अर्थराइटिस के प्रकार

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Dec 24, 2009
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Quick Bites

  • अनुवांशिक कारणों से भी हो सकता है अर्थराइटिस।
  • तीस वर्ष के युवाओं को भी सताने लगा है अर्थराइटिस।
  • अर्थराइटिस से बचने के लिए जीवनशैली में बदलाव जरूरी।
  • चोट के कारण भी बढ़ जाता है अर्थराइटिस का खतरा।

बुढ़ापे की बीमारी कहा जाने वाला आर्थराइटिस अब जवानी में ही लोगों को परेशान करने लगा है। आर्थराइटिस फाउंडेशन ऑफ इंडिया की लखनऊ शाखा के आंकड़ों के मुताबिक यह बीमारी 30 साल के युवाओं को भी हो रही है। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे लोगों को तुरंत इलाज या एहतियातन कदम उठाने चाहिए।

बदलती लाइफ स्टाइल के चलते कम उम्र के लोगों को आर्थराइटिस की समस्या घेर रही है। आर्थराइटिस के मरीजों में बीस फीसदी लोग तीस साल तक की उम्र के होते हैं। जेनेटिक कारणों से होने वाली ऑस्टियोअर्थराइटिस के मरीजों में बदलती लाइफ स्टाइल मायने नहीं रखती है। ऐसे मरीजों को कमजोर होने वाली हड्डियों का ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।

arthritis

आर्थराइटिस के प्रकार


आर्थराइटिस के कई प्रकार होते हैं, इनमें से सबसे आम है आस्टियोआर्थराइटिस और रयूमेटायड आर्थराइटिस।

आस्टियोआर्थराइटिस सबसे आम प्रकार का आर्थराइटिस है। यह उम्र के साथ होता है और उंगलियां, कूल्हों और घुटनों को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है। कभी-कभी आस्टियोआर्थराइटिस जोड़ों में चोट लगने कि वजह से भी हो जाता है जैसे किसी खिलाडी को फुटबाल खेलते वक्त घुटने में चोट लग जाए या कोई कार दुर्घटना में गिर जाए। तो साल दर साल उसके घुटने में सुधार आता रहता है और उसके घुटनों में आर्थराइटिस हो सकता है।


रयूमेटाइड आर्थराइटिस, तब होता है जब हमारे शरीर का प्रतिरक्षा तन्त्र ढंग से काम नहीं करता है यह जोड़ और हड्डियों को प्रभावित करता है तथा आंतरिक अंग तथा तन्त्रों को भी प्रभावित कर सकता है। आपको थकान तथा बुखार हो सकता है।

दूसरे आम प्रकार का आर्थराइटिस है गाउट, जो कि जोडो़ में फैट के जमा होने से होती है। यह पैर की सबसे बड़ी उंगली को प्रभावित करती है लेकिन कई दूसरे जोड़ भी प्रभावित होते सकते है।

आर्थराइटिस कई और बीमारियों में भी देखने को मिल सकता है। जैसे ल्यूपस जिसमें कि शरीर के प्रतिरक्षा तन्त्र जोड़, हृदय, त्वचा, गुर्दे तथा अन्य अंगों को नुकसान पहुंचता है।
एक संक्रमण जो कि जोड़ों में घुस कर हड्डियों के बीच के भाग को नष्ट कर देता है।

 

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आर्थराइटिस के बड़े कारण

आमतौर पर आर्थराइटिस के लिए मोटापे को दोषी ठहराया जाता है। लेकिन इसके और भी कई कारण हैं। औरतों में एस्ट्रोजन की कमी और थाइराइड का विकार भी इसका एक बड़ा कारण है। स्किन या ब्लड डिजीज जैसे लुकेमिया के कारण भी यह बीमारी होती है। टाइफायड या पैराटाइफायड के बाद भी जोड़ों में दर्द की‌ शिकायत रहती है जो लगातार बनी रहे तो आर्थराइटिस बन जाती है। डाक्टर कहते हैं कि आंतों को संक्रमित करने वाली कीटान्‍ु रिजॉक्स भी जोड़ों में तकलीफ पैदा करते हैं जिससे आर्थराइटिस होता है। अगर आपके बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता कम है तो वो भी आर्थराइटिस का शिकार हो सकता है।


कैसे पहचानें

क्या आपको सुबह उठने पर जोड़ों में दर्द, हलकी सुजन और अकड़न की शिकायत रहती है। वक्त बेवक्त घुटने या अन्य जोड़ दुखते है। गर्दन और कमर के निचले हिस्से में दर्द बना रहता है। दवाई खाने से दर्द कम होता है, लेकिन फिर उभर आता है। पैरों के टखने दर्द करते हैं और कभी कभी चला भी नहीं जाता। घुटने, टखने, गर्दन, कमर, कलाई, पंजे दुखना आर्थराइटिस है या इसकी शुरूआत।

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