Sore Throat Relief: सर्दियों में खांसी और जुकाम होना आम बात है क्योंकि ठंडी हवा के कारण गले में सूखापन और जलन होने लगती है। अगर इसका समय पर इलाज न किया जाए, तो इंफेक्शन कान और नाक तक पहुंच सकता है। ऐसे में लोग अक्सर दवाइयों के जरिए अपने गले की खराश और खांसी को कम करने की कोशिश करते हैं, लेकिन इंफेक्शन के लिए बार-बार दवाई लेना सही नहीं है। मेरी बेटी रेवा रावत के साथ भी सर्दियां आने पर कुछ ऐसा ही होता था, तो मैंने इस बार किचन के हर्ब्स को दवाई के तौर पर इस्तेमाल किया क्योंकि इससे साइड इफेक्ट्स का रिस्क भी कम रहता है। इस बार सर्दियों में तेजपत्ता और काली मिर्च के काढ़े ने मेरी बेटी की खांसी और गले की खराश में काफी राहत पहुंचाई, लेकिन क्या सच में तेजपत्ता और काली मिर्च गले की खराश में कारगर हैं? यह जानने के लिए हमने हरियाणा के सिरसा स्थित रामहंस चैरिटेबल हॉस्पिटल के आयुर्वेदिक डॉ. श्रेय शर्मा से बात की।
रेवा को गले की खराश में दिक्कत होने की वजह
दरअसल, दो साल पहले हम लोग मुंबई से दिल्ली शिफ्ट हुए और सर्दियां शुरू होते ही रेवा को खांसी की समस्या होने लगी। हालांकि, शुरुआत में मैंने उसकी खांसी को बहुत ही नॉर्मल समझकर इग्नोर कर दिया था, क्योंकि उसकी खांसी और गले की खराश कभी ज्यादा हो जाती तो कभी कम हो जाती थी। करीब एक महीना इसी तरह से गुजरने के बाद, मुझे महसूस हुआ कि रेवा को खांसी कुछ ज्यादा ही परेशान कर रही है, क्योंकि रात को सोते समय भी वह खांसती ही रहती थी। उसे हमेशा शिकायत रहती थी कि गले में सूखापन महसूस होता है। यह जानकर मैंने उसके हाइड्रेशन पर ध्यान रखा, लेकिन इससे भी समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा था।

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पिछले साल खांसी के कारण हुए कई टेस्ट
मैंने रेवा की खांसी कम करने के लिए अलग-अलग सिरप भी दिए, लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हो रहा था। मेरी टेंशन बढ़ने लगी थी और फिर मैंने डॉक्टर को दिखाया। उन्होंने कई ब्लड टेस्ट कराए जिसमें टीबी तक का टेस्ट हुआ और सभी टेस्ट नॉर्मल आए। उन दिनों मैं बहुत परेशान हुई क्योंकि टेस्ट और दवाइयां लेने के बाद भी रेवा की खांसी में कोई फर्क नहीं हो रहा था। दवाइयां और सिरप लेकर उसने पूरी सर्दियां निकाल दीं और गर्मियां आते ही खांसी और गले की खराश छूमंतर हो गई।
तेजपत्ता और काली मिर्च के काढ़े ने किया कमाल
इस साल जैसे ही सर्दियां शुरू हुईं, फिर से रेवा को खांसी और गले की खराश ने परेशान कर दिया। इस साल दिल्ली में प्रदूषण का लेवल भी बहुत ज्यादा था, तो मुझे डर था कि कहीं इस बार खांसी और गले की खराश बढ़ न जाए और मैं इस साल अपनी बेटी को खांसी की कोई भी दवाई या सिरप नहीं देना चाहती थी, इसलिए मैंने आयुर्वेदिक तरीके खोजने शुरू किए। मुझे मेरी पड़ोस की एक बुजुर्ग महिला ने तेजपत्ता और काली मिर्च का काढ़ा पिलाने की सलाह दी। मैंने उसी दिन सुबह रेवा के लिए तेजपत्ता और काली मिर्च का काढ़ा बनाया और नाश्ते में ही उसे धीरे-धीरे एक-एक घूंट पीने को कहा। चार से पांच दिनों में ही खांसी और गले की खराश में बहुत फर्क नजर आया और इस बात की पुष्टि NCBI की रिपोर्ट भी करती है। रिपोर्ट के अनुसार, तेजपत्ता सूजन कम करने में मददगार होता है जो इम्यून सिस्टम को सुधारता है। इसके अलावा, तेजपत्ता खांसी, फ्लू और बुखार को कम करने में भी सहायक होता है।
डॉ. श्रेय शर्मा की सलाह
जब मैंने डॉ. श्रेय को अपनी बेटी पर आजमाए इस नुस्खे के बारे में बताया, तो उन्होंने कहा, “काली मिर्च और तेजपत्ता दोनों जड़ी-बूटियों की तासीर तीक्ष्ण होती है। आयुर्वेद के अनुसार, काली मिर्च और तेजपत्ता ‘कफज कास’ यानी खांसी के लिए बहुत ही बेहतर औषधि हैं। जिन लोगों को सफेद बलगम, खांसी और पानी आता है, उन्हें यह काढ़ा दिया जा सकता है, लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि दोनों चीजों को मिलाकर बहुत लंबे समय तक नहीं दिया जाना चाहिए। इसके अलावा, जिन लोगों को पीला या हरा बलगम आता है, उन्हें ये काढ़ा न दें क्योंकि इससे शरीर में पित्त बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा और कंडीशन खराब हो सकती है। अगर आप चाहें, तो इसमें थोड़ा सा शहद मिलाकर दे सकते हैं। तेजपत्ता, काली मिर्च और शहद का काढ़ा खांसी और खराश में फायदेमंद हो सकता है।”
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निष्कर्ष
मैंने भी डॉ. श्रेय की इस बात का ध्यान रखा और अपनी बेटी को शुरुआत में तो चार-पांच दिन लगातार काली मिर्च और तेजपत्ता का काढ़ा दिया। इसके बाद हफ्ते में दो या तीन बार ही देने लगी और कुछ समय के लिए मैंने यह काढ़ा बंद कर दिया। इस काढ़े से मेरी बेटी को तो काफी फर्क महसूस हुआ और उसे खांसी और गले की खराश नहीं हुई। इस काढ़े को देने से पहले आयुर्वेदिक एक्सपर्ट की सलाह लेना बहुत जरूरी है क्योंकि हर इंसान की कंडीशन अलग होती है।
Main Image Credit: AI
FAQ
काली मिर्च कब नहीं खानी चाहिए?
अगर किसी को एसिडिटी, अल्सर, बवासीर या पेट में जलन हो, तो काली मिर्च लेने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें क्योंकि इसकी तासीर गर्म होती है।सुबह के समय तेजपत्ता की चाय किसे नहीं पीनी चाहिए?
प्रेग्नेंट और ब्रेस्टफीड कराने वाली महिलाओं को सुबह तेज पत्ते की चाय नहीं पीनी चाहिए। इससे डाइजेशन खराब हो सकता है।क्या तेज पत्ते एक्सपायर हो सकते हैं?
तेज पत्ते को खरीदने के बाद एयरटाइट कंटेनर में पैक करके फ्रिज में रखना चाहिए। इससे ये एक-दो सालों तक चल सकता है।
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Feb 13, 2026 18:51 IST
Modified By : Aneesh Rawat Feb 13, 2026 18:51 IST
Modified By : Aneesh RawatFeb 13, 2026 18:51 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Shrey Sharma