हार्ट फेल्योर का निदान

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
May 04, 2013

हार्ट फेल्योर के निदान का उद्देश्य इसके लक्षण कम करना, अस्पताल में रहने की आवश्यकता घटाना और बचने की संभावना बढाना होता है। इन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए, डॉक्टर आपको कम नमक वाला भोजन करने , व्यायाम करने तथा हार्ट फेल्योर के दौरान बरती जाने वाली कुछ अन्य आवश्यक सावधानियां रखने की सलाह देता है।

 

हार्ट फेल्योर के निदान से पूर्व डॉक्टर आपसे कुछ जानकारियां ले सकता है।

  • वह पूछ सकता है कि कहीं आपको पहले से डाइबटीज, गुर्दे संबंधी कोई विकार, छाती में दर्द, उच्च रक्त चाप, उच्च कोलस्ट्रोल या कोरोनरी धमनी की बीमारी तथा कोई ह्रदय संबंधी समस्या तो नहीं है।
  • आपकी कोई पारिवारिक ह्रदय समस्या या परिवार में कोई अकाल मृत्यु आदि।
  • यदि आप एल्कोहल का सेवन करते हैं तो उसकी मात्रा।
  • यदि आपकी कभी कीमोथेरेपी या रेडियशन थेरेपी मे चिकित्सा हुई है।
  • आप तम्बाकू सेवन या धूम्रपान करते हैं या नहीं।


डॉक्टर आपकी सभी शारीरिक जांच कर हार्ट फेल्योर के सभी संभावित करणों की जानकारी एकत्र कर यह पता लगाता है कि आपके हार्ट फेल्योर के कौन से कारण हो सकते हैं।

हार्ट फेल्योर के निदान के लिए कुछ जांच जैसे कि रक्त की जांच, बी टाइप नेट्रीयूरेक्टिक पेप्टाइड(बीएनपी) रक्त परीक्षण, कार्डियक कैथेटेराइज़ेशन
छाती को एक्स-रे, इकोकार्डियोग्राम(या ईको), इंजेक्शन फ्रैक्शन (एफई), इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ईकेजी या ईसीजी) तथा मल्टीगेटिड एक्यूजाशन स्कैन (एम यू जी ए स्कैन),  इस्ट्रेस परिक्षण करावाए जा सकते हैं।   

 
इसके साथ वे ह्रदय रोग में इस्तेमाल होने वाली कुछ दवाएं देते हैं, जो इस प्रकार हैं-

डाईयूरेटिक(वाटर पिल) जो पेशाब की मात्रा बढाकर अतिरिक्त जल को शरीर से निकालता है :

  • एंजियोटेंसिन-कन्वर्टिंग एंजाइम इनहिबिटर या एंजियोटेंसिन रिसेप्टर ब्लॉकर, जो रक्त नलिकाओं को फैलाता है औऱ आगे की ओर रक्त प्रवाह बढाने में सहायक है।
  • बीटा-ब्लॉकर जो मांसपेशियों की कोशिकाओं को दीर्घायू बनाता है।
  • हृदय के संकुचन की शक्ति बढाने के लिए डायजॉक्सिन(लेनोक्सिन)
  • पोटाशियम के अल्प अंश वाला डाईयूरेटिक, जैसे स्पाइसोनोलैक्टोन( जो जेनेरिक के रूप में बिकता है), जो कम मात्रा में लेने पर लोगों की आयू बढाने में सहायक पाया गया है।
  • कभी-कभी, एंटीकोगुलेंट(खून को पतला करनेवाली दवाएं) भी दी जाती हैं, ताकि खून जमने से रोका जा सके, खासकर तब, जब रोगी को लंबे समय के बेड रेस्ट की जरूरत है।

                          
जब दवाओं और स्वयं देखभाल से लाभ नहीं हो तो हृदय का ट्रांसप्लांटेशन किया जा सकता है। हार्ट डोनर की कमी के कारण यह उपचार कम ही मामलों में हो पाता है। सामान्यतः यह 65 वर्ष से कम उम्र के रोगियों को ही मिलता है।

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