बारिश बढ़ा सकती है बच्चों में डायरिया का खतरा, एक्सपर्ट से जानें कारण, लक्षण और इलाज

बारिश के दिनों में आस-पास पानी जमने से वायरल, बैक्टीरियल और पैरासिटिक इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में बच्चों को डायरिया हो सकता है। 

Pallavi Kumari
Written by: Pallavi KumariPublished at: Sep 07, 2021Updated at: Sep 07, 2021
बारिश बढ़ा सकती है बच्चों में डायरिया का खतरा, एक्सपर्ट से जानें कारण, लक्षण और इलाज

बच्चों में डायरिया की बीमारी ( Diarrhoea in Children) उतनी ही खतरनाक है जितना की बड़ों के लिए। बारिश के मौसम में ये परेशानी और बढ़ जाती है।  एक्यूट डायरिया आमतौर पर संक्रमण के कारण होता है जो वायरल, बैक्टीरियल या यहां तक कि किसी परजीवी (पैरासाइट) भी हो सकता है। लगभग हमेशा ये भोजन और पानी के माध्यम से संचरित होता है। बरसात के मौसम में रोगाणु अधिक आसानी से और तेजी से बढ़ते हैं। इसलिए इन महीनों में अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। ऐसे में हमें बच्चों में एक्यूट डायरिया (Acute Diarrhoea in Children) के कारणों, लक्षणों और उपचारों के बारे में जानना चाहिए। इसी बारे में हमने डॉ. कृष्ण चुघ (Dr. Krishan Chugh), प्रधान निदेशक और विभागाध्यक्ष, बाल रोग, फोर्टिस गुड़गांव से बात की। तो, आइए विस्तार से समझते हैं इस बीमारी के बारे में।

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बच्चों में डायरिया का कारण-Causes of diarrhoea

एक्यूट डायरिया का सबसे आम कारण वायरल इंफेक्शन है। अन्य कारणों में जीवाणु संक्रमण, एंटीबायोटिक दवाओं के दुष्प्रभाव और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल (जीआई) प्रणाली से संबंधित संक्रमण शामिल नहीं हैं। इसके अलावा, दस्त के कई कम सामान्य कारण हैं।

1. वायरल इंफेक्शन

वायरल इंफेक्शन बच्चों में दस्त का कारण है और यह आमतौर पर बारिश और सर्दियों के महीनों में देखा जाता है, हालांकि यह साल भर हो सकता है। वायरल संक्रमण के लक्षणों में बुखार 38 डिग्री सेल्सियस या 100.4 डिग्री फ़ारेनहाइट से अधिक तापमान का होता है। और इस दौरान बच्चों में कई लक्षण नजर आते हैं। जैसे कि

  • - पानी से भरा दस्त
  • - उल्टी
  • - पेट में ऐंठन
  • -भूख न लगना
  • - सिरदर्द और मांसपेशियों में दर्द आदि।

वायरल संक्रमण आमतौर पर एक्सपोजर के 12 घंटे से 5 दिन बाद शुरू होता है और तीन से सात दिनों के भीतर ठीक हो जाता है।  वायरल संक्रमण से दस्त से पीड़ित बच्चों का सबसे अच्छा इलाज है आयु-उपयुक्त आहार, फैट और पानी से भरपूर खाद्य पदार्थ। उल्टी नोरोवायरस के कारण होने वाले गैस्ट्रोएंटेराइटिस की प्रमुख विशेषता है, और उल्टी को रोकने के लिए दवाएं मौखिक रूप से दी जाती हैं। 

2. बैक्टीरियल इन्फेक्शन

बैक्टीरियल इन्फेक्शन को कभी-कभी वायरल इन्फेक्शन से अलग करना मुश्किल होता है। बैक्टीरियल संक्रमण उन जगहों पर अधिक होता है जहां पीने का पानी गंदा या असुरक्षित होता है। या फिर सीवेज का खराब प्रबंधन होता है। इसमें बच्चे को लगातार तेज बुखार और दस्त जिसमें बलगम निकल सकता है। बैक्टीरियल संक्रमण वाले अधिकांश बच्चों को एंटीबायोटिक दवाओं की आवश्यकता नहीं होती है अगर मामला गंभीर नहीं है तो। और सहायक उपायों के साथ सुधार होता है। हालांकि, कुछ स्थितियों में उपचार आवश्यक हो सकती है।

3. पैरासिटिक इंफेक्शन 

उन स्थानों पर पैरासिटिक इंफेक्शन (परजीवी संक्रमण) अधिक आम है जहां पीने का पानी असुरक्षित है और सीवेज का खराब प्रबंधन है। ये ज्यादातर उन बच्चों को होता है  जिन्होंने हाल ही में दूषित पानी का सेवन किया हो। परजीवी संक्रमण से दस्त हफ्तों से लेकर महीनों तक रह सकता है। 

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बच्चों में डायरिया के लक्षण-Diarrhoea symptoms

दस्त के लक्षण दस्त मूत्र और पेट में दर्द हैं। अक्सर ये उल्टी और बुखार के साथ होते हैं। जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, बच्चा सुस्त हो सकता है और भोजन लेना बंद कर सकता है। डिहाइड्रेशन और सेप्सिस दो सबसे खतरनाक जटिलताएं हैं। इसके अलावा कुछ लक्षणों को माता-पिता को गंभीरता से लेना चाहिए। जैसे कि 

  • -जीभ सूखने लगना
  • -कम पेशाब करना
  • -मल के साथ खून
  • -तेज बुखार

दरअसल, बच्चे की जीभ का सूखना और पेशाब का कम हो जाना डिहाइड्रेशन के लक्षण हैं, जो कि गंभीर होने पर बच्चों के लिए जानलेवा भी हो सकता है। ये तमाम स्थितियां एक नजर आने लगे तो बच्चों को तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं। 

बच्चों में डायरिया का उपचार- Acute Diarrhoea Treatment in hindi

दस्त के लिए सबसे सही उपचार है बच्चों के शरीर में हाइड्रेशन बनाए रखना। साथ ही बच्चे के शरीर की द्रव स्थिति और सोडियम, पोटेशियम और बाइकार्बोनेट संतुलन को बहाल करना है। इसे बच्चे को बार-बार ओआरएस (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन) देकर आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। यहां सावधानी बरतने की बात ये है ओआरएस एक दवा है जिसे सावधानी से दिया जाना चाहिए। बाजार में अलग-अलग मिश्रण के ओआरएस घोल उपलब्ध हैं, लेकिन केवल उन्हीं का उपयोग किया जाना चाहिए जिनमें डब्ल्यूएचओ द्वारा अनुशंसित घटक हों। अन्य समाधान जो डब्ल्यूएचओ के फार्मूले के अनुरूप नहीं हैं, वास्तव में दस्त को और खराब कर सकते हैं। हालांकि, टेट्रा पैक में उपलब्ध फ्लेवर्ड डब्ल्यूएचओ फॉर्मूला का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा 

-अगर बच्चे को बुखार है तो पैरासिटामोल और उल्टी बंद करने वाली दवा दी जा सकती है।  

-बहुत छोटे शिशुओं जिन्हें दस्त में खून आ रहा हो और सेप्सिस जैसी जटिलताओं की उपस्थिति को छोड़कर आमतौर पर एंटीबायोटिक्स की सिफारिश नहीं की जाती है। उन्हें केवल डॉक्टर की प्रत्यक्ष देखरेख में ही ये दिया जाना है। इस दौरान अस्पताल में भर्ती बच्चों में ही उनकी आवश्यकता होती है। 

-प्रोबायोटिक्स आमतौर पर बच्चों में दस्त के लिए निर्धारित हैं लेकिन उनका लाभ सीमित है। कुछ दवाएं जैसे इमोडियम जो वयस्कों को दस्त के लिए अस्थायी रूप से मल उत्पादन को कम करने के लिए दी जाती हैं, बच्चों के लिए खतरनाक हो सकती हैं और इन्हें कभी भी इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

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दस्त के दौरान घरेलू देखभाल

घर पर दस्त से पीड़ित बच्चों की देखभाल में आप कुछ खास टिप्स की मदद ले सकते हैं। जैसे कि 

  • -दस्त से पीड़ित बच्चों को लिक्विड डाइट दें। 
  • -ओआरएस का घोल दें।
  • -दाल का पानी दें।
  • -केला, चावल, दही और सेब की चटनी बना कर दें। 
  • -जो बच्चे डिहाइड्रेटेड नहीं हैं उन्हें नियमित आहार खाना जारी रखना चाहिए।
  • -स्तनपान कराने वाले शिशुओं को स्तनपान करवाते रहें। 

डायरिया से पीड़ित अधिकांश बच्चे गाय के दूध से बने उत्पादों को ले सकते हैं अलग उन्हें कोई दिक्कत महसूस ना हो रही हो तो। अनुशंसित खाद्य पदार्थों में जटिल कार्बोहाइड्रेट जैसे चावल, गेहूं, आलू, ब्रेड, लीन मीट, दही, फल और सब्जियों को खाया जा सकता है। दस्त के दौरान बच्चों को कोई भी ऑयली या भारी भरकम फूड्स ना दें। साथ ही ज्यादा शुगर वाले बाहरी फ्रूट जूस देने से भी बचें। हालांकि, दस्त के बहुत कम मामलों में अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता हो सकती है। पर अगर बच्चे को लगातार दस्त हो या कमजोरी बढ़ जाए और बुखार तेज हो तो उसे जल्द से जल्द डॉक्टर के पास ले जाएं क्योंकि उसे आपातकालीन चिकित्सा देखभाल की जरूरत हो सकती है। 

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