्डर की समस्या होने से खून का थक्का बनने लगता है। ये थक्का नसों में बनता हैं। जिससे ब्लड सर्कुलेशन नहीं हो पाता। ये युवाओं में स्ट्रोक का कारण बन सकता है।

4. सब्सटेंस अब्यूज़

वहीं अगर आदत धूम्रपान की हो तो, खून के थक्के और भी तेजी से जमने लगते हैं। जिससे स्ट्रोक की समस्या हो सकती है।

क्यों बढ़ रहे हैं स्ट्रोक के मामले?

युवाओं को इसका कारण जानना भी जरूरी है। आजकल खराब खानपान और खराब जीवन शैली के चलते युवा स्ट्रोक से ग्रसित हो रहे हैं। इसलिए युवाओं को स्ट्रोक से जुड़ी जानकारी होनी चाहिए।

जागरूकता का आभाव (No Awareness)-

स्ट्रोक के मामले में जागरूकता का आभाव उपचार के लिए एक बड़ी बाधा बन सकती है। जहां 45 साल से कम लोगों को स्ट्रोक के बारे में तो पता होता है। लेकिन जागरूकता के अभाव के चलते वो सही समय पर सही इलाज नहीं पाते। कई मायनों में ये एक बड़ी समस्या है।

stroke symptoms in hindi

खराब जीवनशैली (Poor Lifestyle)-

स्ट्रोक का खतरा आपकी खराब जीवनशैली पर भी निर्भर करता है। कुछ भी खा लेने से मोटापा, कोलेस्ट्रोल, हाई ब्लडप्रेशर, डायबटीज से ग्रसित लोगों को स्ट्रोक का खतरा सबसे ज्यादा होता है। अगर आप अपने जीवनशिली में सुधार करेंगे तो स्ट्रोक के खतरे से बच पाएंगे।

एक्सरसाइज न करना (Not exercising-

हमारे अच्छे स्वास्थ्य के लिए हमें एक्टिव रहना सबसे ज्यादा जरूरी है। हम अपने शरीर को तभी एक्टिव रख सकते हैं जब हम रोज कुछ देर, व्यायाम, रनिंग या अन्य प्रक्रियाएं करें। जिससे आपको बेहतर रिजल्ट मिलेगा। इसके अलावा स्ट्रोक के शुरुआती लक्षण में खून के थक्के हटाने के लिए, आप विश्वसनीय डॉक्टर की सलाह पर न्यूनतम इनवेसिव सर्जरी करवा सकते हैं।

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हर उम्र में हैं समान लक्षण (Having Same Symptoms Of The Problem)

स्ट्रोक की समस्या हर उम्र के लोगों को है। जिसके लक्षण भी लगभग समान ही होते हैं। इसमें उम्र कोई भी हो आँखों में समस्या, चेहरे में सूजन, हाथ में कमजोरी और सुन्नता हो सकती है। अगर आपको लगता है कि स्ट्रोक आपको प्रभावित नहीं कर सकता तो पहले सभी तथ्यों के बारे में जानना भी जरूरी है। क्योंकि अगर आपने स्ट्रोक के बारे में पूरी जानकारी हासिल कर ली तो आप अपने साथ-साथ अपने किसी करीबी की भी जान बचा सकते हैं।

डॉक्टर भूपेंद्र सिंह, कार्डियोलॉजी, कोलंबिया एशिया हॉस्पिटल, गाजियाबाद से बातचीत पर आधारित।

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