टीनएज बच्चों की परवरिश में इन बातों का ध्यान रखकर उनके 'अच्छे दोस्त' बन सकते हैं मां-बाप

टीनएज में बच्चों के स्वभाव और नजरिए में एक विरोधाभास पैदा होने लगता है, जो मां-बाप और बच्चे के रिश्ते को प्रभावित करता है। जानें उसे ठीक करने के तरीके

Anurag Anubhav
Written by: Anurag AnubhavUpdated at: Feb 20, 2020 13:18 IST
टीनएज बच्चों की परवरिश में इन बातों का ध्यान रखकर उनके 'अच्छे दोस्त' बन सकते हैं मां-बाप

जब टीनएज बच्चे कोई गलती करते हैं, तो घर-परिवार और समाज के लोग अक्सर उनके मां-बाप की परवरिश पर सवाल उठाते हैं। ऐसा माना जाता है कि अगर बच्चे की परवरिश सही तरीके से की जाए, तो वो जीवन में सफलता प्राप्त कर सकते हैं और अच्छा जीवन जी सकते हैं। हर मां-बाप चाहते हैं कि वो अपने बच्चे की परवरिश में कोई कसर न छोड़ें ताकि आगे चलकर उनका बच्चा जीवन के संघर्षों में अपने आप को संभाल सके और सफलता प्राप्त कर सके।

टीनएज यानी किशोरावस्था में अक्सर बच्चे मां-बाप से थोड़ा-थोड़ा सा कटने लगते हैं और दोस्तों के प्रभाव में ज्यादा आने लगते हैं। टीनएज बच्चों को अक्सर मां-बाप की सलाह गलत लगती है क्योंकि इस समय तक उनमें चीजों को अपने स्वतंत्र नजरिये से देखने की समझ पैदा हो जाती है। मगर यदि पेरेंट्स कुछ बातों का ध्यान रखें तो वे टीनएज बच्चों के अच्छे दोस्त बन सकते हैं और युवावस्था के उनके शुरुआती संघर्षों में उनकी मदद कर सकते हैं।

डांटें या मारें नहीं

टीनएज में बच्चों के स्वभाव में अपने आप ही एक तरह की बगावत आ जाती है। इसलिए टीनएज में अगर बच्चे कोई गलती करते हैं, तो उन्हें डाटें या मारें नहीं। इस उम्र में डांट और मार का बच्चे की मानसिकता पर बुरा असर पड़ता है। अगर ऐसी कोई स्थिति आती है, तो उन्हें हमेशा प्यार से समझाने की कोशिश करें और अपने गुस्से को शांत रखें। कई बार आपका गलत समय या गलत जगह पर गुस्सा दिखाना भी बच्चे के मन में असंतोष बढ़ा सकता है, इसलिए बच्चों को समझाने के लिए सही समय का इंतजार करें।

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थोड़ी आजादी दें

आजादी का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि वो जो करना चाहें, आप उन्हें करने दें। मगर हां, अगर बच्चे कोई प्रयोग करना चाहते हैं या कुछ कंस्ट्रक्टिव करना चाहते हैं, तो आपको उसे थोड़ी आजादी देनी चाहिए। इसके अलावा इस उम्र में बच्चों के दोस्तों, गर्लफ्रैंड आदि के बारे में खुलकर बात करनी चाहिए, ताकि वो आपको अपनी बात बताते रहें। अगर आप उन्हें इन चीजों के लिए डाटेंगे या झिड़केंगे, तो वो आपसे झूठ बोलना शुरू कर देंगे। अगर मां-बाप आजाद ख्याल होते हैं, तो बच्चे उन्हें अपना दोस्त समझने लगते हैं।

साथ में थोड़ा समय बिताएं

टीनएज में बच्चों और पेरेंट्स के रिश्ते इसलिए खराब होते हैं क्योंकि दोनों एक दूसरे को समय नहीं देते हैं, जिसके कारण उनके बीच दूरियां बढ़ जाती हैं। टीनएज में बच्चों के अपने संघर्ष होते हैं, जिन्हें मां-बाप बांट तो नहीं सकते हैं, मगर उनसे इस बारे में बात करके उनकी चिंता और उलझन को कम कर सकते हैं। अक्सर इसी उम्र में बच्चे पढ़ाई, करियर, रिलेशनशिप, दोस्ती आदि को लेकर सीरियस होने शुरू होते हैं। मां-बाप अगर बच्चों के साथ हर रोज थोड़ा समय बिताएं और उन्हें सही गाइडेंस दें, तो बच्चे जल्द ही अपनी सभी परेशानियां मां-बाप से बताने लगेंगे।

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उनकी समस्याएं सुनें

टीनएज बच्चे अक्सर मां-बाप की बातों और फैसलों से इत्तेफाक नहीं रखते हैं, इसलिए मां-बाप उनकी बातें सुनना बंद कर देते हैं या डांट-डपटकर चुप करा देते हैं। मगर बच्चों का भरोसा जीतने के लिए जरूरी है कि आप उनकी समस्याओं को सुनें और फिर आपको जो सही लगे उस फैसले को प्यार से समझाएं। अगर आप बच्चे को बोलने नहीं देंगे या डांटकर चुप करा देंगे, तो बच्चे आपके पीठ पीछे गलत काम करेंगे या झूठ बोलकर आपका भरोसा तोड़ेंगे। इसलिए बच्चों को फैंडली बनाने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि आप हमेशा उनकी बातों पर ध्यान दें और लेक्चर देने के मूड में कम से कम आएं।

बच्चों का विश्वास जीतें

जो मां-बाप अपने बच्चों का विश्वास नहीं जीत पाते हैं, उनके बच्चे अपनी ज्यादातर समस्याएं या तो दोस्तों को बताने लगते हैं या स्वयं ही उसका हल खोजने की कोशिश करने लगते हैं, जिसमें कई बार उनसे गलतियां हो जाती हैं। पेरेंट्स को अपने बच्चे के साथ ऐसा रिश्ता मेनटेन करना चाहिए, जिससे कि बच्चा उनसे कुछ भी बताते हुए डरे या झिझके नहीं। इससे बच्चे अपने दिल की गहराई में छिपी हुई बातें भी मां-बाप से कहने में घबराएंगे नहीं।

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