देश में लगातार बढ़ रहे हैं डिप्रेशन के रोगी, संख्या पहुंची 6 करोड़

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Nov 06, 2017

आजकल के व्यस्त और बिगड़ते लाइफस्टाइल का असर हमारे शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़ने के साथ ही मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। आलम यह है कि लोग धीरे धीरे डिप्रेशन और मानसिक तनाव की चपेट में आ रहे हैं। हाल ही आई एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 6 करोड़ लोग अवसाद से ग्रस्त हैं। विश्व मानसिक स्वास्थ्य सम्मेलन की आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. सुनील मित्तल ने कहा कि लगातार तनाव के बढ़ते मरीज एक बहुत बुरी स्थिति की ओर संकेत कर रहे हैं। 

सीआईएमबीएस इंडिया के निदेशक और इंडियन एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट साइकेट्री के सह संस्थापक और पूर्व अध्यक्ष डॉ. सुनील मित्तल ने कहा, 'पहली चुनौती यह जानने की है कि ये सब क्यों हो रहा है। लोग चुप रहकर इस रोग को झेलते रहते हैं। सबसे बड़ी बात तो ये है कि कई लोगों को पता ही नहीं होता है कि वे अवसाद से पीड़ित हैं। जो बहुत ही दुखद स्थिति है।'

विश्व मानसिक स्वास्थ्य सम्मेलन के 21वें संस्करण के चौथे और अंतिम दिन डॉ. सुनील मित्तल और प्रसिद्ध बॉलीवुड अभिनेत्री इलियाना डीक्रूज ने मानसिक स्वास्थ्य संबंधी संघर्ष की अपनी कहानी बयां की। मानसिक स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए बॉलीवुड अभिनेत्री इलियाना डीक्रूज महिला सब्स्टेंस पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

अभिनेत्री इलियाना डी क्रूज ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहा, 'मैं हमेशा से एक बहुत ही आत्मचेतन व्यक्ति रही हूं। मैं हर समय खुद को कमजोर और दुखी महसूस करती थी। मुझे इसका पता तब तक नहीं चला जब तक मुझे मदद नहीं मिली यह जानने में कि मैं अवसाद और शारीरिक डिसमॉर्फिक बीमारी से पीड़ित हूं। मैं जो करना चाहती थी, वह सभी को स्वीकार करना था। एक समय पर मैंने आत्महत्या करने का विचार बनाया और चीजों को समाप्त करना चाहा। हालांकि बाद में सब बदला और मैंने खुद को स्वीकार किया, तब सब कुछ बदल गया। मुझे लगता है कि यह अवसाद से लड़ने की ओर पहला कदम है।'

उन्होंने कहा, 'अवसाद बहुत ही वास्तविक है। यह आपके मस्तिष्क में एक रासायनिक असंतुलन है और इससे पार पाने के लिए इलाज की जरुरत है। यह सोचकर वापस बैठ जाना कि यह ठीक हो जाएगा इससे बेहतर ही की सहायता लें।' विश्व सम्मेलन का आयोजन मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों के सबसे बड़े वैश्विक गठबंधन वल्र्ड फेरडरेशन फॉर मेन्टल हेल्थ (डब्ल्यूएफएमएच), राष्ट्रीय स्वास्थ्य संघों, गैर-सरकारी संगठनों, नीति विशेषज्ञों और अन्य संस्थानों द्वारा किया गया।

IANS

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