रातभर जागने वाले लोगों में ज्यादा होता है इन 10 बीमारियों का खतरा, एक्सपर्ट से जानें बचाव के टिप्स

अगर आपको भी रात भर जागने की आदत है आपको रात भर जागने के नुकसानों के बारे में जानना चाहिए। ताकि कहीं आप भी इन बीमारियों के शिकार ना हो जाए। 

Pallavi Kumari
Written by: Pallavi KumariUpdated at: Nov 21, 2021 13:30 IST
रातभर जागने वाले लोगों में ज्यादा होता है इन 10 बीमारियों का खतरा, एक्सपर्ट से जानें बचाव के टिप्स

नींद हमारे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों से जुड़ा हुआ है। नींद सिर्फ शरीर की थकान को ही कम नहीं करती बल्कि शरीर के कई अंगों को हेल्दी तरीके से काम करने में मदद भी करती है। जैसे कि एक अच्छी नींद दिमाग के साथ शरीर के संवाद को बेहतर बनाती है। मस्तिष्क को तेज करती है और डाइजेशन को बेहतर बनाती है। ये इसलिए क्योंकि नींद सोचने और सीखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। नींद की कमी कई संज्ञानात्मक प्रक्रियाओं को नुकसान पहुंचाती है। सबसे पहले, यह ध्यान, सतर्कता, एकाग्रता, तर्क और समस्याओं के समाधान करने की क्षमता को कम करती है। फिर आपके दिल, पेट, आंत और किडनी के फंक्शन को प्रभावित करने लगती है। इस तरह ये शरीर को पूरी तरह से प्रभावित करती है। पर जो लोग लगातार हर रात जागते हैं उन्हें कुछ बीमारियों का खतरा (Side effects of staying up all night in hindi) ज्यादा होता है। ये हम नहीं बल्कि नारायण हॉस्पिटल लखनऊ में कार्यरत जनरल फिजिशियन (एमडी, मेडिसिन) डॉ. अभिषेक गुप्ता का कहना है। डॉ. अभिषेक गुप्ता बताते हैं कि भले ही आप काम या ड्यूटी की वजह से रात में जग रहे हों या फिर आपको रात में नींद ना आने की समस्या हो, किसी भी स्थिति में रात भर जागना आपके स्वास्थ्य को नुकसान ही पहुंचाती हैं। 

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रातभर जागने का शरीर पर कैसा होता है असर?

डॉ. अभिषेक गुप्ता बताते हैं कि रातभर जागने से सोने के शेड्यूल और सर्कैडियन रिदम पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। एक रात बिना सोए रहने के बाद, आप दिन में जागते के दौरान मानसिक और शारीरिक, दोनों तरीके के परेशान रहते हैं। तो, अगर आप इसे दिन में ठीक करने के लिए ज्यादा सोते हैं , तो इससे अगली रात तक सोना मुश्किल हो सकता है। इस तरह ये शरीर के पूरे सिस्टम को बिगाड़ कर रख देती है। इसके अलावा आप कुछ बीमारियों के शिकार भी हो सकते हैं। जैसे कि  

रातभर जागने से हो सकती हैं आपको ये 10 बीमारियां

1. हाई ब्लड प्रेशर

रातभर जागने से सबसे पहले आपका ब्लड प्रेशर प्रभावित होता है। आप जितना कम सोएंगे, आपका रक्तचाप उतना ही अधिक हो सकता है। जो लोग छह घंटे या उससे कम सोते हैं उनका ब्लड प्रेशर तेजी से बढ़ता है। अगर आपको पहले से ही  हाई ब्लड प्रेशर है, तो अच्छी नींद न लेने से आपका ब्लड प्रेशर और खराब हो सकता है। ऐसा माना जाता है कि नींद आपके शरीर को तनाव और चयापचय को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक हार्मोन को नियंत्रित करने में मदद करती है। समय के साथ, नींद की कमी से हार्मोन में बदलाव हो सकता है, जिससे उच्च रक्तचाप और हृदय रोग के अन्य जोखिम कारक हो सकते हैं। भरपूर नींद के साथ नींद की कमी को पूरा करने की कोशिश न करें। बहुत अधिक नींद, कम नींद की तुलना में कुछ हद तक, ब्लड शुगर और वजन बढ़ने का कारण बन सकती है, जो आपके हृदय स्वास्थ्य के लिए खराब हैं।ऐसे में अपने स्लीप साइकिल को ठीक करें। 

2. दिल की धड़कनों से जुड़ी बीमारियां

लंबे समय तक नींद की कमी दिल की गति को बढ़ा देती है। इससे रक्तचाप में वृद्धि और दिल में सूजन से जुड़ी परेशानियां होती है जो आपके दिल पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती है। नॉन-आरईएम नींद के दौरान, आपकी हृदय गति, श्वास और रक्तचाप सभी उस स्तर से नीचे गिर जाते हैं जो आपके जागने के दौरान होता है। REM नींद की वह अवस्था है जब आप अपने अधिकांश सपने देखते हैं। यह आपके कुल सोने के समय का केवल 20% है। इस चरण के दौरान आपका रक्तचाप और हृदय गति ऊपर और नीचे जा सकती है। फिर पूरी रात जागना और नींद की कमी, हृदय गति को बढ़ाने का काम करती है। शोध में यह भी पाया गया है कि नींद न आने की समस्या वाले लोगों को अनियमित दिल की धड़कन की शिकायत होने की संभावना अधिक होती है। इन कारणों से, नींद की कमी दिल की धड़कन से जुड़ी हो सकती है।

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3. डायबिटीज

कम नींद ब्लड शुगर बढ़ाने का काम करती है। यहां तक कि एक रात की नींद की कमी से इंसुलिन प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है, जो बदले में ब्लड शुगर के स्तर को बढ़ा सकता है। नतीजतन, नींद की कमी डायबिटीज का कारण बनती है।नींद की कमी के कारण आपके खाने के बाद आपके शरीर में कम इंसुलिन निकलता है जबकि आपका शरीर अधिक तनाव वाले हार्मोन को स्रावित करता है, जो आपको जागते रहने में मदद करता है, लेकिन इंसुलिन अपना काम प्रभावी ढंग से नहीं कर सकता है। जिससे बहुत अधिक ग्लूकोज रक्तप्रवाह में रहता है, जिससे आपको टाइप 2 मधुमेह होने का खतरा बढ़ जाता है।

4. हार्ट अटैक का खतरा

नींद की कमी से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। एक अध्ययन में, प्रति रात छह घंटे से कम सोने वाले लोगों में दिल का दौरा पड़ने की संभावना 20% अधिक थी। जबकि NREM स्लीप स्टेज दिल को धीमा और ठीक होने में मदद करता है। REM स्लीप में बढ़ा हुआ तनाव और गतिविधि शामिल होती है। अपर्याप्त नींद इन चरणों के संतुलन को बिगाड़ सकती है, जिससे दिल का दौरा पड़ने का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही नींद ना आने के कारण हमेशा ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर बढ़ा रहता है जिससे हार्ट अटैक का खतरा और बढ़ जाता है।

5. स्ट्रोक का खतरा

स्ट्रोक तब होता है जब मस्तिष्क में रक्त का प्रवाह बंद हो जाता है, जिससे मस्तिष्क की कोशिकाएं ऑक्सीजन की कमी से मर जाती हैं।  नींद की कमी को स्ट्रोक होने की अधिक संभावना के साथ जोड़ा गया है। नींद की कमी से ब्लड प्रेशर बढ़ता है, और हाई ब्लड प्रेशर स्ट्रोक के लिए प्रमुख जोखिम कारक माना जाता है। इसके अलावा, ये धमनियों में प्लाक बिल्डअप करके स्ट्रोक होने के खतरे को और बढ़ाती है। 

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6. वजन बढ़ना और मोटापा

नींद की कमी का संबंध मोटापे से भी है। जो लोग प्रति रात सात घंटे से कम सोते हैं उनमें बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) अधिक होने या मोटे होने की संभावना अधिक होती है। नींद भूख को नियंत्रित करने वाले हार्मोन को अनियंत्रित करने करती है और क्रेविंग को बढ़ाती है। साथ ही हाई कैलोरी वाले खाद्य पदार्थों की इच्छा को बढ़ावा देती है। ऐसे में आप तनाव में आकर खाते हैं जिससे तेजी से वजन बढ़ता है और आप मोटापे के शिकार हो जाते हैं।

7. किडनी से जुड़ी बीमारियां

पुराने गुर्दे की बीमारी वाले लोगों के लिए, खराब नींद बीमारी को और बढ़ाने का काम करती है। साथ ही कम नींद, क्रोनिक किडनी रोग को बढ़ावा देती है। इसके अलावा ये पाचन क्रिया को भी अंसुलित करता है जिससे किडनी के फंक्शन भी प्रभावित हो जाता है। इस वजह से शरीर वेस्ट को सही से बाहन नहीं निकाल पाता है, जिससे कब्ज और अपच जैसी कई समस्याएं शरीर को होती हैं। 

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8. नर्व से जुड़ी बीमारियां 

नींद की कमी आपके दिमाग को थका देती है, इसलिए शरीर रोज के कामों को भी सही से नहीं कर पाता है। साथ ही आपको ध्यान केंद्रित करने या नई चीजें सीखने में और भी मुश्किल हो सकती है। आपके शरीर द्वारा भेजे जाने वाले संकेतों में भी देरी हो सकती है, आपके समन्वय में कमी आ सकती है और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है।

9. डिप्रेशन 

नींद की बीमारी होने से अवसाद नहीं होता है, लेकिन नींद की कमी इसमें एक बड़ी भूमिका निभाती है। किसी अन्य चिकित्सीय स्थिति की तरह नींद संबंधी विकार या व्यक्तिगत समस्याओं के कारण नींद की कमी अवसाद को बदतर बना सकती है। साथ ही लंबे समय तक ना सो पाने के कारण भी व्यक्ति डल और डिप्रेशड महसूस करने लगता है। 

10. मूड स्विंग्स और एंग्जायटी 

आप शायद पहले से जानते हैं कि नींद मूड को प्रभावित करती है। रात की नींद अगर आप अच्छी ना लें तो, आप अधिक चिड़चिड़े और तनाव के प्रति अति संवेदनशील हो सकते हैं। एक बार जब आप अच्छी नींद लेते हैं, तो आपका मूड अच्छा हो जाता है। साथ ही नींद की कमी आपको तनावग्रस्त, क्रोधित, उदास और मानसिक रूप से थका हुआ महसूस किया। जिसकी वजह से आपको एंग्जायटी महसूस हो सकती है। 

बचाव के टिप्स 

-कम से कम 7 घंटे की नींद लेने की कोशिश करें।

-रोज एक्सरसाइज और ध्यान करें जो कि नींद को बेहतर बनाती है। 

-नींद को बढ़ावा देने वाले फूड्स लें।

-तनाव ना लें और खुश रहें।

इन सबके अलावा ध्यान रखें कि स्ट्रेस ना लें और सुबह उठने और रात में सोने का समय तय करें। शरीर और मन को बहुत ज्यादा परेशान ना रखें और दिमागी तौर पर शांत रहें और खुद को खुश रखने की कोशिश करें।

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