इमोशनल ईटिंग हो सकती है मोटापे का कारण, ऐसे करें बचाव

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Aug 30, 2018
Quick Bites

  • पेट भरा होने पर भी स्वाद के लालच में जरूरत से ज्यादा खाना इमोशनल ईटिंग होता है।
  • इमोशनल ईटिंग में आपका पेट तो भर जाता है मगर आपको तृप्ति नहीं मिलती है।
  • इन टिप्स की मदद से आप इमोशनल ईटिंग से बच सकते हैं।

इमोशनल ईटिंग यानी भूख के बजाय भावना के वशीभूत होकर खाना खाना। भूख लगने पर खाना सभी खाते हैं और ये सामान्य बात है। मगर कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो पेट भरा होने के बावजूद खाने की कोई चीज देखते ही उस पर झपट पड़ते हैं। यही इमोशनल ईटिंग है। कई लोग तनाव, चिंता और लालच के कारण भी इमोशनल ईटिंग का शिकार हो जाते हैं। खाना हमारे शरीर के लिए जरूरी है मगर जरूरत से ज्यादा खाना शरीर के लिए हानिकारक भी है। इमोशनल ईटिंग की आदत से आपको न सिर्फ मोटापे की समस्या हो सकती है बल्कि कई तरह के रोगों का खतरा भी होता है।

लोग क्यों होते हैं इमोशनल ईटिंग का शिकार

इमोशनल ईटिंग का मतलब है भावनात्मक भूख, यानी पेट भरा होने पर भी स्वाद के लालच में जरूरत से अतिरिक्त खाना खा लेना। इमोशनल ईटिंग के कई कारण हो सकते हैं। आमतौर पर लोग खुशी के मौके पर इमोशनल ईटिंग ज्यादा करते हैं। शादी, पार्टी, फंक्शन या अन्य जश्न के मौके पर जब आप कई लोगों के साथ इकट्ठा होते हैं और खाने के लिए कुछ खास चीजें होती हैं, तो अक्सर आप शरीर की जरूरत से ज्यादा खा लेते हैं। कई लोगों को अकेलेपन और ऊब के कारण भी खाने की आदत हो जाती है। इसके अलावा कुछ लोग दुख और परेशानी में भी खाने-पीने की तरफ भागते हैं। कुछ लोग ऐसे भी हैं जो थकान होने पर चाय, कॉफी, स्नैक्स आदि की आदत डाल लेते हैं, जबकि उनके शरीर को अतिरिक्त आहार की जरूरत उस समय नहीं होती है।

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क्यों खतरनाक है इमोशनल ईटिंग

इमोशनल ईटिंग इसलिए खतरनाक है क्योंकि इसमें आप खाने का सुख लेने लगते हैं। इससे आपका पेट तो भर जाता है मगर आपको तृप्ति नहीं मिलती है। एक-दो बार आपने किसी भावना के कारण इमोशनल ईटिंग कर ली, तो आपका दिमाग अक्सर आपको मानसिक संवेदना भेजकर खाने के लिए उकसाने लगता है। इमोशनल ईटिंग की खास बात ये है कि ज्यादा खाने के बाद आपको पछतावा भी होता है और अपने ऊपर गुस्सा भी आता है मगर आप अगली बार भी खाने से खुद को नहीं रोक पाते हैं।

हो सकते हैं मोटापे का शिकार

इमोशनल ईटिंग आपको कई तरह के रोगों का शिकार बना सकती है। आमतौर पर इमोशनल ईटिंग वाले लोग मोटापे का शिकार हो जाते हैं। जरूरत से ज्यादा खाने से शरीर खाने के सभी पोषक तत्वों का इस्तेमाल नहीं कर पाता है, जिससे कई तरह की गंभीर बीमारियां भी हो सकती हैं। मोटापा खुद में सैकड़ों बीमारियों की वजह बनता है इसलिए इमोशनल ईटिंग को रोकना बहुत जरूरी है। अपनी भावनाओं पर काबू पाकर और इमोशनल ईटिंग के कारणों को पहचानकर आप इससे आसानी से बच सकते हैं।

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इमोशनल ईटिंग से बचाव कैसे करें

  • सबसे पहले उन चीजों को पहचानें, जो आपको ईमोशनल ईटिंग के लिए उकसाती हैं। अक्सर लोग निगेटिव फील होने पर या खुशी के मौके पर इमोशनल ईटिंग करते हैं।
  • इमोशनल ईटिंग से बचने के लिए एक डायरी बनाएं, जिसमें आपने किस समय क्या खाया, नोट करें। इसके बाद यह भी लिखें कि खाने के बाद आपको कैसा महसूस हो रहा है। थोड़े दिन में आप पाएंगे कि आपके अंदर इमोशनल ईटिंग से निपटने की ताकत आ गई है।
  • यदि आप अवसादग्रस्त अथवा अकेले हैं, तो भोजन की बजाय अपने किसी दोस्त को याद करें। किसी ऐसे दोस्त को फोन करें जिससे बात करके आपको सुखद अहसास होता है। अपने पालतू जानवर के साथ खेलें।
  • यदि आप चिंतित हैं, तो अपनी नकारात्मक ऊर्जा को नाच या गाकर दूर करें। या फिर थोड़ी देर कहीं टहलने निकल जाएं।
  • व्यायाम और शारीरिक गतिविध‍ियों के लिए समय निकालें।  इससे आपको काफी फायदा होगा। इससे तनाव में भी कमी आती है। अपने लिए रोजाना 30 मिनट निकालें। इससे आप खुद को रिचार्ज महसूस करेंगे। दोस्तों और रिश्तेदारों से मिलें। थोड़े सामाजिक हो जाएं।
  • यदि खाने के बजाय चाय पिएं या नहायें और आराम करें।
  • यदि आप बोर हो रहे हैं, तो किताब पढ़ें या अपनी पसंदीदा फिल्म और धारावाहिक देखें।

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