जानें क्‍या है हीमोफीलिया बी

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Mar 23, 2016
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Quick Bites

  • हीमोफीलिया एक सबसे पुराने जेनेटिक रक्तस्राव रोग में से एक है।
  • इस रोग में खून के थक्के बनने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है।
  • चोट लगने पर भी रोगी को काफी देर तक रक्तस्राव होता रहता है।
  • आधुनिक चिकित्सा हीमोफीलिया के उपचार में प्रभावी साबित हुई है।

हीमोफीलिया एक सबसे पुराने जेनेटिक रक्तस्राव रोग में से एक है। इस बीमारी में खून के थक्के बनने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। ऐसे में कोई छोटी चोट लगने पर भी रोगी को काफी देर तक रक्तस्राव होता रहता है। खासतौर हीमोफीलिया के रोगियों में घुटनों, टखनों और कोहनियों के अंदर होने वाला रक्तस्त्राव अंगों और ऊतकों को भारी नुकसान पहुंचाता है। एक समय पर बेहद खतरनाक माने जाने वाले इस रोग से पीड़ित रोगी आज लगभग सामान्य उम्र तक जीवन जी सकते हैं। हालांकि अभी पूरी तरह से इस रोग का उपचार संभव नहीं हुआ है, लेकिन आधुनिक चिकित्सा हीमोफीलिया के प्रभावी उपचार में काफी प्रभावी साबित हुई है।

 

Hemophilia B in Hindi

 

हीमोफीलिया के प्रकार

हीमोफीलिया को हीमोफीलिया ए व हीमोफीलिया बी दो वर्गों में वर्गीकृत किया गया है। हीमोफीलिया ए में फैक्टर-8 की मात्रा बहुत कम या शून्य हो जाती है। जबकि, हीमोफीलिया बी फैक्टर-9 के शून्य या बहुत कम होने पर होता है। लगभग 80 प्रतिशत हीमोफीलिया रोगी, हीमोफीलिया ए से पीड़ित होते हैं। सामान्य हीमोफीलिया के मामले में पीड़ित को कभी-कभी रक्तस्राव होता है, जबकि स्थिति गंभीर होने पर अचानक व लगातार रक्तस्त्राव हो सकता है।

हीमोफिलिया बी के कारण

हीमोफिलिया बी, एक आनुवंशिक रक्त विकार है। यह माता-पिता से बच्चों में आने वाले जीन में खराबी से होता है। अक्सर महिलाओं से पैदा होने वाले बच्चें में इस बीमारी के होने की संभावना अधिक होती है। लेकिन कभी-कभी यदि जन्म से पहले जीन में किसी प्रकार का बदलाव आ जाए (म्यूटेशन), तो ऐसी स्थिति में भी होने वाले बच्चें को हीमोफिलिया बी हो सकता है।


आज के समय में मेडिकल जेनेटिक्स के माध्यम से गर्भधारण से पहले ही इस बीमारी का पता लगाना भी संभव है। यदि आप एक कैरियर हैं, तो गर्भावस्था में यह पता लगाना भी संभव है कि आपके भ्रूण पर हीमोफीलिया का प्रभाव है या नहीं। हालांकि, इसमें भ्रूण को थोड़ा खतरा जरूर रहता है। ऐसे में मरीजों को अपने डॉक्टर से इस संबंध में बात करनी चाहिए और उचित कार्यवाही करनी चाहिए।



Image Source - Getty

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