क्या आपका बच्चा आपसे बातें छिपाता है? ये 4 खामियां पैदा कर सकती हैं आपके और उनके के बीच गलतफहमियां

आप अपने बच्चे के पहले शिक्षक और पहले रोल-मॉडल हैं। इसलिए अपना व्यवहार आपके बच्चे के व्यवहार को प्रभावित कर सकता है।

Pallavi Kumari
Written by: Pallavi KumariUpdated at: Feb 27, 2020 15:38 IST
क्या आपका बच्चा आपसे बातें छिपाता है? ये 4 खामियां पैदा कर सकती हैं आपके और उनके के बीच गलतफहमियां

एक आदर्श माता-पिता जैसी कोई चीज नहीं है और एक मां-बाप होने के नाते आपको अपने बच्चे को हमेशा समझने की कोशिश करनी होगी। आज माता-पिता के पास इतना भी वक्त नहीं होता कि वो अपने बच्चे से बैठकर बात कर सके और उन्हें समझें। आज कि स्थिति में जहां मानसिक बीमारियां या सामाजिक परिवर्तन लोगों को परेशान कर देती है, वहां बच्चों को अपने माता-पिता के साथ हर बात शेयर करने की कोशिश करनी चाहिए। पर प्रश्न ये उठता है कि आपका बच्चा आपसे अपनी बात शेयर करने से क्यों डरता है। आपकी ऐसा कौन सी बात है या कौन सा डर है, जो बच्चों को आपसे अपनी बातों को बांटने और बताने से रोकते हैं। कहीं एक माता-पिता के रूप में आपकी ही तो गलती नहीं? आज हम आपको आपकी उन्हीं छोटी-छोटी आदतों से मिलवाएंगे जिसके कारण आपका बच्चा, आपसे दूर हो रहा है।

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अत्यधिक अनुशासन और नियमों का दबाव

बहुत सारे माता-पिता इस अवधारणा में विश्वास करते हैं कि जितना अधिक आप अपने बच्चे को फटकारते हैं, उतना ही अनुशासित और अच्छा व्यवहार करेगा। अपने बच्चों को अनुशासित करते हुए पालन-पोषण का एक बहुत ही महत्वपूर्ण पहलू है, लेकिन ये वास्तव में आपके बच्चे के आत्मविश्वास के स्तर को गिरा भी सकता है। दरअसल ये करते वक्त आपको एहसास भी नहीं होगा कि आपके बच्चे के लिए आपका अनुशान कब हद से ज्यादा हो गया। ऐसे में अनुशासन तोड़ने और नियमों के दबाव के कारण वो आपके बातें छुपाने लगेगा। पहले वो छोटी-छोटी बातें छिपाएगा और फिर ये बातें कब बड़ूी हो जाएंगी आपको मालूम भी नहीं होगा। इसलिए अपने बच्चों को कभी -कभी मौज मस्ती और कुछ मनमर्जियां भी करने दें। इससे उनका आप पर विश्वास बढ़ेगा और वो अपनी बात आपसे कहेंगे।

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हमेशा ओवर रिएक्ट करना

माता-पिता के रूप में, हम चाहते हैं कि हमारे बच्चे सुरक्षित और स्वस्थ रहें, पर ये भी जानना महत्वपूर्ण है कि आपकी ये रेखा कहां तक आपको खींचनी चाहिए। जब आप अपने बच्चों को ओवरप्रोटेक्ट करना शुरू करते हैं, तो आप वास्तव में उन्हें जीवन में अधिक असफलता के लिए स्थापित करते हैं। आपके व्यवहार को न केवल प्रतिबंधात्मक और हस्तक्षेप के रूप में देखा जाएगा, बल्कि यह उन्हें बाद में जीवन में किसी भी प्रकार के जोखिम और चुनौतियां लेने से भी रोक सकता है। वहीं जब वो जीवन में बड़ेृ-बड़े जोखिमों का सामना करेंगे, तो वो ये अकेले करेंगे और आपसे जीवन के किसी भी ऐसे फैसले पर बात करने से बचेंगे। इसलिए बच्चों के बड़े होने के साथ उनके दोस्त बने और हर बात रक ओवर रिएक्ट न करें।

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दूसरों से तुलना करना और हमेशा लोगों के सामने ही उन्हें डांटना

जब आप अपने बच्चे की उसके भाई-बहनों या दोस्तों से तुलना करना शुरू करते हैं, तो आप मूल रूप से उसे बता रहे हैं कि आप सही नहीं कर रहे हैं। अपने बच्चों को दूसरे के सकारात्मक व्यवहार का अनुकरण करने के लिए कहने के बजाय, उनके व्यक्तित्व के हिसाब से काम करने की आजादी दें।कुछ भी इससे ज्यादा आपके बच्चे के आत्मविश्वास और आत्म-सम्मान को चोट नहीं पहुंचाता है, जितना कि उन्हें लोगों के सामने डांटने से चोट पहुंचती है। जब आप अपने बच्चे को फटकारते हैं या दूसरों के आस-पास होने पर एक तेज आवाज का उपयोग करते हैं, तो आपका बच्चा आपसे दूर होने लगता है। ऐसे में वे आप पर अपना भरोसा भी खो सकते हैं।

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बिना बच्चे की बात सुनें फैसला सुनाने की आदत

बच्चों के लिए यह शिकायत करना असामान्य नहीं है कि वे अपने माता-पिता के साथ सब कुछ साझा नहीं करते हैं, क्योंकि वे अंत में चिल्लाते हुए समाप्त हो जाते हैं। जब हम निश्चित रूप से यह प्रचारित नहीं कर रहे हैं कि माता-पिता और बच्चों को सबसे अच्छे दोस्त बनना चाहिए, तो यह बहुत जरूरी है कि आप अपने बच्चों के साथ बात करें, बजाय कुछ भी फैसला सुनाने के। जब आप अपने बच्चे के स्पष्टीकरण और दलीलों को सुनना नहीं पसंद नहीं करते और सिर्फ चिल्लाना या ऊंची आवाज में बस फैसला सुनाना जानते हैं, तो आप अपने बच्चे को अपनी इस आदत से दूर कर रहे होते हैं।

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