खाना खाने के बाद मीठा खाना कितना सही और कितना गलत! आयुर्वेद के जरिए जानें मीठा खाने के नुकसान

खाना खाने के बाद मीठा खाने की लगती है तलब तो जरा ठहरिए और आयुर्वेद के जरिए जानें क्या सही है खाना खाने के बाद मीठा खाना।

 

Jitendra Gupta
Written by: Jitendra GuptaPublished at: Mar 02, 2020Updated at: Mar 02, 2020
खाना खाने के बाद मीठा खाना कितना सही और कितना गलत! आयुर्वेद के जरिए जानें मीठा खाने के नुकसान

आपने टीवी पर कई बार एक ऐड यानी की विज्ञापन देखा होगा, जिसमें खाना खाने के बाद 'कुछ मीठा हो जाए' की टैगलाइन कानों में गूंजती सुनाई देती है। लेकिन मौजूदा वक्त में क्या ये लाइन आप पर बिल्कुल सटीक बैठती है इसके बारे में आपने कभी सोचा है? क्या खाना खाने के बाद मीठा हमारी सेहत के लिए अच्छा है? इस भागदौड़ भरी जिंदगी और व्यस्त जीवनशैली व खराब खान-पान ने हमें ऐसी बीमारियों का शिकार बना दिया है, जिनसे हम चाहकर भी नहीं मुंह मोड़ सकते हैं। क्या आप जानते हैं कि अब की तुलना में पहले खाना खाने के बाद मीठा खाने का रिवाज बिल्कुल नहीं था? अगर आप इस बात को लेकर हैरत में हैं कि ऐसा कैसे हो सकता है जबिक पहले मिठाईयों का चलन खूब हुआ करता था तो न्यूट्रिशन एक्सपर्ट शुचि अग्रवाल आपको इसके पीछे छिपे रहस्य के बारे में बता रही हैं। 

sweet after food

खाने की सूची होती जा रही छोटी

न्यूट्रिशन एक्सपर्ट शुचि अग्रवाल का कहना है कि मौजूदा वक्त में खाने को लेकर जितनी चर्चा होती है शायद ही कभी हुई हो। मीठा सिर्फ और सिर्फ कारण बन गया, जबिक इसके लिए जिम्मेदार और भी कई कारक हैं। शुचि कहती हैं कि मौजूदा वक्त में डॉक्टर और सोशल मीडिया दोनों ही आपको खाने की लिस्ट छोटी और न खाने की लिस्ट लंबी रखने की सलाह देते हैं। इतनी ही नहीं डॉक्टर आपको तला-भुना हुआ खाना, चावल, ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाले फूड, ग्लूटेन फ्री गेंहू, शक्कर यानी कि मीठा और तो और दूध, मक्खन, घी जैसे डेयरी उत्पाद न खाने की सलाह देते हैं। जिस कारण आम आदमी इस बात को लेकर परेशान रहता है कि क्या खाए और क्या नहीं खाएं।

वजन कम करना इसलिए हो रहा मुश्किल

वहीं जब बात वजन कम करने की आती है और अगर अगर वजन घटाने के लिए कीटो डाइट ले रहे हैं तो अधिक कार्बोहाइड्रेट वाली दालें और छोले, राजमा जैसे बीन्स  के साथ-साथ मीठे फलों को हटाना जरूरी हो जाता है। वहीं भारतीय बाजारों में ब्रोकोली और ऐवोकेडो कम ही मिलता है। ऐसे में शाकाहारी के लिए कम ही विकल्प बचते हैं जैसे  सब्जियां और कुछ फल, कुछ दालें, कुछ अनाज। शुचि के मुताबिक, वजन कम करने वाले शाकाहारी लोगों के लिए ऊपर लिखी चीजों को डाइट से हटाने के बाद सिर्फ हवा ही बचती है और हां प्रदूषण भी। पानी पिया जा सकता है लेकिन सादा क्योंकि नारियल पानी में कैलोरी होती है, जिसके कारण वजन कम करना मुश्किल हो सकता है।

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कैसे कम किया जा सकता है वजन

वजन कम करने के लिए इन सब चीजों को हटाकर जीवन को स्वस्थ बनाया जा सकता है। मीठा बंद करने के साथ-साथ अगर आप पिज्जा, बर्गर, टिक्की, पकौड़े, नान, छोला-कुलचा, चावल, दूध, घी सब बंद कर आप खुद को 2 महीने के भीतर ही काफी हल्का पा सकते हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या आप हमेशा के लिए इस जीवनशैली को फॉलो कर सकते हैं और क्या यह आपके लिए वाकई में फायदेमंद है?

sweet food

क्या है न्यूट्रिशन एक्सपर्ट शुचि की सलाह

शुचि का कहना है कि मेरी सलाह में खाना संतुलित होना चाहिए। शुचि कहती हैं कि आयुर्वेद के मुताबिक, 6 रस होते हैं, जिन्हें स्वाद भी कहा जाता है। ये छह रस हैं, मधुर, अम्ल, लवण, तिक्त, कटु, और कषाय। उनका कहना है कि हर व्यक्ति के भोजन में इन छह स्वादों का संतुलन जरूर होना चाहिए । आयुर्वेद के मुताबिक, ऐसा कहा जाता है कि ये सभी 6 रस, स्वाद के रूप में हर भोजन या फिर हर फूड में होते हैं लेकिन स्वतंत्र रूप में नहीं होते। शुचि के मुताबिक, यहां मधुर का मतलब उन पदार्थों से है जिनकी तासीर मधुर यानी की मीठी होती है। शुचि कहती हैं कि केला, आम, अंगूर जैसे फल मीठे होते हैं वहीं बादाम, अखरोठ, काजू मुनक्का आदि जैसे मेवे और शहद, गुड़ का स्वाद भी मीठा ही होता है। दूध और घी जैसे डेयरी उत्पाद का स्वाद भी मीठा ही होता है।

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क्या कहता है आयुर्वेद

आयुर्वेद के मुताबिक, प्राचीन काल में भोजन करने के बाद मीठा खाने का किसी प्रकार का कोई रिवाज नहीं था क्योंकि उनके भोजन में ही ये सभी 6 स्वाद हुआ करते थे। वहीं मिठाई का चलन केवल तीज त्यौहार, पूजा-पाठ या फिर मेहमानों के आने पर ही होता था। प्राचीन काल में मीठे के रूप में खासतौर पर हलवा, खीर, बर्फी का सेवन किया जाता था। वहीं ठंड के मौसम में गुड़- तिल के लड्डू, कसार के लड्डू, तिल, मूंगफली, लइया गुड़ के पाग का सेवन होता था। इसके साथ ही मिठाई बनाने के लिए सिर्फ गुड़ का इस्तेमाल किया जाता था। प्राचीन काल में बनाए जाने वाले इन व्यंजनों की सामग्री में ही कई खनिज, प्रोटीन होते थे यह पौष्टिक भी हुआ करते थे। आज के मुताबिक इनमें कैलोरी तो होती होगी लेकिन इनमें किसी प्रकार से केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया जाता था।

जबिक मौजूदा वक्त में मीठे की बात करें तो केक, पेस्ट्री, डोनट, तले हुए पकवान/मीठे, आइसक्रीम, चॉकलेट, कैंडी एडड शुगर से भरे होते हैं इनमें तरह-तरह के केमिकल का प्रयोग किया जाता है। जो न सिर्फ हमारे स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं बल्कि हमें बीमार और कई जानलेवा रोगों का शिकार भी बनाते हैं। कम कैलोरी देने या फिर शुगर फ्री होने के नाम पर इनमें एडड शुगर का इस्तेमाल किया जाता है, जो हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है। मौजूदा वक्त में दूध और दूध से बनी चीजों से बचते हैं क्योंकि इनमें आर्टिफिशियल शुगर का इस्तेमाल किया जाता है।

एक्सपर्ट ने दिया उदाहरण

शुचि कहती हैं कि बाजार में ताजी दूध की क्रीम का विकल्प मौजूद है और जब उसकी सामग्री पढ़ेंगे तो उसमें कॉर्न सिरप, हाई फ्रुक्टोस शुगर, हाइड्रोजिनेटेड वेजिटेबल ऑयल लिखा हुआ पाएंगे। ये सभी हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत नुकसानदेह है। अब इनका लेबल पढ़ते हैं तो देखेंगे कि मीठे के नाम पर हम कितने केमिकल को रोजाना खा रहे हैं। बाजार में बिकने वाले ऐसे तमाम फूड हैं, जो हमारे लिए 'मीठे जहर' से कम नहीं है। शुचि के मुताबिक, मौजूदा वक्त में खाना ही बहुत गड़बड़ है। उस पर शारीरिक श्रम न करना किसी विपदा से कम नहीं है। अगर आप मीठा खाना बंद भी कर देते हैं तो भी फ्रेंच फ्रायज, पिज्जा, बर्गर, कचौड़ी, समोसे जैसे फूड आपको बीमार बनाने में पीछे नहीं रहेंगे। इसलिए खाना खाने के बाद मौजूदा हालात में कुछ मीठा खाने से बचें और मीठा खाना ही है तो केमिकल वाले फूड से दूरी जरूर बनाएं।

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