Fri Sep 11, 2026 | 09:21 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shrey Sharma , BAMS

शुगर कंट्रोल से सूजन घटाने तक, जानें छोटे से फल रसभरी (Cape Gooseberry) खाने के फायदे

रसभरी (Cape Gooseberry) एक खट्टा-मीठा फल है। इसमें व‍िटाम‍िन सी, फाइबर और एंटीऑक्‍सीडेंट पाए जाते हैं। इससे इम्‍यून‍िटी को मजबूत बनाने में मदद म‍िलती है और ब्‍लड शुगर लेवल भी कंट्राेल रहता है। 

जब मैं शि‍मला गई थी, तो मुझे एक खट्टा-मीठा फल खाने को म‍िला ज‍िसे रसभरी (Cape Gooseberry) कहते हैं। मेरे कहने पर पापा ने ढेर सारी रसभरी खरीदकर दी थी, लेक‍िन फल के खट्टेपन के कारण मैं ज्‍यादा नहीं खा पाई। ये बात मैं कह सकती हूं क‍ि रसभरी का स्‍वाद वाकई काफी अलग होता है और मन करता है बस इसे खाते ही जाएं। यह फल भी आंवला की तरह व‍िटाम‍िन सी से भरपूर होता है। रसभरी का सेवन सेहत के ल‍िए फायदेमंद माना जाता है। आयुर्वेद में हर्ब्स का सेवन करने से शरीर को बैलेंस करने में मदद म‍िलती है, उसी तरह रसभरी का सेवन करने से भी शरीर को बैलेंस करने में मदद म‍िलती है, इससे सूजन दूर होती है और शरीर के व‍िषाक्‍त पदार्थों को शरीर से नि‍कालने में मदद म‍िलती है। इस लेख में जानेंगे रसभरी खाने के फायदे। इस व‍िषय पर बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Shrey Sharma, Ayurveda Expert, Ramhans Charitable Hospital, Haryana से बात की।

 

 

 

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1. हड्ड‍ियों के ल‍िए फायदेमंद है रसभरी- Cape Gooseberry Is Good For Bones

हड्ड‍ियों की सेहत के ल‍िए रसभरी का सेवन फायदेमंद होता है। रसभरी में मैंगनीज और व‍िटाम‍िन सी होता है ज‍िससे हड्ड‍ियों और त्‍वचा की सेहत को बेहतर बनाने में मदद म‍िलती है।

2. रसभरी से शरीर ड‍िटॉक्‍स होता है- Cape Gooseberry Helps To Detox

रसभरी का सेवन करने से शरीर को ड‍िटॉक्‍स करने में मदद म‍िलती है। इससे शरीर की गर्मी दूर होती है और शरीर के व‍िषाक्‍त पदार्थों को बाहर न‍िकालने में मदद म‍िलती है। रसभरी का सेवन करने से शरीर की सूजन और दर्द को दूर करने में मदद म‍िलती है क्‍योंक‍ि इसमें एंटीइंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं।

3. ल‍िवर के ल‍िए फायदेमंद है रसभरी- Cape Gooseberry Is Beneficial For Liver

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ल‍िवर की सेहत के ल‍िए रसभरी का सेवन फायदेमंद माना जाता है। यह ल‍िवर टॉन‍िक कहलाता है। इसमें मौजद फाइबर और एंटीऑक्‍सीडेंट्स की मदद से पाचन बेहतर होता है और शरीर की सूजन को कम करने में भी मदद म‍िलती है।

4. रसभरी से फेफड़ों का इंंफेक्‍शन दूर होता है- It Cures Lung Infection

रसभरी का सेवन करने से फेफड़ों का इंंफेक्‍शन दूर करने में मदद म‍िलती है। इसमें मौजूद व‍िटाम‍िन सी, एंटीऑक्‍सीडेंट, एंटीइंफ्लेमेटरी गुण इम्‍यून‍ स‍िस्‍टम को मजबूत बनाते हैं, सर्दी-जुकाम को दूर करते हैं लंग्‍स की सूजन से बचाने में भी मदद करते हैं।

5. रसभरी का सेवन करने से इम्‍यूनि‍टी मजबूत होती है- Cape Gooseberry Boosts Immunity

ScienceDirect की एक स्‍टडी के मुताब‍िक, रसभरी में व‍िटाम‍िन सी, फ्लेवोनाइड्स और एंटीऑक्‍सीडेंट्स पाए जाते हैं। रसभरी की 100 ग्राम की मात्रा में 20 से 35 एमजी व‍िटाम‍िन सी होता है। रसभरी में एंटीडायबि‍ट‍िक, एंटीट्यूमर और एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। रसभरी में व‍िटामिन सी पाया जाता है जो क‍ि एक वॉटर सॉल्‍यूबल एंटीऑक्‍सीडेंट है। रसभरी का सेवन करने से इम्‍यून‍िटी मजबूत होती है।

रसभरी का सेवन कैसे करें?- How To Consume Cape Gooseberry

  • आयुर्वेद के मुताब‍िक, रसभरी का सेवन करने से पित्त दोष को दूर करने में मदद म‍िलती है। रसभरी का सेवन ड्राई करके पाउडर के फार्म में कर सकते हैं या रसभरी का ताजा फल भी खा सकते हैं। रसभरी का सेवन सुबह के वक्‍त करना फायदेमंद होता है।

न‍िष्‍कर्ष:

रसभरी का सेवन करने से इम्‍यून‍िटी मजबूत होती है, फेफड़ों का इंंफेक्‍शन दूर होता है, ल‍िवर के ल‍िए यह फायदेमंद है, इससे शरीर ड‍िटॉक्‍स होता है और हड्ड‍ियों को मजबूती म‍िलती है।

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Video Credit: Dietitian Shweta J Panchal

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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  • Current Version

    Feb 17, 2026 11:03 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Feb 17, 2026 11:03 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Shrey Sharma

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