रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से में दर्द से हैं परेशान, तो राहत पाने के लिए करें ये 4 एक्सरसाइज

रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से में दर्द होने पर आप कुछ खास एक्सरसाइज की मदद से आराम पा सकते हैं लेकिन इस दौरान आपको कुछ सावनधानियां भी बरतनी चाहिए। 

Dipti Kumari
Written by: Dipti KumariPublished at: May 19, 2022Updated at: May 19, 2022
रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से में दर्द से हैं परेशान, तो राहत पाने के लिए करें ये 4 एक्सरसाइज

आपकी रीढ़ की हड्डी अगर मजबूत होती है, तो इसका फायदा आपको लंबी उम्र तक मिलता है। इससे आपको एक उम्र के बाद रीढ़ की हड्डी में दर्द और झुककर चलने की जरूरत नहीं होती है। आप आसानी से भारी काम भी कर लेते हैं। पहले के समय लोग लंबी उम्र के बाद भी काफी फिट और मजबूत रहते थे। लेकिन, आज के समय में स्थिति बिल्कुल बदल गई है। आज हर दूसरा शख्स कमर दर्द और रीढ़ की हड्डी के दर्द से परेशान नजर आता है। ऐसा आमतौर पर स्पाइन और लोअर बैक कमजोर होने के कारण हो सकता है। इसके लिए बेहद जरूरी है कि आप अपनी रीढ़ की हड्डी को मजबूत और अधिक लचीला बनाए रखें ताकि दर्द की समस्या न हो। लोअर बैक या निचले हिस्से में दर्द को कम करने के लिए आप कुछ खास एक्सरसाइज का अभ्यास कर सकते हैं। रीढ़ की हड्डी की मजबूती बढ़ाने के लिए स्ट्रेचिंग के अलावा ये आसान एक्सरसाइज कारगर है। 

रीढ़ की हड्डी के दर्द में करें ये एक्सरसाइज

1. हिप क्रासओवर स्ट्रेच (Hip Crossover Stretch)

इस एक्सरसाइज की मदद से आपकी रीढ़ की हड्डी में धीरे-धीरे खिंचाव आता है और जकड़न कम करने में मदद मिलती है। ये हिप्स एरिया और पीठ के निचले हिस्से को मजबूत बनाता है। साथ ही इससे रीढ़ की हड्डी में लचीलापन भी बढ़ता है। इसे करने के लिए आप फर्श पर लेट जाएं। फिर घुटनों को मोड़ लें और उसके बाद बाएं पैर के घुटने के ऊपर अपने दाहिने पंजे को रखें। बाएं पैर के बीच से हाथ डालकर दाहिने घुटने को ऊपर खींचने का प्रयास करें। 30 सेकेंड तक इसी स्थिति में रहें और हिप्स एरिया में स्ट्रेंच आने तक इसी अवस्था में रहें। इसी तरह दूसरे पैर से भी दोहराएं और प्रत्येक पैर से 3-3 बार करें। 

back-pain

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2. ब्रिज एक्सरसाइज (Bridge Exercise)

ब्रिज एक्सरसाइज पीठ और हैम्स्ट्रिंग मांसपेशियों को मजबूती देती है, जो कि स्पाइन के सपोर्टिव मसल्स होते हैं। रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाने के लिए यह सबसे अच्छी एक्सरसाइज है। लेकिन इस एक्सरसाइज को रीढ़ की हड्डी में चोट लगने पर न करें और हो सके तो कमर में दर्द होने पर भी इसका अभ्यास न करें। इसे करने के लिए आप मैट पर लेट जाएं और पैरों को मोड़कर हिप्स से कुछ दूरी पर कंधे की चौड़ाई पर रखें। हाथों को बगल में रखते हुए हिप्स को ऊपर उठाने की कोशिश करें। हिप्स को ऊपर उठाते समय घुटने, पेट और शोल्डर एक लाइन में रखें। इस स्थिति में शरीर को 5-10 सेकेंड के लिए रखें और फिर शुरुआती पोजिशन में आएं। इसके बाद 10 बार इसे दोहराने की कोशिश करें। शुरुआत में आप इसे 4-5 भी कर सकते हैं। 

3. ट्रेडिशनल स्क्वॉट (traditional squat)

अगर आपने जिम किया होगा तो देखा होगा कि वेटलिफ्टर भारी बार्बेल में प्लेट डालकर स्क्वाट्स करते हैं लेकिन इसे रीढ़ की हड्डी के लिए सुरक्षित एक्सरसाइज नहीं माना जाता है। इसे आपको चोट लग सकती है और यह गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। इसकी बजाय आप ट्रेडिशनल स्क्वॉट कर सकते हैं। यह आपको रीढ़ की हड्डी के दर्द से निजात दिलाता है और पैरों को भी मजबूत बनाता है। ट्रेडिशनल स्क्वॉट से आपकी रीढ़ की हड्डी में भी चोट नहीं आती है। बिना वेट के स्क्वॉट करें और स्क्वॉट पोजिशन में आने पर इसे कुछ देर के लिए होल्ड करके रखें। इससे रीढ़ की हड्डी व लेग्स पर टेंशन क्रिएट होगी और मसल्स मजबूत होंगे।

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4. सुपरमैन एक्सरसाइज (Superman)

आपके शरीर को सुडौल बनाने के लिए आपके शरीर के पिछले हिस्से का मजबूज होना बेहद जरूरी है। मांसपेशियों में मजबूती आपका पर्सनालिटी को अच्छा बनाती है। कमजोर बैक एक्सटेंसर स्पाइनल और पेल्विक सपोर्ट को कम कर सकते हैं, जिससे स्पाइन की मजबूती कम हो सकती है या उसमें दर्द भी हो सकता है। सुपरमैन एक्सरसाइज आपकी रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाता है। सुपरमैन एक्सरसाइज करने के लिए जमीन पर उल्टे लेट जाएं और दोनों हाथों को सिर के ऊपर की तरफ फैलाएं। एक साथ दोनों हाथों और पैरों को इतना उठाएं कि हाथ-पैर और फर्श के बीच कुछ दूरी हो। इस स्थिति में 2-5 सेकेंड तक रहें और फिर नॉर्मल पोजिशन में आ जाए। इस एक्सरसाइज को 10 बार दोहराएं। 

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इन बातों का रखें ध्यान

1. रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाने के लिए एक्सरसाइज करते समय अपने साथ बहुत अधिक जबरदस्ती न करें। जितना हो सके, उतना ही शरीर को स्ट्रेच करें। 

2. हमेशा ढीले-ढाले कपड़े पहनकर एक्सरसाइज करें और खुले वातावरण में व्यायाम करने की कोशिश करें। 

3. शरीर को हाइड्रेट रखें और एक्सरसाइज करते समय सांसों की नियमित गति बनाए रखें। 

4. किसी भी एक्सरसाइज को शुरुआत में ट्रेनर की निगरानी में ही करें। 

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