Contact Lens Vs Eye Glasses: चश्‍मा या कॉटेक्‍ट लेंस में से आपकी आंखों के लिए कौन है ज्‍यादा बेहतर, जानिए

अगर आप चश्‍मा या कॉटेक्‍ट लेंस लगवाने को लेकर कंफ्यूज हैं तो यहां हम आपको इसके फायदे और नुकसान के बारे में बता रहे हैं।

Atul Modi
Written by: Atul ModiPublished at: Jul 06, 2020Updated at: Jul 06, 2020
Contact Lens Vs Eye Glasses: चश्‍मा या कॉटेक्‍ट लेंस में से आपकी आंखों के लिए कौन है ज्‍यादा बेहतर, जानिए

आमतौर पर, आंखों की सुरक्षा के लिए भी चश्‍मे की आवश्‍यकता पड़ती है। दृष्टि कमजोर होने व उम्र बढ़ने के साथ भी आंखों को चश्‍मे की जरूरत पड़ती है। कई बार, चश्‍मे की आवश्‍यकता आंखों के विभिन्‍न रोगों में भी पड़ती है। हालांकि, कुछ लोग चश्‍मे से बचने के लिए कॉटेक्‍ट लेंस की मदद लेते हैं। हालांकि, चश्‍मे या लेंस की आवश्‍यकता अधिक उम्र के लोगों के साथ बच्‍चों को भी पड़ सकती है। मगर अधिकांश लोगों को चश्‍मे और लेंस में फर्क, चश्‍मे और लेंस के फायदे व नुकसान के बारे में पता नहीं होता है। आज हम आपको इस लेख के माध्‍यम से बताएंगे कि आपके लिए क्‍या बेहतर है चश्‍मा या लेंस?   

दिल्‍ली के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. चिराग गुप्ता कहते हैं कि चाहे आप कॉटेक्‍ट लेंस लगाएं या फिर चश्‍मा पहनें, यह पूरी तरह से आपकी अपनी पसंद पर निर्भर करता है। इसका फैसला करते समय आप अपने रहन-सहन और बजट को देखते हैं या फिर आप वो काम करते हैं, जिसमें खुद को कंफर्टेबल महसूस करते हैं। कुछ लोग अपने 'लुक' को वरीयता देते हैं।

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डॉ. चिराग गुप्ता बताते हैं कि कॉन्‍टेक्‍ट लेंस या चश्‍मे में से किसी एक को चुनने से पहले आपको यह समझना जरूरी है कि, दोनों ही एक दूसरे बेहतर नहीं है। आंख से दिखने, प्रयोग में आसानी और आंखों के स्‍वास्‍थ्‍य जैसे पहलूओं के मद्देनजर दोनों के अपने फायदे हैं और अपने नुकसान हैं।

चश्‍मे के फायदे और नुकसान - Pros and Cons of Eyeglasses In Hindi

चश्‍मा लगाने के फायदे 

कॉटेक्‍ट लेंस लगाने के मुकाबले चश्‍मा लगाने के कुछ फायदे हैं। इनके रखरखाव और सफाई में दिक्‍कतें कम हैं। इनको पहनने के लिए आपको अपनी आंखों को हाथ नहीं लगाना पड़ता, जिससे संक्रमण का खतरा कम रहता है। कॉन्‍टेक्‍ट लेंस खरीदने के मुकाबले चश्‍मा सस्‍ता भी होता है और इसे जल्‍दी-जल्‍दी बदलना भी नहीं पड़ता।

इसके अलावा चश्‍मा कई ऐसे काम करता है जो कॉन्‍टेक्‍ट लेंस नहीं कर पाते। जैसे, यह आपकी आसानी के मुताबिक आंखों के भीतर जाने वाली रोशनी पर नियंत्रण कर सकता है। विशेषकर फोटोक्रोमेटिक लेंस रात में और घर के अंदर सामान्‍य रहते हैं जबकि धूप में जाने पर आंख की सुविधा के अनुसार गहरे हो जाते हैं। यद्यपि कुछ कॉन्‍टेक्‍ट लेंस भी आंखों में अल्‍ट्रा वायलेट किरणें जाने से रोकते हैं लेकिन फोटोक्रोमेंटिक ग्‍लास शत-प्रतिशत परिणाम देते हैं। इतना ही नहीं वे न केवल आंखों के भीतर यूवी किरणें नहीं जाने देते बल्कि आंख के बाहरी हिस्‍से और पलकों की भी सुरक्षा प्रदान करते हैं। चश्‍मा आपके व्‍यक्तित्‍व को और विस्‍तार दे सकता है और फैशन स्‍टेटमेंट भी बन सकता है।

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चश्‍मा पहनने के कुछ अन्‍य फायदे

  • चश्‍मा पहनने पर आप अपनी आंखों को बार-बार नहीं छूते हैं, जिससे आपकी आंखों में बार-बार खुजली, जलन या फिर कोई संक्रमण नहीं होता।
  • अगर आपकी आंखें ड्राई हैं या संवेदनशील हैं तो लेंस समस्‍या बढ़ा देते हैं, चश्‍मे से कुछ नहीं होता।
  • सामान्‍य तौर पर देखा जाए तो कॉन्‍टेक्‍ट लेंस चश्‍मे से महंगे पड़ते हैं। अगर चश्‍मा टूटे नहीं तो आपको इसे बदलने की जरूरत नहीं है। और अगर आपकी आंखों का नंबर बदलता है तो आप इनके फ्रेम को फिर से प्रयोग कर सकते हैं और लेंस बदल सकते हैं।
  • फ्रेम्‍स फैशनेबल हो सकते हैं और आपकी सुंदरता ओर स्‍टाइल बढ़ा सकते हैं। चश्‍मे से आप बोल्‍ड स्‍टेटमेंट प्राप्‍त कर सकते हैं।
  • चश्‍मे से आंखों को धूल, हवा और गंदगी से बचाया जा सकता है।

चश्‍मा पहनने के नुकसान

  • चश्‍मा आपकी आंखों पर 12 एमएम (लगभग आधा इंच) बैठता है जिससे पेरीफेरल विजन प्रभावित हो सकता है। कई लोग जब चश्‍मा पहली बार पहनते हैं या उनकी आंखों का नंबर बदलता है तो सही फोकस कर पाने और धुंधलेपन की शिकायत करते हैं।
  • कुछ लोग चश्‍मे को पसंद नहीं करते। उनको लगता है कि इससे उनकी सुंदरता खराब हो जाती है।
  • अगर आपकी आंखों का नंबर ज्‍यादा है तो आपके चश्‍मे का लेंस मोटा होगा और आपकी आंखें मोटी या छोटी लग सकती हैं।
  • सर्दी में चश्‍मे के लेंस पर धुंआ जम जाता है जिससे देखने में परेशानी हो सकती है।
  • कुछ फ्रेम नाक पर या कान के नीचे लगातार दबाव बनाते हैं जिससे आपको सरदर्द या अन्‍य परेशानी हो सकती है।

कॉन्‍टेक्‍ट लेंस के फायदे और नुकसान - Pros And Cons Of Contact Lenses In Hindi

कॉन्‍टेक्‍ट लेंस के फायदे 

कॉन्‍टेक्‍ट लेंसेज के भी काफी फायदे हैं। यह सीधे आंखों में फिट हो जाते हैं इसलिए विजन का, विशेष रूप से पेरिफेरल विजन को कोई नुकसान नहीं होता। अगर आपने कॉन्‍टेक्‍ट लेंस लगाए हैं तो आप निश्चिंत होकर खेलकूद और आउटडोर गतिविधियों में हिस्‍सा ले सकते हैं। चश्‍मे के गिरने और टूट जाने के डर से मुक्‍त रहेंगे। इतना ही नहीं रंगीन कॉन्‍टेक्‍ट लेंस से आप अपनी आंखों का रंग भी बदल सकते हैं।

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कॉन्‍टेक्‍ट लेंस के कुछ अन्‍य फायदे

  • कॉन्‍टेक्‍ट लेंस आपकी आंखों की शेप में पूरे आते हैं जिससे आपको अच्‍छा दिखता है। आपके विजन में कोई बाधा नहीं आती। हाई मायोपिया, हाइपरमेट्रोपिया और एस्टिग्‍मेटिज्‍म के रोगियों के लिए यह सही साबित होते हैं।
  • खेल खेलते और व्‍यायाम करते समय कॉन्‍टेक्‍ट लेंस कोई परेशानीपैदा नहीं करते।
  • कॉन्‍टेक्‍ट लेंस लगाने से इस बात पर भी कोई फर्क नहीं पड़ताकि आप क्‍या ड्रेस पहन रहे हैं।
  • कॉन्‍टेक्‍ट लेंसेज पर मौसम का भी प्रभाव नहीं पड़ता और चश्‍मेंकी तरह इन पर धुंआ नहीं जमता।

अगर आप देखना चाहें कि आपकी आंखों का बदला हुआ रंग कैसा दिखता है तो आप रंगीन कॉन्‍टेक्‍ट लेंस लगा सकते हैं। यहां तक कि हैलोवीन और फेंसी ड्रेसजैसे कॉस्‍ट्यूम के अनुरूप आप स्‍पेशल इफेक्‍ट वाले कॉन्‍टेक्‍ट लेंस खरीद सकते हैं। कुछ कॉन्‍टेक्‍ट लेंस आपके सो जाने पर आपके कॉर्निया को रिशेपकर सकते हैं। ओवरनाइट ओर्थोकेरेटोलॉजी (ओर्थो-के) मायोपिया को अस्‍थाई रूप से ठीक कर देती है और आप अगले दिन चश्‍मे या कॉन्‍टेक्‍ट लेंस के बिना भी साफ देख सकते हैं।

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कॉन्‍टेक्‍ट लेंस के नुकसान

  • कुछ लोग अपनी आंखों में कॉन्‍टेक्‍ट लेंस लगाने पर परेशानी महसूस करते हैं (लेकिन अधिकांश मामलों में तकनीक और आदत से यह ठीक हो जाता है)।  
  • कॉन्‍टेक्‍ट लेंस लगाने से आंखों में ऑक्‍सीजन कम जाती है जिससे ड्राई आंखों की परेशानी बढ़ जाती है।
  • अगर आप कॉन्‍टेकट लेंस पहनकर कंप्‍यूटर पर काम करते हैं तो इसके कारण कंप्‍यूटर विजन सिंड्रोम के लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
  • कॉन्‍टेक्‍ट लेंसेज का उचित रख रखाव जरूरी है। हर दिन इनकी सफाई होनी चाहिए ताकि आंखों में कोई गंभीर संक्रमण न हो। अगर आप इनका समुचित रख रखाव नहीं कर सकते हैं तो आपको डिस्‍पोजेबल लेंस लेने चाहिए।
  • अगर आप रोज पहनने वाले कॉन्‍टेक्‍ट लेंस गलती से लगा कर सो गए तो उठने पर आपकी आंखें ड्राई, लाल हो सकती हैं और इनमें जलन भी हो सकती है। अगर आपको लगता हे कि कॉन्‍टेक्‍ट लेंस लगाए हुए आप बार-बार सो जाते हैं तो एक्‍सटेंडेड वियर कॉन्‍टेक्‍ट लेंस ले लें। कुछ एक्‍सटेंडेड वियर कॉन्‍टेकट लेंसेज को 30 दिनों तक लगातार पहना जा सकता है।

कॉन्‍टेक्‍ट लेंस, चश्‍मा... या दोनों?

डॉ. चिराग गुप्‍ता बताते हैं कि यह एडवांस तकनीक का ही कमाल है कि अधिकतर लोग कॉन्‍टेक्‍ट लेंस सफलता से पहन रहे हैं, चाहे वे चश्‍मा भी पहनते हों। इसलिए आप दोनों में से क्‍या पहनें और कब, कौन सी चीज पहनें, यह आपकी निजी पसंद होगी। ध्‍यान रखें कि अगर आप हमेशा कॉन्‍टेक्‍ट लेंस ही पहनते हैं तो भी आपके पास एक अप-टू-डेट चश्‍मा जरूर होना चाहिए ताकि जब कभी आंखों में कोई परेशानी हो या आप अपनी आंखों को ब्रेक देना चाहें तो इसका इस्‍तेमाल कर सकें। 

नोट: यह लेख दिल्ली स्थित शार्प साईट ग्रुप ऑफ़ आई हॉस्पिटल्स में रिफ्रैक्टिव सर्जरी जैसे लेसिक, मोतियाबिंद आदि के वरिष्ठ नेत्र चिकित्सक डॉक्‍टर चिराग गुप्‍ता से हुई बातचीत पर आधारित है।

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