कई मामलों में दवा से बेहतर है कसरत

स्‍वस्‍थ जीवन जीने के लिए कसरत बेहद फायदेमंद होती है। लेकिन, एक ताजा शोध में यह बात सामने आयी है कि कई रोगों से  लड़ने में यह दवा से भी अधिक कारगर होती है।

एजेंसी
लेटेस्टWritten by: एजेंसीPublished at: Oct 16, 2013
कई मामलों में दवा से बेहतर है कसरत

दवाओं से ज्‍यादा कारगर है कसरतजैसे-जैसे उम्र बढ़ती जाती है लोगों की निर्भरता दवाओं पर बढ़ती जाती है और कसरत उनकी रोजमर्रा की जिंदगी से बाहर हो जाती है। लेकिन, हकीकत यह है कि कई मायनों में कसरत ही सबसे बेहतर दवा होती है। जानकारों की मानें तो कसरत न सिर्फ शरीर के लिए फायदेमंद है, बल्कि यह हमारे शरीर की जरूरत भी है।

लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स और हावर्ड मेडिकल स्कूल के एक शोध में दावा किया गया है कि कसरत शरीर पर दवा से भी ज्यादा सकारात्‍मक असर दिखाती है। इतना ही नहीं दिल की बीमारियों और मधुमेह के लिए भी कसरत दवाओं से ज्‍यादा प्रभावी होती है। दिल का दौरा, स्ट्रोक या मधुमेह की तकलीफ वाले 3,39,000 लोगों पर किए गए शोध में यह बात सामने आयी। ये सभी बीमारियां बढ़ती उम्र से जोड़कर देखी जाती हैं।

ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में छपे इस शोध में यह दावा किया गया है कि लोगों को कसरत के फायदों के बारे में पहले से जानकारी थी, लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है जब दवाओं के असर के साथ इसकी तुलना की गयी है। शोध के लिए टाइप टू डायबीटिज से शिकार लोगों को दो समूहों में बांटा गया। एक को कसरत करने को कहा गया तो दूसरे को डा‍यबिटीज की दवा लेने को कहा गया। शोध के परिणामें में पाया गया कि कसरत करने और दवा लेने वालों के रक्‍त में शर्करा की मात्रा सामान्‍य रूप से कम हुई।

ऐसे ही नतीजे उन लोगों में भी मिले जिन्हें दिल का दौरा पड़ा था। लेकिन दिल के काम बंद कर देने के मामले में डीयूरेक्टिक दवाओं का असर बेहतर देखा गया। ये ऐसी दवाएं होती हैं जिनसे शरीर में पानी ज्यादा बनता है। इस से खून की गति सामान्य हो पाती है। इन दवाओं का असर कसरत से ज्यादा तेजी से होता है।

अपनी रिपोर्ट में शोधकर्ताओं ने लिखा कि कई मामलों में दवा थोड़ी ही मदद कर सकती है। ऐसे मामलों में मरीजों को समझना होगा कि व्यायाम उनकी सेहत पर कितना असर कर सकता है। इस शोध में दवा बनाने वाली कंपनियों को भी यह सुझाव दिया गया है कि कंपनियां जब दवा को टेस्ट करें, तो केवल प्लासीबो से ही नहीं, कसरत से भी उसकी तुलना करें।

दरअसल किसी भी दवा को बनाने के बाद उस पर टेस्ट किया जाता है कि वह कितनी असरदार है। इसके लिए दो ग्रुप बनाए जाते हैं। एक ग्रुप को दवा दी जाती है और दूसरे को चीनी की गोली। लोगों को नहीं बताया जाता कि उन्हें कौन सी गोली दी गयी है। इसके बाद उन पर हो रहे असर पर ध्यान दिया जाता है। यदि दवा सही असर करती है, तभी उसे बाजार में लाया जाता है। किसी को दवा के नाम पर चीनी की गोली दे कर उसके असर को देखना प्लासीबो कहलाता है। रिसर्चरों का कहना है कि जिस तरह प्लासीबो को जांचना अनिवार्य है, ऐसा ही कसरत के साथ भी किया जाना चाहिए।

पर साथ ही यह चेतावनी भी दी गयी है कि मरीज केवल कसरत को ही इलाज ना समझ लें और डॉक्टर की बताई दवा को भी नियमित रूप से लेते रहें। तो हो सकता है कि आईंदा जब आप डॉक्टर से मिलें तो वह दवा की पर्ची पर सुबह शाम दवा के साथ साथ सुबह शाम कसरत भी लिख दें।

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