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45 साल की उम्र के बाद आंखों से जुड़े ये 9 टेस्ट जरूर कराने चाहिए, ताकि सही समय पर चल सके कमजोर नजर का पता

45 साल की उम्र के बाद हर व्यक्ति को आंखों से जुड़े कुछ जरूरी टेस्ट करा लेने चाहिए, आइये जानते हैं इनके बारे में। 

 

Prins Bahadur Singh
Written by: Prins Bahadur SinghUpdated at: Nov 23, 2021 10:53 IST
45 साल की उम्र के बाद आंखों से जुड़े ये 9 टेस्ट जरूर कराने चाहिए, ताकि सही समय पर चल सके कमजोर नजर का पता

आंखें शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक हैं। आंख की सेहत का ध्यान रखना हर व्यक्ति की पहली जिम्मेदारी होनी चाहिए। आज के समय में जब ज्यदातर लोगों का कामकाज डिजिटल तरीके से हो रहे हैं ऐसे में आंखों पर इसका नकारात्माक प्रभाव भी तेजी से पड़ता है। लगातार मोबाइल फोन, लैपटॉप और स्क्रीन पर नजरें टिकाये रहने की वजह से आंखों से जुड़ी कई समस्याएं जैसे नजरों का कमजोर होना आदि सबसे ज्यादा बढ़ रही हैं। आंख में दर्द, नजर का कमजोर होना और लालिमा जैसी समस्याएं ज्यादातर लोगों में स्क्रीन टाइम बढ़ने की वजह से होती हैं। आंख की रोशनी का कमजोर होना भी मोबाइल, लैपटॉप की स्क्रीन पर ज्यादा समय बिताने की वजह से हो रही हैं। हर व्यक्ति को एक उम्र के बाद अपनी आंखों की सेहत का सही ध्यान रखने के लिए नियमित रूप से कुछ चेकअप जरूर कराने चाहिए। 45 साल की उम्र के बाद हर व्यक्ति को कुछ ऐसे ही जरूरी टेस्ट करवाना जरूरी माना जाता है। आंखों की जांच या चेकअप नेत्र रोग विशेषज्ञ की देखरेख में ऑप्टोमेट्रिस्ट या ऑप्टिशियन द्वारा की जाती है। आइये जानते हैं 45 साल की उम्र के बाद आंखों के कौन से टेस्ट से जरूर गुजरना चाहिए।

45 साल की उम्र के बाद जरूर कराने चाहिए आंखों से जुड़े ये टेस्ट (Routine Eye Examinations After 45 Years Of Age)

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असंतुलित खानपान, जीवनशैली और डिजिटल डिवाइस पर निर्भरता या स्क्रीन टाइम अधिक होने के कारण आज के समय में कम उम्र में ही लोगो को आंखों से जुडी कई समस्याएं हो रही हैं। आंखों से जुडी कुछ समस्याएं जैसे रोशनी कम होना, आंख में दर्द बना रहना और लालिमा आदि 45 साल की उम्र के बाद लोगों में कॉमन हो चुकी हैं। ऐसे में इन समस्याओं से आंखों का बचाव करने के लिए आपको कुछ टेस्ट जरूर कराने चाहिए। सीतापुर आंख अस्पताल से जुड़े डॉ अविनाश सिंह के मुताबिक 45 साल की उम्र के बाद विजन स्क्रीनिंग जैसे कई टेस्ट हैं जो हर किसी को जरूर करा लेने चाहिए। इन टेस्ट या जांच के माध्यम से आपको अपनी आंखों की सेहत के बारे में जरूरी जानकारी मिलती है जिसके बाद आप बचाव के लिए जरूरी कदम उठा सकते हैं। हाल ही में प्रकाशित एक शोध के मुताबिक आंखों से जुडी बीमारियां या समस्याएं 45 साल की उम्र के बाद लोगों में तेजी से बढ़ सकती हैं। इसके पीछे खानपान, जीवनशैली से जुड़े कारकों के अलावा कई स्वास्थ्य स्थितियां भी जिम्मेदार हो सकती हैं। इन समस्याओं से बचाव के लिए आपको 45 साल की उम्र के बाद इन जांचों से जरूर गुजरना चाहिए।

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1. दृष्टि या नजर की जांच (Eye Vision Test)

ऐसे लोग जिनकी उम्र 45 साल से अधिक है उन्हें नजर की जांच जरूर करा लेनी चाहिए। इस उम्र के बाद खानपान में बदलाव और खराब जीवनशैली या कंप्यूटर, लैपटॉप पर घंटों तक काम करने के कारण कई समस्याएं हो सकती हैं। अदूरदर्शिता (मायोपिया), लंबी दृष्टि (हाइपरोपिया) और प्रेशबायोपिया जैसी समस्याओं का पता भी नजर की जांच के बाद ही हो पाता है। इसके अलावा इस जांच में आपका डॉक्टर आपकी आंखों की निकट और दूर की दृष्टि की भी जांच करते हैं। निकट और दूर की दृष्टि कमजोर होने पर आपको चश्मा पहनना पड़ सकता है या कुछ दवाओं के सेवन से यह समस्या ठीक हो सकती है। इन समस्याओं के बने रहने से आपको नजर से जुडी कई गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।

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2. आंखों की मांसपेशियों की जांच (Eye Muscles Coordination Test)

आंखों की मांसपेशियों की जांच भी 45 साल की उम्र के बाद जरूरी मानी जाती है। इस जांच से डॉक्टर आपकी आंखों की मांसपेशियों की स्थिति की जांच करते हैं। आंख की मांसपेशियों में समस्याएं होने आपकी नजर कमजोर हो सकती है या इससे जुड़ी कई अन्य गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।

3. पेरिफेरल विजन टेस्ट (Side Vision Or Peripheral Vision Test)

पेरिफेरल विजन टेस्ट को पार्श्व (परिधीय) दृष्टि जांच भी कहते हैं। इस जांच में डॉक्टर आपकी आंखों की रोशनी या नजर की ही जांच करते हैं जिसमें आपके साइड विजन को टेस्ट किया जाता है। इस जांच के बाद अगर डॉक्टर को आपकी आंखों में इससे जुडी कोई समस्या दिखती है तो इसके निदान के लिए दवाओं के सेवन की सलाह दी जाती है।

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4. कलर विजन टेस्ट (Color Vision Test)

45 साल की उम्र के बाद हर व्यक्ति को कलर विजन की जांच जरूर करा लेनी चाहिए। इस जांच में आपको रंगों की पहचान कराई जाती है जिसकी सहायता से डॉक्टर यह समझने की कोशिश करते हैं कि आपको रंगों को देखने में कोई समस्या तो नहीं है। कलर विजन की समस्या से बचाव के लिए आपको डॉक्टर से परामर्श जरूर करना चाहिए।

5. लाइट के प्रति पुतली की प्रतिक्रिया की जांच (Pupil Response To Light Test)

अक्सर एक उम्र के बाद आंखों में समस्याएं होने या असंतुलित खानपान और जीवनशैली की वजह से आपकी आंखें लाइट के प्रति संवेदनशील हो सकती हैं। इस समस्या के बारे में जानकारी के लिए डॉक्टर की देखरेख में ये जांच बहुत जरूरी है।

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6. आंख के आंतरिक और बाहरी भाग की जांच (The Interior And Back Of The Eye)

रेटिना और ऑप्टिक तंत्रिका और आंख के बाहरी और आंतरिक भाग की जांच 45 साल की उम्र के बाद करानी बहुत जरूरी है। इन जांच के बाद आपको यह जानकारी मिल जाती है कि आपकी आंखों की स्थिति कैसी है। इन जांच के माध्यम से आपकी आंखों के अंदर शुरू हो रही समस्याओं के बारे में भी जानकारी मिलती है।

45 साल के बाद कैसे रखें आंखों की सेहत का ध्यान (Eye Care Tips After 45 Years Of Age)

45 साल की उम्र के बाद आपको आंखों की एक्स्ट्रा केयर करनी चाहिए। इस उम्र तक खानपान, जीवनशैली और अन्य कारकों की वजह से आंखों की समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। आज के समय में मोबाइल स्क्रीन, लैपटॉप और कंप्यूटर पर ज्यादा समय बिताने की वजह से भी आंखों से जुडी कई गंभीर समस्याएं हो रही है। इन सब समस्याओं से बचाव के लिए आपको इन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

  • आंखों के लिए फायदेमंद भोजन का सेवन करें। खाने में ओमेगा 3 फैटी एसिड को जरूर शामिल करें।
  • समय-समय पर आंखों के लिए जरूरी टेस्ट कराते रहने चाहिए।
  • स्क्रीन टाइम और डिजिटल डिवाइस की वजह से होने वाली समस्याओं से बचाव के लिए इसे नियंत्रित करें।
  • अगर आप लेंस पहनते हैं तो रात में सोने से पहले लेंस जरूर उतारें।
  • धूप में जाते समय चश्मा जरूर लगाएं।
  • विटामिन ए से युक्त खाद्य पदार्थों को अपनी डाइट में शामिल करें।

ऊपर बताई गयी बातों का ध्यान रखकर आप अपनी आंखों को गंभीर समस्याओं से बचा सकते हैं। 45 साल की उम्र के बाद आंखों की उचित देखभाल और बीमारियों या समस्याओं से बचाने के लिए आपको अपने चिकित्सक की सलाह के बाद ऊपर बताये गए टेस्ट जरूर करा लेने चाहिए। इन टेस्ट की रिपोर्ट्स के आधार पर आपके डॉक्टर यह आसानी से तय कर सकते हैं कि आपको किस प्रकार के आहार या उपचार की जरूरत है।

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