बच्चे ही नहीं बड़ों को भी हो सकता है कान में गंभीर इंफेक्शन, जानें इयर इंफेक्शन के 7 प्रकार और उनके लक्षण

अक्सर हमें लगता है कि काम में इंफेक्शन गंदगी और साफ-सफाई की कमी के कारण होता है। जबकि इसके कई कारण हैं और इंफेक्शन के कई प्रकार भी। 

Pallavi Kumari
Written by: Pallavi KumariPublished at: Apr 16, 2021Updated at: Apr 16, 2021
बच्चे ही नहीं बड़ों को भी हो सकता है कान में गंभीर इंफेक्शन, जानें इयर इंफेक्शन के 7 प्रकार और उनके लक्षण

 कान का संक्रमण (ear infections)आमतौर पर बच्चों को ज्यादा होता है। पर इसका मतलब ये नहीं है कि ये बड़ों को नहीं होगा। दरअसल, कान का संक्रमण बैक्टीरिया और वायरल इंफेक्शन के कारण ज्यादा होता है। ये कान में कहीं भी हो सकता है, यानी कि कान के अंदर भी हो सकता है और काम के बाहरी हिस्सों में भी हो सकता है।  यह संक्रमण सूजन और कान के आंतरिक स्थानों के भीतर तरल पदार्थ के निर्माण का कारण बनता है। पर क्या आप जानते हैं कि काम का इंफेक्शन (types of ear infections)कितने प्रकार का होता है। इस बारे में हमने डॉ. अभिजीत सिंह, कान, नाक, गला विशेषज्ञ (Ent Specialist) से बात की , जो कि इंडियन आर्मी के रिटायर्ड डॉक्टर हैं।  डॉ. अभिजीत सिंह बताते हैं कि लोगों में हमेशा से ही कान के स्वास्थ्य को लेकर इतनी जागरूकता नहीं रही है, जब तक कि उन्हें कान से जुड़ी कोई गंभीर परेशानी न हो। तो, आइए विस्तार से समझते हैं कान के इंफेक्शन को और इनके प्रकारों को।

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कान में संक्रमण (Ear Infections)

डॉ. अभिजीत बताते हैं कि कान में इंफेक्शन की बात आने पर आमतौर पर काम के मीडिल पार्ट पर बात करते हैं। इसे ओटिटिस मीडिया या मध्य कान में अचानक संक्रमण के रूप में जाना जाता है। किसी को भी कान का संक्रमण हो सकता है, चाहे वो बच्चे हो या बूढ़ें। कई मामलों में, कान का संक्रमण अपने आप ही सही हो जाता है। पर अगर कान से पस या पानी बह रहा है, तो ये गंभीर संक्रमण हो सकता है। ऐसे में एंटीबायोटिक और कान की सफाई करके इस तरह के इंफेक्शन का इलाज किया जाता है।

कान के संक्रमण के प्रकार (Types of ear infections)

दरअसल, कान के तीन भाग होते हैं, बाहरी कान (outer ear), मध्य कान (middle ear) और आंतरिक कान (inner ear)। इन तीन भागों में से कोई भी बैक्टीरिया (bacterial infection in ear),फंगस (fungal infection in ear) या वायरस (viral infection in ear)से संक्रमित हो सकता है। बच्चे विशेष रूप से मध्य कान के संक्रमण ओटिटिस मीडिया (otitis media)से ग्रस्त होते हैं, पर बड़ों में भी कान से जुड़ी कई परेशानियां होती हैं, जो कि हल्के से लेकर गंभीर हो सकते हैं। इसके अलावा कान में संक्रमण के कई और कारण भी हैं, जिनमें शामिल हैं-

  • -आयु (Age): 3 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में कान के संक्रमण की आशंका अधिक होती है।
  • -पारिवारिक इतिहास (hereditary): जिन बच्चों के माता-पिता को बार-बार कान में संक्रमण होता है उनमें इसका खतरा अधिक होता है।
  • -एलर्जी और जुकाम (Cold and Flu): बहुत अधिक बार कान में संक्रमण होने से भी नाक में संक्रमण हो सकता है।
  • -जन्म दोष और चिकित्सा की स्थिति:  कई बार अंतर्निहित चिकित्सा स्थितियों जैसे कि प्रतिरक्षा की कमी या क्रानियोफेशियल विसंगतियों से भी कान के संक्रमण अधिक होते हैं, इसके अलावा कमजोर इम्यूनिटी वाले बच्चों में भी कान का संक्रमण अधिक होने का खतरा रहता है।  

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कान के संक्रमण के प्रकार (Types of ear infections)

1. ओटिटिस एक्सट्रेना (otitis externa)

ओटिटिस एक्सट्रेना में एयर ड्रम औप बाहरी कानों के बीच संक्रमण और सूजन होता है। ओटिटिस एक्सट्रेना एक ऐसी स्थिति है जिसमें बाहरी कान में रेडनेस और सूजन हो जाती है। इसी को अक्सर स्विमिर्स इयर  (swimmer's ear) के रूप में जाना जाता है क्योंकि बार-बार पानी के संपर्क में आने से कान के अंदर सूजन हो जाता है। हालांकि, इसके अधिकांश मामले में बैक्टीरियल इंफेक्शन सबसे बड़ा कारण होता है, जिसमें कानों में जलन, फंगल संक्रमण और एलर्जी आदि हो जाती है। ये कान के अंदर की त्वचा को नुकसान पहुंचाता है। ओटिटिस एक्सट्रेना के लक्षणों में शामिल हैं:

  • -कान दर्द, जो गंभीर हो सकता है
  • -कान के अंदर खुजली
  • -कान में तरल पदार्थ या मवाद का बनना

ऐसा होने पर डॉक्टर को दिखाएं और इसका उपचार करवाएं।  हालांकि, कुछ मामले कई महीनों या उससे अधिक समय तक रह सकता है।

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2. ओटिटिस मीडिया (otitis media acute or chronic)

इसमें कानों के मध्य में वायरल इंफेक्शन या बैक्टीरियल इंफेक्शन हो जाता है।ओटिटिस मीडिया मध्य कान की सूजन संबंधी बीमारियों का एक समूह है। दो मुख्य प्रकारों में से एक तीव्र ओटिटिस मीडिया (एओएम) है, तेजी से शुरुआत का एक संक्रमण जो आमतौर पर कान दर्द के रूप में सामने आता है। छोटे बच्चों में यह कान में खींचने, ज्यादा, और खराब नींद के कारण हो सकता है। इसमें कान में फंसा हुआ तरल पदार्थ कान को अंदर से और संक्रमित कर देता है। इसके लक्षणों की बात करें, तो इसमें व्यक्ति को

  • -एलर्जी
  • -जुकाम
  • -फ्लू
  • - साइनस संक्रमण और कानों में तेज दर्द महसूस हो सकता है।

3. सीरस ओटिटिस मीडिया (serous otitis media)

 इसमें कानों के बीच में पस या मवाद भर जाता है। सीरस ओटिटिस मीडिया (एसओएम), जिसे ओटिटिस मीडिया भी कहा जाता है, एक ऐसी स्थिति है जिसमें द्रव मध्य कान में रहता है। "सीरस" का मतलब उस तरल पदार्थ के प्रकार से है जो मध्य कान के अंदर एकत्रित होता है। इस कान के संक्रमण से ईयरड्रम का आकार बदल जाएगा, जिससे कान बाहर की तरफ उभर जाता है। इसके लक्षणों में आपको अंतर भी दिख सकते हैं। इसमें कान के संक्रमण के चलते बुखार हो सकता है। इसके अलावा दर्द का स्तर भी ज्यादा हो सकता है। 

4. संक्रामक मेरिंगिटिस (infectious myringitis)

संक्रामक मायरिन्जाइटिस उन्हीं वायरस या बैक्टीरिया के कारण होता है जो मध्य कान के संक्रमण का कारण होते हैं। इनमें से सबसे आम माइकोप्लाज्मा है। यह अक्सर आम सर्दी या फ्लू होने पर बढ़ जाता है। ये अन्य समान संक्रमणों के साथ पाया जाता है। यह स्थिति बच्चों में सबसे अधिक देखी जाती है, लेकिन यह वयस्कों में भी हो सकती है  इसमें कानों में छोटे-छोटे दाने और सूजन हो जाता है।

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5.  एक्यूट मेसटोइडिटिस (acute mastoiditis)

 इसमें कान बहने के साथ तेज दर्द और बुखार  होता है। मास्टोइडाइटिस (तीव्र और जीर्ण) मस्टॉयड की हड्डी में मस्टॉयड कोशिकाओं का एक जीवाणु संक्रमण है, जो कान के ठीक पीछे स्थित है। मास्टॉइडाइटिस गंभीर हो सकता है अगर संक्रमण मास्टॉयड हड्डी के बाहर फैलता है। वहीं, क्रोनिक मास्टोइडाइटिस  के लक्षणों में शामिल हैं, कान में या पीछे दर्द। इसमें व्यक्ति के कान में  रेडनेस, सूजन के साथ तेज दर्द भी होता है। ज्यादा गंभीर होने पर बुखार, चिड़चिड़ापन और थकान भी होता है। साथ ही इसमें आपको लगातार सिर दर्द भी रहता है और ज्यादा होने पर सुनने में दिक्कत हो सकती है। 

6. वेस्टिबुलर न्यूरोनिटिस (vestibular neuronitis)

इसमें कानों के वेस्टिबुलर सिस्टम में इंफेक्शन हो जाता है। वेस्टिबुलर न्यूरिटिस एक ऐसी स्थिति है जो लगातार सिर दर्द और चक्कर आने का कारण भी बनती है। यह आपके वेस्टिबुलर तंत्रिका, कान में एक तंत्रिका की सूजन के परिणामस्वरूप होता है जो आपके मस्तिष्क को संतुलन के बारे में जानकारी भेजता है। जब इसमें कान में सूजन आ जाता है, तो यह जानकारी ठीक से संप्रेषित नहीं होती है, जिससे आप भटकाव महसूस करते हैं। वेस्टिबुलर न्यूरिटिस में आमतौर पर कुछ दिनों के बाद सुधार होता है। हालांकि, लक्षणों को कम होने में लगभग तीन सप्ताह लग सकते हैं। आपको कई महीनों तक चक्कर आना और सिर दर्द रह सकता है। 

7. हर्पीस जोस्टर (herpes zoster of the ear)

हर्पीस जोस्टर यानी शिंगल्स एक ऐसी बीमारी है, जिसमें हमारी कानों की त्वचा पर पानी भरे हुए छोटे-छोटे दाने निकल आते हैं। ये वायरस के कारण होता, जो त्वचा पर दर्दयुक्त घाव उत्पन्न करता है। इस बीमारी के होने पर रोगी के कान के एक तरफ की त्वचा पर पानी वाले दाने निकलते हैं। इस वजह से रोगी को त्वचा में खुजली या दर्द या जलन या सुन्नपन या झनझनाहट की परेशानी होती है। इतना ही नहीं, जिस जगह ये दाने निकलते हैं, वहां की त्वचा बेहद संवेदनशील हो जाती है और उसे छूने पर दर्द होता है। इसका इलाज डॉक्टर के द्वारा ही संभव है। 

तो, कान से जुड़ी इस तरह के किसी भी इंफेक्शन को नजरअंदाज न करें और तुरंत ही अपने डॉक्टर को दिखा कर इसका इलाज करवाएं। इसके अलावा कोशिश करें कि काम को इंफेक्शन से बचाने के लिए नहाते समय कान में पानी न जाने दें और नियमित रूप से कान की साफ-सफाई का ध्यान रखें। 

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