प्रेग्नेंसी के दौरान ये 4 हेल्थ प्रॉब्लम्स बच्चे पर भी असर डाल सकती हैं

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jul 28, 2017
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Quick Bites

  • प्रेग्नेंसी में मां का असर बच्चे को होता है।
  • गर्भावस्था में हेल्थ प्रॉब्लम्स मां से बच्चे को भी हो सकती हैं।
  • जेस्टेशनल डायबिटीज़, एनीमिया, थाइरॉइड आदि बच्चे को भी हो सकता है।

कहते हैं कि प्रेग्नेंसी में महिला जितनी खुश रहती है, उसका बच्चा उतना स्वस्थ पैदा होता है। लेकिन बच्चे की सेहत के लिए सिर्फ खुश रहने से काम नहीं चलता, बल्कि रहन-सहन भी हेल्दी रखना ज़रूरी है। हेल्दी खाना, स्मोकिंग, अल्कोहल से दूर रहना, नियमित रूप से दवाई लेना, टेस्ट करवाना और डाक्टर की सलाह मानना प्रेग्नेंसी के दौरान बच्चे और मां को सुरक्षित रखता है। दरअसल, गर्भावस्था के दौरान, मां को डायबिटीज़, ओबेसिटी, थाइरॉइड और अन्य बीमारियां होने का रिस्क काफी होता है, जिसका असर बच्चे पर भी पड़ सकता है। यह प्रभाव शॉर्ट-टर्म भी हो सकता है, और लॉन्ग-टर्म भी। इसलिए ज़रूरी है कि मां अपने लाइफस्टाइल और ईटिंग हैबिट्स पर ख़ास ध्यान दे। ये हैं प्रेग्नेंसी के दौरान, मां को होने वाली कुछ बीमारियां, जिनका असर बच्चे पर भी पड़ सकता है।

प्रेग्नेंसी में अगर ज्यादा फैट लिया, तो हो सकता है इस 1 नइलाज बीमारी का खतरा

1- जेस्टेशनल डायबिटीज़

प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इस दौरान उन्हें कई बीमारियां लग जाती हैं, जिनका असर सीधे बच्चे पर होता है और जेस्टेशनल डायबिटीज़ उनमें से एक है। इससे बच्चे को सांस लेने में दिक्कत आ सकती है। सिर्फ यही नहीं, इसके चलते बच्चे को ओबेसिटी, टाइप 2 डायबिटीज़ या दिल से जुड़ी दिक्कतें भी हो सकती हैं।

2- एनीमिया

अगर रिसर्च की जाए तो अधिकतर महिलाओं में खून की कमी यानी एनीमिया की बीमारी दिखेगी। इसलिए प्रेग्नेंसी शुरू होते ही होने वाली मां को आयरन की दवाई हर रोज़ लेने को कहा जाता है, क्योंकि अगर मां के शरीर में खून की कमी होगी, तो इसका नेगेटिव प्रभाव बच्चे पर भी पड़ेगा। सिर्फ यही नहीं, अगर प्रेग्नेंसी के दौरान, महिला की रिपोर्ट में आयरन की कमी नज़र आती है, तो कई बच्चों का वज़न भी जन्म के दौरान कम होता है, या फिर कई केसिस में बच्चे प्री-मेच्योर पैदा होते हैं।

3- जेस्टेशनल हाइपरटेंशन

जेस्टेशनल हाइपरटेंशन का रिस्क प्रेग्नेंसी के 20वें हफ्ते में बहुत ज़्यादा होता है। इसी दौरान यह बीमारी डिवेलप होती है। इस बीमारी में न्यूट्रिएंट्स और ऑक्सीजन बच्चे को भरपूर मात्रा में नहीं मिल पाते। ऐसे में बच्चे का वज़न कम हो सकता है और लो ब्लड शुगर के चांस होते हैं। इससे और भी कई खतरनाक बीमारियां लग सकती हैं, इसलिए जेस्टेशनल हाइपरटेंशन को गंभीरता से लेना चाहिए।

4- मटर्नल ओबेसिटी

अगर प्रेग्नेंसी के दौरान महिला ओवरवेट है या उसे ओबेसिटी है, तो इसका असर बच्चे की ग्रोथ पर हो सकता है। ना ही सिर्फ बच्चे को डायिबिटीज़ और ओबेसिटी की दिक्कत हो सकती है, बल्कि बच्चा समय ये पहले यानी प्री-मेच्योर भी पैदा हो सकता है।

 

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