कहीं आपकी वजाइना में ड्राइनेस का कारण ये तो नहीं...?

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Feb 15, 2017
Quick Bites

  • एस्ट्रोजन के लेवल में कमी से होती है वजाइना में ड्राइनेस।  
  • क्लींजर से योनि के नेचुरल बैलेंस पर असर पड़ता है।
  • ज्‍यादा एक्सरसाइज से एस्ट्रोजन का बनना कम हो जाता है।

बढ़ती उम्र खासतौर पर मीनोपॉज के बाद वजाइना में ड्राइनेस आना बहुत ही आम बात है। ऐसा महिलाओं में एस्ट्रोजन के कम उत्‍पादन के कारण होता हैं। लेकिन अगर यह समस्‍या कम उम्र की महिलाओं में होने लगे तो यह परेशानी का कारण हो सकता है। इससे महिलाओं में तीव्र खुजली, योनि स्राव, सेक्‍स के दौरान दर्द और हल्‍की ब्‍लीडिंग और योनि में जलन आदि समस्‍या होने लगती हैं। इसलिए यह जानना बहुत जरूरी है कि महिलाओं में कम उम्र में भी ड्राइनेस का क्‍या कारण हो सकता है। ताकी समय पर इसका उपचार किया जा सकें।   

महिलाओं की योनि में चिकनाई गर्भाश्य ग्रीवा के द्वारा बनती है, जो महिलाओं को वजाइनल इंफेक्‍शन से बचाने, सेक्‍स के दौरान मदद करने, योनि को स्वच्छ बनाए रखने आदि का काम करती है। लेकिन वजाइना में चिकनाई ना होने की वजह से वजाइना में ड्राइनेस आ जाती है। आइए वजाइना में ड्राइनेस के कारणों के बारे में जानें।  
sad woman in hindi

इसे भी पढ़ें : योनि संक्रमण से बचने के उपाय

कम उम्र में क्‍यों होती है वजाइना में ड्राइनेस

हॉर्मोन में बदलाव- वजाइना में ड्राइनेस आने का सबसे आम कारण एस्‍ट्रोजन हार्मोन की कमी है। ये एक ऐसी स्थिति है जो मीनोपॉज़ के बाद सामने आती है। लेकिन कम उम्र में ऐसा ब्रेस्‍टफीडिंग कराने वाली महिलाओं के साथ होता है और कभी-कभी किसी और शारीरिक समस्या के कारण एस्ट्रोजन का उत्पादन घट जाने से होता है।  

एस्ट्रोजन एक हार्मोन है जो कि वजाइना के टिश्‍युओं को स्वस्थ रखने का काम करता है। यह हार्मोन योनि में लुब्रिकेंट, एसिडिटी लेवल और इलास्टिसिटी को बनाए रखने में मदद करता है। लेकिन जब एस्ट्रोजन के लेवल में कमी आती है तो वजाइना में लुब्रिकेंट की कमी हो जाती है और वजाइना में ड्राइनेस आने लगती है।

क्लींजर का उपयोग- कुछ महिलाएं बाजार में उपलब्‍ध वजाइनल क्लींजर का उपयोग करती हैं, इन क्लींजर के कारण भी योनि के नेचुरल बैलेंस पर असर पड़ता है और वजाइना में ड्राइनेस आ जाती है। स्विमिंग पूल में इस्तेमाल किये जाने वाले केमिकल भी वजाइना में ड्राइनेस का अहम कारण है।

दवाइयां और कीमोथेरेपी - सर्दी और डिप्रेशन को दूर करने वाली दवाओं के इस्तेमाल से वजाइना के टिश्यू में ड्राई होने लगते हैं जिससे वजाइना में शुष्की आ जाती है। इसके अलावा जब एक महिला कीमोथेरेपी से गुजरती है तो इसका असर अंडाशय पर पड़ता है और इससे एस्ट्रोजन कम बनने लगते है।

 

इसे भी पढ़ें : योनि का सूखापन दूर करने के लिए अपनाएं ये उपाय




चिंता और तनाव - चिंता और तनाव के चलते भी वजाइना में लुब्रीकेंट की कमी हो जाती है। महिलाओं को बहुत अधिक चिंता या फिर तनाव रहता है तो उनकी वजाइना में सही तरह से ब्‍लड का सर्कुलेशन नहीं हो पाता है। इससे कामेच्छा नहीं होती और एस्ट्रोजन भी कम बनता है। और यही वजह है कि वजाइना में ड्राइनेस आ जाता है।


ज्‍यादा एक्सरसाइज - रोजाना एक्सरसाइज करना सेहत के लिए अच्‍छी मानी जाती है लेकिन क्‍या आप जानती है कि ज्‍यादा एक्‍सरसाइज करने से भी वजाइना में ड्राइनेस आने लगती है। जी हां ज्‍यादा एक्सरसाइज से एस्ट्रोजन का बनना कम हो जाता है जिससे वजाइना ड्राई हो जाती है।

इस तरह डिलीवरी के समय, पीरियड्स के दौरान, ब्रेस्‍टफीडिंग के समय इस हार्मोन्स में कमी आ जाती है। इसके अलावा अगर महिलाएं किसी भी कैंसर के इलाज के लिए रेडियोथेरेपी, कीमोथेरेपी या फिर किसी अन्य दवाओं के इस्‍तेमाल से भी एस्ट्रोजन हार्मोन्स में परिवर्तन आने लगता है। और वजाइना में ड्राइनेस आ जाती है।

ऐसे अन्य स्टोरीज के लिए डाउनलोड करें: ओनलीमायहेल्थ ऐप

Image Source : Shutterstock.com

Read More Article on Womens Health in Hindi

Loading...
Is it Helpful Article?YES5178 Views 0 Comment
संबंधित जानकारी
  • सभी
  • लेख
  • स्लाइडशो
  • वीडियो
  • प्रश्नोत्तर
I have read the Privacy Policy and the Terms and Conditions. I provide my consent for my data to be processed for the purposes as described and receive communications for service related information.
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK