अनहेल्दी लाइफस्टाइल से लोगों को शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ने और हाई ब्लड प्रेशर जैसी कई समस्याएं होती हैं, जिसके कारण हार्ट पर प्रेशर पड़ने लगता है। इसकी गंभीर स्थिति होने पर लोगों को दिल का दौरा या हार्ट अटैक होने की समस्या हो सकती है। दिल का दौरा पड़ने के बाद व्यक्ति को अक्सर लगता है कि अब जीवन बीमारी में ही बीतेगा। लेकिन क्या ऐसा वाकई में है? ऐसे में गुरुग्राम के पारस हेल्थ के कार्डियोलॉजी के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. विकास गोयल (Dr.Vikash Goyal, Associate Director, Cardiology, Paras Health, Gurugram) बताते हैं कि, दिल का दौरा पड़ने के बाद हेल्दी लाइफस्टाइल को फॉलो करके स्वस्थ रहा जा सकता है।
क्या हार्ट अटैक के बाद हेल्दी लाइफ संभव है?
डॉ. विकास गोयल के अनुसार, "हां, बिल्कुल, हार्ट अटैक एक गंभीर मेडिकल कंडीशन है, लेकिन सही इलाज और लाइफस्टाइल में जरूरी बदलावों के साथ कई लोग लंबा, स्वस्थ और एक्टिव लाइफ जीते हैं। हार्ट अटैक के बाद जीवन खत्म नहीं होता, बल्कि यह एक नया मौका होता है अपनी सेहत को बेहतर बनाने का।" बता दें, हार्ट अटैक तब होता है, जब हार्ट की मांसपेशियों तक ब्लड की सप्लाई अचानक से कम या बंद हो जाती है। ऐसा हार्ट में ब्लॉकेज के कारण होता है, जिससे हार्ट को ऑक्सीजन ठीक से नहीं मिल पाती है। समय से इलाज न मिलने पर यह स्थिति गंभीर और जानलेवा हो सकती है।
हार्ट अटैक के बाद रिकवरी कैसे होती है?
डॉ. विकास गोयलके अनुसार, "हार्ट अटैक के बाद रिकवरी एक स्लो प्रोसेस है। इसमें डॉक्टर की सलाह अनुसार नियमित रूप से दवाइयों का सेवन करने, सही खानपान अपनाना, नियमित फिजिकल एक्टिविटीज करना जरूरी है। कार्डियक रिहैबिलिटेशन यानी हार्ट को स्वस्थ रखने के लिए हार्ट अटैक के मरीज को मेडिकल देखरेख में रखा जाता है।" लाइफस्टाइल को बैलेंस रखने से ही दोबारा से स्वस्थ जीवन जिया जा सकता है।
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क्या है कार्डियक रिहैबिलिटेशन और क्यों है जरूरी?
डॉ. विकास गोयल कहते हैं कि, "कार्डियक रिहैबिलिटेशन एक खास तरह का प्रोग्राम होता है, जिससे हार्ट अटैक के बाद मरीजों को स्वस्थ होने में मदद मिलती है। इससे दिल के कार्यों को बेहतर करने, शरीर को मजबूती देने, हार्ट को हेल्दी रखने और भविष्य में हार्ट अटैक के खतरे को कम करने में मदद मिलती है।" कार्डियक रिहैबिलिटेशन में डॉक्टर की निगरानी में मरीजों को कई एक्टिविटीज कराई जाती हैं।
डॉक्टर की निगरानी में एक्सरसाइज
कार्डियक रिहैबिलिटेशन में हार्ट अटैक के बाद डॉक्टर की निगरानी में वॉक, योग और हल्की स्ट्रेचिंग जैसे एक्सरसाइज कराई जाती हैं। इनसे शरीर को एनर्जी देने और हार्ट को मजबूती देने में मदद मिलती है।
2005 में Preventive Medicine के अनुसार, दिल की बीमारियों से बचने के लिए पैदल चलना अहम भूमिका निभाता है। इसे डेली रूटीन में शामिल करना फायदेमंद होता है।
2019 में Frontiers in Cardiovascular Medicine की स्टडी के अनुसार, फिजिकल एक्सरसाइज स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है। यह मोटापे को कम करने और दिल से जुड़ी बीमारियों से बचने का भी एक अच्छा तरीका है। एक्सरसाइज न सिर्फ दिल की बीमारियों से बचाव करती है, बल्कि अगर किसी को पहले से दिल की बीमारी है, तो उसे भी ठीक करने और स्वास्थ्य में सुधार करती है।
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हेल्दी और बैलेंस्ड डाइट
हार्ट अटैक के बाद इस प्रोग्राम में एक्सपर्ट की सलाह के साथ हेल्दी और पोषक तत्वों से युक्त सब्जियों, फलों और साबुत अनाज जैसे पोषक तत्वों से युक्त फूड्स को खाने की सलाह दी जाती है। वहीं, इन लोगों को ऑयली, नमक, प्रोसेस्ड, जंक और अधिक मीठे फूड्स को न खाने की सलाह देते हैं।
2023 में Dovepress Taylor & Francis Group में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, हार्ट हेल्थ के लिए मेडिटेरेनियन डाइट को सबसे अच्छा और बैलेंस्ड माना जाता है। इसके बाद डैश डाइट की सलाह दी जाती है, जो हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में मदद करती है। इसके अलावा, चीनी और नमक की मात्रा का ध्यान रखें और शरीर में पोषक तत्वों की कमी न होने दें।
लाइफस्टाइल में सुधार
हार्ट अटैक के बाद दिल से जुड़ी बीमारियों से बचने और इनके खतरे को कम करने के लिए समय से सोना, हाइड्रेटेड रहना और स्मोकिंग या अल्कोहल से दूरी बनाने जैसे लाइफस्टाइल में सुधार कराए जाते
स्ट्रेस को कम करें
हार्ट अटैक के बाद दिल को स्वस्थ रखने, ब्रेन को रिलैक्स करने और स्ट्रेस को कम करने के लिए मेडिटेशन या योग करने की सलाह दी जाती है।
2020 में Cureus Journal of Medical Science में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, मानसिक तनाव दिल की बीमारियों का एक बहुत बड़ा कारण है, जिसे अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं। मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं से पीड़ित व्यक्ति में हार्ट अटैक या दिल की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है।
इस प्रोग्राम के जरिए डॉक्टर की निगरानी में दिल के कार्यों को बेहतर करने और इसकी कार्यक्षमता में सुधार करने में मदद मिलती है।
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रिस्क फैक्टर्स को कम करें
डॉ. विकास गोयल बताते हैं कि, "हार्ट अटैक के बाद दिल को स्वस्थ और मजबूत रखने के लिए इससे जुड़े कुछ हाई ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल जैसे रिस्क फैक्टर्स को नियंत्रित करना जरूरी हो जाता है।"
2022 में Cureus Journal of Medical Science के रिव्यू के अनुसार, व्यक्ति को हाई ब्लड प्रेशर, मोटापे, डायबिटीज, स्मोकिंग करने वाले और फिजिकल एक्टिविटीज न करने के कारण कोरोनरी आर्टरी डिजीज यानी दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
ब्लड प्रेशर कंट्रोल करें
इस दौरान ब्लड प्रेशर (hypertension) के स्तर को नियंत्रित करना जरूरी है। इसके लिए समय से दवाइयों और लाइफस्टाइल में बदलाव करना जरूरी होता है।
डायबिटीज को कंट्रोल रखें
अगर व्यक्ति को डायबिटीज यानी ब्लड शुगर (diabetes) है, तो ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित रखना जरूरी है।
कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करें
बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से धमनियों में ब्लॉकेज बढ़ जाती है, जो हार्ट की बीमारियों के खतरे या हार्ट अटैक के खतरे को दोबारा बढ़ा सकता है। ऐसे में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करना जरूरी हो जाता है।
स्मोकिंग से बचें
स्मोकिंग करना हार्ट के लिए नुकसानदायक होता है। किसी भी व्यक्ति या हार्ट के मरीज को स्मोकिंग करने से बचना चाहिए।
मानसिक स्वास्थ्य पर दें ध्यान
डॉ. विकास गोयल के अनुसार, "हार्ट अटैक के मरीजों के स्वास्थ्य में सुधार करने के लिए मानसिक स्वास्थ्य भी अहम भूमिका निभाता है। हार्ट अटैक के बाद अक्सर व्यक्ति को डर, चिंता और डिप्रेशन महसूस होता है, जो नॉर्मल है। लेकिन इस दौरान मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। हार्ट अटैक के खतरे को कम करने और दिल को मजबूती देने के लिए स्ट्रेस को कम करना और ब्रेन को रिलैक्स करना जरूरी होता है।" ऐसे में मानसिक स्वास्थ्य में सुधार करने के लिए परिवार और दोस्तों के साथ बैठें, काउंसलिंग लें, पॉजिटिव सोचें और मेडिटेशन करें, जो हार्ट की रिकवरी के लिए जरूरी है।
2024 में Cureus Journal of Medical Science के रिव्यू के अनुसार, दिल की बीमारी होने पर मानसिक तनाव या परेशानियां हो सकती हैं और इसी तरह मानसिक समस्याएं दिल की बीमारी के खतरे को बढ़ा सकती हैं या उसे और भी बिगाड़ सकती हैं।
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नियमित जांच कराएं
हार्ट अटैक के बाद किसी भी गंभीर स्थिति से बचने के लिए नियमित जांच करानी चाहिए। इससे किसी भी गंभीर स्थिति से समय रहते बचा जा सकता है। रेगुलर चेकअप सिर्फ हार्ट अटैक के मरीजों को ही नहीं बल्कि स्वस्थ व्यक्ति को भी कराना चाहिए।
डॉ. विकास गोयल कहते हैं कि, "टाइम से जांच कराने और लाइफस्टाइल में निरंतर बदलाव के साथ, हृदय काफी हद तक ठीक हो सकता है, और दूसरे दिल के दौरे की संभावना को काफी हद तक कम किया जा सकता है।"
डॉक्टर से कब मिलें?
वैसे तो हार्ट अटैक के बाद नियमित जांच कराना नॉर्मल से ज्यादा जरूरी हो जाता है। अगर किसी व्यक्ति को हार्ट अटैक के बाद थकान होने, कमजोरी महसूस होने, बेचैनी होने, सीने में दर्द होने और दिल की धड़कन के अनियमित होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए, ताकि किसी भी गंभीर स्थिति से बचा जा सके।
निष्कर्ष
हार्ट अटैक एक गंभीर स्थिति है, लेकिन इसके बाद भी स्वस्थ जीवन जिया जा सकता है। इसके लिए समय से इलाज कराने, डॉक्टर की बताई दवाइयों का सेवन करने, हेल्दी लाइफस्टाइल को फॉलो करने, सही खानपान, एक्सपर्ट की निगरानी में एक्सरसाइज करने, ब्रेन को रिलैक्स रखते हुए पॉजिटिव सोच रखने से दिल को मजबूत बनाने और इसके कार्यों को बेहतर रखने में मदद मिल सकती है। साथ ही, दोबारा हार्ट अटैक के खतरे को कम किया जा सकता है। ध्यान रहे, दिल को स्वस्थ रखने के लिए नियमित रूप से जांच कराना, ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखना भी जरूरी होता है।
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FAQ
हार्ट अटैक के बाद खान-पान में क्या बदलाव करने चाहिए?
हार्ट अटैक के मरीजों को अपनी डाइट में ताजी सब्जियां, फल और साबुत अनाज जैसे पोषक तत्वों से युक्त फूड्स खाने चाहिए। इन लोगों को ज्यादा नमक, चीनी, ऑयली फूड, जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड्स को खाने से बचना चाहिए।रिकवरी के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
दोबारा हार्ट अटैक से बचने के लिए व्यक्ति को ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित रखना जरूरी होता है। इसके अलावा, इन लोगों को स्मोकिंग और अल्कोहल का सेवन करने से भी बचना चाहिए।क्या हार्ट अटैक के बाद एक्सरसाइज करना सुरक्षित है?
हां, हार्ट अटैक के बाद एक्सरसाइज की जा सकती है। लेकिन इस दौरान व्यक्ति को सिर्फ डॉक्टर की सलाह और निगरानी में ही एक्सरसाइज शुरू करनी चाहिए। इसके लिए शुरुआत में हल्की वॉक, योग और स्ट्रेचिंग की सलाह दी जाती है ताकि दिल पर अचानक दबाव न पड़े।हार्ट अटैक के बाद रिकवरी के दौरान डॉक्टर से कब संपर्क करें?
हार्ट अटैक के बाद अगर किसी व्यक्ति को सीने में दर्द, बहुत ज्यादा कमजोरी या थकान होने, सांस फूलना, बेचैनी या दिल की धड़कन के अनियमित होने जैसा महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।हार्ट अटैक के बाद मानसिक स्वास्थ्य क्यों जरूरी है?
अटैक के बाद कई मरीज डर, चिंता या डिप्रेशन महसूस करते हैं। ज्यादा स्ट्रेस हार्ट की रिकवरी में रुकावट डाल सकता है। ऐसे में मानसिक स्वास्थ्य में सुधार करने के लिए पॉजिटिव सोचना और मेडिटेशन करना जरूरी हो जाता है।
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Apr 26, 2026 12:25 IST
Modified By : Priyanka Sharma Apr 26, 2026 12:25 IST
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Published By : Priyanka Sharma
Reviewed By : Dr Vikash Goyal