हमेशा रहने वाली थकान को न समझें मामूली, इस रोग का हो सकता है संकेत

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Apr 20, 2018
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Quick Bites

  • यह क्रॉनिक फटीग के लक्षण हो सकते हैं।
  • थकान का अनुभव लगभग सभी को होता है।
  • पुरुषों की तुलना में स्त्रियों में ये लक्षण अधिक नजर आते हैं।

थकान का अनुभव लगभग सभी को होता है। आराम करने या सोने के बाद थकान मिट जाती है। लेकिन जब थकान नींद लेने, आराम करने या चाय की एक प्याली के बाद भी न मिटे तो यह क्रॉनिक फटीग का लक्षण है। इस रोग में मरीज हमेशा सुस्ती महसूस करता है। सुस्ती का असर उसके मानसिक, शारीरिक व सामाजिक स्तर पर पडता है। व्यस्त दिनचर्या, खराब जीवनशैली, बीमारी, अनियमित व असंतुलित खानपान, वायरल इन्फेक्शन या बायो-साइकोलॉजिकल कारणों से ऐसा हो सकता है। आमतौर पर दिनचर्या बदलने, मनोवैज्ञानिक सलाह लेने, व्यायाम बढाने, डॉक्टर की सलाह पर दवा लेने के अलावा अच्छी नींद लेने से समस्या काफी हद तक ठीक हो जाती है। लेकिन क्रॉनिक फटीग का होना कुछ गंभीर समस्याओं की ओर भी इशारा करता है। मुख्य रूप से इन चार बीमारियों में क्रॉनिक फटीग के लक्षण दिखाई देते हैं। जानते हैं इनके बारे में।

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दिल के रोगों का खतरा

शोध बताते हैं कि हार्ट अटैक के 70 प्रतिशत मामलों में कुछ हफ्ते पहले से असामान्य थकान का अनुभव होने लगता है। पुरुषों की तुलना में स्त्रियों में ये लक्षण अधिक नजर आते हैं। आइए जानते हैं इसके बचाव—

  • धूम्रपान और एल्कोहॉल से दूर रहें।
  • संतुलित आहार लें और 30 से 60 मिनट की एरोबिक एक्सरसाइज करें।
  • वजन के अलावा कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखें। ट्रांस-फैट्स का सेवन न करें।

ये टेस्ट कराएं : कोलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर, शुगर टेस्ट और एंजियोग्राम कराएं। लिपिड प्रोफाइल, ईसीजी, टीएमटी टेस्ट भी कराएं। यदि सांस फूलती हो या कब्ज की समस्या हो तो डॉक्टरी सलाह पर सीटी स्कैन या इकोकार्डियोग्राम (इको और स्ट्रेस इको टेस्ट) करा सकते हैं।

लिवर की समस्या

लगातार थकान बनी रहने के कारण लिवर पर प्रभाव पड सकता है। ब्लड ट्रांस्फ्यूजन, कोकीन या ड्रग लेने की हिस्ट्री हो तो हेपेटाइटिस-सी की आशंका हो सकती है। इसमें मरीज को हल्का-हल्का बुखार, भूख न लगना, शरीर में दर्द या फ्लू जैसे लक्षण हो सकते हैं।

ये टेस्ट कराएं : लिवर फंक्शन टेस्ट के अलावा हेपेटाइटिस-सी के लिए भी ब्लड टेस्ट कराएं।

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एनीमिया

आयरन की कमी (एनीमिया) से भी हमेशा सुस्ती बनी रह सकती है। सामान्य तौर पर स्त्रियों को पीरियड्स, प्रेग्नेंसी या ब्रेस्ट फीडिंग के दौरान आयरन की कमी होती है। इसमें त्वचा का रंग पीला पडने लगता है, चिडचिडाहट और सुस्ती होने लगती है, शुगर स्तर भी घटता-बढता है। हालांकि शुगर स्तर डायबिटीज में भी घटता-बढता है। एनीमिया और डायबिटीज दोनों ही समस्याओं में थकान और सुस्ती जैसे लक्षण दिखते हैं।

ये टेस्ट कराएं : हीमोग्राम कराएं, जिसमें हीमोग्लोबिन टेस्ट, ब्लड काउंट, पीटी-आईएनआर, एपीटीटी-पीटीटीके, एबीओ आरएच, सीरम आयरन, आयरन बाइंडिंग कैपेसिटी जैसे टेस्ट शामिल हो सकते हैं।

थायरॉयड

मिडिल एज में खासतौर पर लो-थायरॉयड की समस्या ज्यादा होती है। थायरॉयड ग्लैंड टी 4 और टी 3 जैसे हॉर्मोन बनाती है और मिड एज में यह प्रक्रिया धीमी हो जाती है। चूंकि अन्य प्रक्रियाएं भी धीमी हो जाती हैं, इसलिए इस उम्र में वजन बढने, कब्ज, त्वचा में रूखापन और बाल झडने जैसी समस्याएं होने लगती हैं।

ये टेस्ट कराएं : थायरॉयड प्रोफाइल (टी3, टी4, टीएसएच), थायरॉयड एंटीबॉडी, थायरॉयड स्कैन कराएं। टीएसएच थायरॉयड को बढाने वाला हॉर्मोन है। हाई टीएसएच और लो टी 4 का अर्थ है- क्रॉनिक हाइपोथायरॉयड। अगर टीएसएच हाई है और टी 4 नॉर्मल, तब भी हाइपोथायरॉयड हो सकता है।

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