शरीर के लिए क्‍यों जरूरी है विटामिन डी, जानें ये 5 बड़ी वजह

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Aug 29, 2018
Quick Bites

  • विटमिन डी की बात की जाए तो यह एक तरह का स्टेरॉयड है
  • विटमिन डी का कैल्शियम के साथ बहुत करीबी रिश्ता है
  • ज्य़ादातर लोगों को पर्याप्त मात्रा में सूरज की रोशनी नहीं मिल पाती

शरीर को स्वस्थ और सक्रिय बनाए रखने में हर विटमिन की अहम भूमिका होती है। अगर विटमिन डी की बात की जाए तो यह एक तरह का स्टेरॉयड है, जो वसा में घुलनशील होता है। यह प्रो हॉर्मोंस का एक ऐसा समूह है, जो कैल्शियम और फॉस्फोरस को अपने भीतर तेज़ी से अवशोषित कर लेता है। हड्डियों की मज़बूती के लिए ये दोनों मिनरल बेहद ज़रूरी हैं। शरीर में विटमिन डी की कमी होने पर उसे पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम और फास्‍फोरस नहीं मिलता, जिससे कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं पैदा होती हैं। 

 

हड्डियों का रखवाला है विटामिन डी 

बचपन से ही हड्डियों के निर्माण में विटमिन डी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जिन बच्चों को पर्याप्त मात्रा में विटमिन डी का पोषण नहीं मिलता, उनकी हड्डियां अविकसित और टेढ़ी-मेढ़ी रह जाती हैं। इस समस्या को रिकेट्स के नाम से जाना जाता है। यह हड्डियों, मांसपेशियों और लिगामेंट्स को मज़बूती देता है। यह शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी मददगार होता है। इसकी वजह से ही नव्र्स और मसल्स के बीच सही तालमेल बना रहता है। यह शरीर को हर तरह के सूजन और इन्फेक्शन से बचाने में मददगार होता है। यह व्यक्ति को डायबिटीज़, ओबेसिटी, कैंसर, हार्ट डिज़ीज़ और हाई ब्लडप्रेशर जैसी समस्याओं से भी बचाता है।

विटमिन डी का कैल्शियम के साथ बहुत करीबी रिश्ता है। शरीर में कैल्शियम का अवशोषण अच्छी तरह हो, इसके लिए पर्याप्त मात्रा में विटमिन डी का सेवन करना बहुत ज़रूरी है। अगर कोई व्यक्ति अधिक मात्रा में कैल्शियमयुक्त चीज़ों का सेवन करता है लेकिन विटमिन डी की कमी होने की स्थिति में उसके शरीर को कैल्शियम का पूरा लाभ नहीं मिल पाएगा। इसके अलावा विटमिन डी-2 यानी एगोकैल्सिफेरॉल और डी-3 यानी कोलकैल्सिफेरॉल हड्डियों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।    

विटामिन डी की कमी से होने वाली समस्‍या 

आजकल महानगरों में रहने वाली कामकाजी युवा पीढ़ी रोज़ाना आठ से दस घंटे तक ऑफिस के बंद क्यूबिकल में बैठकर काम करती है, जिससे ज्य़ादातर लोगों को पर्याप्त मात्रा में सूरज की रोशनी नहीं मिल पाती। नतीजतन उनके शरीर में विटमिन डी की कमी हो जाती है। इससे अकसर उनकी मांसपेशियों में दर्द रहता है। ऐसे लक्षणों को प्राय: लोग मामूली थकान समझ कर अनदेखा कर देते हैं लेकिन तकलीफ बढ़ जाने पर जब ऐसे लोग डॉक्टर के पास जाते हैं तो जांच कराने के बाद उनके शरीर में विटमिन डी की कमी पाई जाती है, जिसका सही समय पर उपचार ज़रूरी है अन्यथा इसकी कमी से लोगों को ऑस्टियोपोरोसिस, ओबेसिटी, हार्ट डिज़ीज और डायबिटीज़ जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। अगर शरीर में विटमिन डी की मात्रा घटने लगे तो इससे लोगों में थकान, चिड़चिड़ापन, बालों का झडऩा और स्त्रियों के पीरियड्स में अनियमितता जैसे लक्षण भी नज़र आते हैं। 

कैसे पाएं इसे

आमतौर पर विटमिन डी के स्रोतों को दो हिस्सों में बांटा जा सकता है। पहला सूरज की रोशनी और दूसरा खाद्य पदार्थ। इसका पूरा लाभ उठाने के लिए इन दोनों माध्यमों से विटमिन डी का सेवन करना चाहिए।        

सूर्य की रोशनी 

विटमिन डी का सबसे प्रमुख स्रोत सूरज की रोशनी के रूप में निशुल्क सर्वसुलभ है। इसलिए प्राकृतिक रूप से विटमिन डी हासिल करने के लिए प्रतिदिन थोड़ी देर के लिए धूप में ज़रूर बैठें। धूप से मिलने वाले विटमिन डी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे लिवर अपने भीतर सुरक्षित रखता है और शरीर की ज़रूरत के मुताबिक इसे धीरे-धीरे ब्लड में रिलीज़ करता है। इसके लिए रोज़ाना धूप में बैठना ज़रूरी नहीं है।

अगर कोई व्यक्ति सप्ताह में एक या दो दिन भी लगभग आधे घंटे के लिए धूप में बैठता है तो उसके शरीर को पर्याप्त मात्रा में विटमिन डी का पोषण मिल जाता है पर यह बात हमेशा याद रखनी चाहिए कि केवल शरीर के खुले हिस्सों के माध्यम से ही इसका अवशोषण संभव है। इसलिए धूप का सेवन करने के लिए ऐसे कपड़ों का चुनाव करना चाहिए, जिससे आपके शरीर का अधिकांश हिस्सा खुला रहे।

यह सच है कि सूरज की तेज़ रोशनी से ही शरीर को विटमिन डी मिलता है लेकिन उसकी अल्ट्रावॉयलेट किरणें त्वचा के लिए नुकसानदेह साबित होती हैं। इसलिए बेहतर यही होगा कि गर्मियों में सुबह 8 से 10 और शाम को 4 से 6 बजे के बीच और सर्दियों में सुबह 9 से 12 और शाम को 3 से 5 बजे के बीच धूप का सेवन किया जाए। नौकरीपेशा वर्ग के लिए इस निर्धारित अवधि के अनुकूल समय निकालना मुश्किल होगा।

इसलिए अधिक व्यस्त रहने वाले लोगों के लिए सही तरीका यही है कि जब भी मौका मिले थोड़ी देर के लिए धूप में ज़रूर बैठना चाहिए। कुछ लोग टैनिंग की वजह से धूप में नहीं निकलते लेकिन ऐसा करना सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है। बेशक आप बाहर जाने से पहले शरीर के खुले हिस्सों पर सनस्क्रीन लोशन का इस्तेमाल करें लेकिन कुछ मिनटों के लिए धूप का सेवन ज़रूर करें।             

आहार से पाएं 

विटमिन डी फैट में घुलनशील होता है। यह शरीर में अच्छी तरह जज्ब हो जाए, इसके लिए संतुलित मात्रा में हेल्दी फैट युक्त चीज़ों जैसे-ड्राई फ्रूट्स, दूध, दही और देसी घी का सेवन करना चाहिए। इसके अलावा सभी मिल्क प्रोडक्ट्स, मछली, अंडा, चिकेन और रेड मीट में भी विटमिन डी मौज़ूद होता है। आमतौर पर रोज़ाना के खानपान और धूप से शरीर को पर्याप्त मात्रा में विटमिन डी मिल जाता है। इसकी कमी होने पर सप्लीमेंट का सेवन या इसका इंजेक्शन लेना फायदेमंद साबित होता है लेकिन डॉक्टर की सलाह के बिना इसका सेवन नुकसानदेह है।

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