मोटे बच्चों को अधिक रहता है कार्डियोवस्कुलर बीमारियों का खतरा, माता-पिता शुरू से ध्यान रखें ये 8 बातें

बचपन में मोटापे की समस्या के कारण बच्चों में आगे चलकर कार्डियोवैस्कुलर डिजीज का खतरा बढ़ जाता है, जानें इस समस्या से बचाव के टिप्स।

Prins Bahadur Singh
Written by: Prins Bahadur SinghPublished at: Sep 29, 2021
मोटे बच्चों को अधिक रहता है कार्डियोवस्कुलर बीमारियों का खतरा, माता-पिता शुरू से ध्यान रखें ये 8 बातें

असंतुलित खानपान और जीवनशैली के कारण बचपन से ही बच्चों में मोटापे की समस्या हो जाती है। एक आंकड़े के मुताबिक हर 6 में से 1 बच्चा मोटापे से ग्रसित है। मोटापे के कारण बच्चों में कई तरह की बीमारियों का खतरा भी रहता है। हाल ही में क्लीवलैंड क्लिनिक की टीम द्वारा किये गए एक रिसर्च में कहा गया है कि ऐसे बच्चे जो बचपन में मोटापे से ग्रसित होते हैं उनमें कार्डियोवैस्कुलर डिजीज यानी दिल से जुड़ी बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है। जर्नल ऑफ क्लिनिकल पिडियाट्रिक्स में प्रकाशित स्टडी में कहा गया है कि खानपान और जीवनशैली में सुधार करने से बचपन में मोटापे से पीड़ित व्यक्तियों में इन बीमारियों का खतरा कम हो जाता है। बच्चों के पेरेंट्स को भी इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए। अगर आपका बच्चा बचपन से ही मोटापे की समस्या से ग्रसित है तो ऐसे में उसे आगे चलकर दिल से जुड़ी गंभीर बीमारियों का जोखिम बना रहता है। आइये जानते हैं विस्तार से इसके बारे में।

मोटे बच्चों को कार्डियोवैस्कुलर डिजीज का अधिक खतरा (Childhood Obesity and Cardiovascular Disease Risk)

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(image source - freepik.com)

बचपन में मोटापे की समस्या आज के समय में बहुत तेजी से बढ़ रही है। इसके पीछे खानपान और जीवनशैली के साथ-साथ कई अन्य कारण भी जिम्मेदार होते हैं। बचपन में बच्चों के खानपान और जीवनशैली को सुधार कर मोटापे की वजह से होने वाली समस्याओं से बचा जा सकता है। मोटापे की समस्या से ग्रसित बच्चों में दिल की बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है। बॉडी मास इंडेक्स के आधार पर जिन बच्चों का वजन उनकी हाईट के अनुपात में अधिक होता है उनमें आगे चलकर दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा रहता है। यही नहीं मोटापे की समस्या से ग्रसित बच्चों में इसकी वजह से कई अन्य बीमारियां भी हो सकती हैं। ऐसे बच्चे जिनका वजन अधिक है उनमें दिल से जुड़ी बीमारियां जैसे हाई कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड प्रेशर आदि का खतरा बहुत ज्यादा होता है। मोटे बच्चों में आगे चलकर दिल से जुड़ी इन बीमारियों का खतरा ज्यादा होता है।

मोटे बच्चों में कार्डियोवैस्कुलर डिजीज के रिस्क को कम करने के टिप्स (Cardiovascular Disease Prevention Tips for Parents)

आज के समय में बच्चों में मोटापे की समस्या आम है। बच्चों के मोटापे से ग्रसित होने के पीछे खानपान, शारीरिक एक्टिविटी, जीवनशैली और आनुवांशिक और कुछ स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं जिम्मेदार होती हैं। कुछ बच्चों में मोटापे की समस्या आनुवांशिक कारणों से सबसे अधिक होती है। आधुनिक आहार का सेवन और सही पोषण न मिलने के कारण भी बच्चों में मोटापे की समस्या देखी जा रही है। तमाम अध्ययन और शोध इस बात की पुष्टि करते हैं कि जिन बच्चों को बचपन से ही मोटापे की समस्या होती है उनमें आगे चलकर कार्डियोवैस्कुलर डिजीज का खतरा अधिक रहता है। अगर बच्चों के माता-पिता इन बातों का ध्यान रखते हैं तो इस खतरे को कम किया जा सकता है।

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1. बचपन से बच्चों के पोषण के बारे में जागरूक रहना चाहिए। कम उम्र से ही बच्चों को हेल्दी डाइट का सेवन करना चाहिए।

2. बच्चों को हाई फैट वाले खाद्य पदार्थों से दूर रखना चाहिए। हाई फैट डाइट लेने से दिल से जुड़ी बीमारियों का जोखिम बढ़ता है ऐसे में आप बचपन से ही बच्चों को लो और हेल्दी फैट डाइट लेने की सलाह दें।

3. बच्चों में मोटापे की वजह से कार्डियोवैस्कुलर डिजीज के खतरे को कम करने के लिए मेडिटेरियन डायट ( Mediterranean Diet) और प्लांट बेस्ड डाइट (Plant-Based Diet) का सेवन बहुत फायदेमंद माना गया है। आप बच्चों को इन डाइट की सहायता से कार्डियोवैस्कुलर डिजीज के खतरे से बचा सकते हैं।

4. बचपन से ही नियमित रूप से व्यायाम या शारीरिक एक्टिविटी करने से कार्डियोवैस्कुलर डिजीज के खतरे को कम करने में सहायता मिलती है।

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5. बच्चों में मोटापे की समस्या के कारण नींद से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं, नींद से जुड़ी समस्याओं के चलते ऐसे बच्चों में आगे चलकर दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा रहता है। इसलिए अगर आपके बच्चे को नींद से जुड़ी समस्या है तो उसका एक्सपर्ट की देखरेख में इलाज जरूर कराएं।

6. बच्चों को पैकेज्ड और प्रोसेस्ड फूड के सेवन से दूर रखें।

7. अगर पेरेंट्स शराब का सेवन या स्मोकिंग अधिक करते हैं तो इसे कंट्रोल करने की कोशिश करें।

8. बच्चों को चीनी का अधिक सेवन न करने दें। आज के समय में चीनी को नया तंबाकू भी कहा जाता है। इसके अधिक सेवन से बच्चों के वजन पर असर पड़ता है।

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तो ऊपर बताई गयी इन बातों का ध्यान रखकर आप अपने बच्चे को कार्डियोवैस्कुलर डिजीज के खतरे से बचा सकते हैं। ऐसे बच्चे जो मोटापे की समस्या का शिकार हैं उन्हें शारीरिक गतिविधियों में भाग लेना चाहिए और उनका भोजन बहुत ही संतुलित रहना चाहिए।

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