ब्रेन हेमरिज का कारण बन सकता है पैनिक डिसॉर्डर रोग, जानें इसके लक्षण व इलाज

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jul 29, 2018
Quick Bites

  • यह समस्या चिंता और डर से जुड़ी हुई है।
  • नियमित एक्सरसाइज़ और योगाभ्यास करें
  • छोटी सी समस्या देख कर घबराहट में हाथ-पैर कांपना।

अब क्या होगा, बहुत गड़बड़ हो गई, कुछ समझ नहीं आ रहा, मैं क्या करूं....? आपको भी अपने आसपास अकसर ऐसी बातें करने वाले कुछ लोग नज़र आते होंगे। अगर कोई बड़ी समस्या हो तो व्यक्ति में घबराहट होना स्वाभाविक है लेकिन छोटी-छोटी बातों से बहुत ज्य़ादा नर्वस होने वाले व्यक्ति को पैनिक डिसॉर्डर की समस्या हो सकती है।   

समस्या को समझें

मूलत: यह समस्या चिंता और डर से जुड़ी हुई है। शुरुआती दौर में लोग इसके लक्षणों को पहचान नहीं पाते। मनोवैज्ञानिक सलाहकार विचित्रा दर्गन आनंद के अनुसार, 'एंग्ज़ायटी यानी चिंता इस मनोरोग की सबसे प्रमुख वजह है। जो लोग छोटी-छोटी बातों को लेकर बेवजह चिंतित रहते हैं, उन्हें यह मनोवैज्ञानिक समस्या हो सकती है। अगर किसी को फोबिया की समस्या हो तो उन स्थितियों में पैनिक डिसॉर्डर के लक्षण भी नज़र आ सकते हैं, जिनसे व्यक्ति को अत्यधिक डर लगता है। मसलन, कुछ लोगों को ऊंचाई, पानी, भीड़, लिफ्ट और ऐरोप्लेन आदि से बहुत घबराहट होती है। ऐसी स्थिति में व्यक्ति को पैनिक अटैक आ सकता है। इसके अलावा अचानक आने वाला कोई सदमा, जैसे-बड़ा आर्थिक नुकसान, दुर्घटना, पारिवारिक कलह या किसी प्रियजन की मौत के बाद भी कुछ लोगों में समस्या के लक्षण नज़र आ सकते हैं। अधिक गंभीर स्थिति में व्यक्ति बेहोश भी हो सकता है। 

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प्रमुख लक्षण 

  • कमज़ोरी और अनावश्यक थकान
  • छोटी सी समस्या देख कर घबराहट में हाथ-पैर कांपना
  • अधिक पसीना निकलना
  • आंखों के आगे अंधेरा छाना
  • बोलते वक्त ज़ुबान लड़खड़ाना
  • दिल की धड़कन बढऩा

क्या है वजह

पैनिक डिसॉर्डर के लिए कई अलग-अलग वजहें जि़म्मेदार हो सकती हैं। किसी भी इंसान के व्यक्तित्व को बनाने में बचपन के पारिवारिक माहौल का महत्वपूर्ण योगदान होता है। जिन बच्चों की परवरिश अति संरक्षण या सख्ती भरे वातावरण में होती है, उनमें मुश्किल स्थितियों का सामना करने की क्षमता विकसित नहीं होती। इसलिए ऐसे बच्चों में पैनिक डिसॉर्डर की आशंका बढ़ जाती है। इसके अलावा हर इंसान के व्यक्तित्व के कुछ ऐसे कमज़ोर पक्ष होते हैं, जिनसे यह समस्या हो सकती है। चिंता, भय, घबराहट, गुस्सा, गहरी उदासी, शक की आदत या भावनात्मक असंतुलन जब एक सीमा से अधिक बढ़ जाए तो व्यक्ति में इसके लक्षण प्रकट हो सकते हैं। एल्कोहॉल या कैफीन का अधिक मात्रा में सेवन, लो ब्लड शुगर, थायरॉयड ग्लैंड की अत्यधिक सक्रियता या दिल से संबंधित कोई समस्या होने पर भी पैनिक अटैक की आशंका बढ़ जाती है।

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कैसे करें बचाव

  • हमेशा तनावमुक्त रहें।
  • परिवार के सदस्यों के अलावा अपने प्रियजनों से नियमित बातचीत करें क्योंकि अकेलापन भी इसकी बड़ी वजह है।
  • सात-आठ घंटे की नींद लें।  
  • नियमित एक्सरसाइज़ और योगाभ्यास करें। अगर कभी अधिक घबराहट हो तो शरीर को ढीला छोड़कर गहरी सांस लें। इससे बहुत राहत महसूस होगी।     

क्या है उपचार

व्यक्ति में मौज़ूद लक्षणों की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए इसका उपचार किया जाता है। ज़रूरत पडऩे पर कुछ एंटी डिप्रेज़ेंट दवाएं भी दी जाती हैं। काउंसलिंग और कॉग्नेटिव बिहेवियर थेरेपी की मदद से पीडि़त व्यक्ति में यह समझ विकसित की जाती है कि जब भी कोई समस्या आए तो उससे घबराने के बजाय उसका हल ढूंढने की कोशिश करनी चाहिए। एक्सपोज़र थेरेपी भी बहुत कारगर साबित होती है। इसके माध्यम से विशेषज्ञ मरीज़ को उन जटिल स्थितियों का सामना करना सिखाते हैं, जिनमें उसे घबराहट होती है। उपचार के छह महीने बाद ही व्यक्ति के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव नज़र आने लगता है।

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