World Bipolar Day 2025: बाइपोलर डिसऑर्डर (bipolar disorder) एक ऐसी मेंटल कंडीशन है, जो व्यक्ति के मूड को अचानक और बहुत ज्यादा बदल देती है। इस स्थिति में व्यक्ति को दो अलग-अलग मूड की स्थितियों जैसे मैनिक और डिप्रेशन का सामना करना पड़ता है। इन मूड स्विंग्स का असर व्यक्ति के रेगुलर लाइफस्टाइल, रिश्तों और ऑफिस के कामकाज पर पड़ सकता है। जब किसी को मैनिक एपिसोड होता है, तो वे बहुत ज्यादा एनर्जेटिक और ओवरएक्टिव महसूस करते हैं, जबकि डिप्रेशन के दौरान वे बहुत ज्यादा उदास और निराश महसूस करते हैं। यह मानसिक विकार न केवल मानसिक, बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है। ऐसे में लोगों के बीच बाइपोलर डिसऑर्डर को लेकर जागरूकता फैलाने के लिए हर साल 20 मार्च को वर्ल्ड बाइपोलर डे के रूप में मनाया जाता है। तो आइए जानते हैं वर्ल्ड बाइपोलर डे मनाने की पीछे का इतिहास, उद्देश्य और इस साल की थीम के बारे में-
वर्ल्ड बाइपोलर डे 2025 की थीम - World Bipolar Day 2025 Theme in Hindi
2025 के वर्ल्ड बाइपोलर डे की थीम "बाइपोलर स्ट्रॉन्ग" है, जो बाइपोलर डिसऑर्डर से पीड़ित लोगों की लचीलापन, एकता और शक्ति को दिखाता है। यह थीम मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी गलत धारणाओं और मिथक को खत्म करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण है। इस दिन का उद्देश्य बाइपोलर डिसऑर्डर के मरीजों को सशक्त बनाना और उन्हें अपने अनुभव शेयर करने के लिए प्रोत्साहित करना है। यह मेंटल हेल्थ को बढ़ाने, समर्थन देने और ऐसे व्यक्तियों के लिए सहानुभूति दिखाना की एक कोशिश है, जो इस डिसऑर्डर से जूझ रहे हैं। इस दिन की पहल से समाज में बाइपोलर डिसऑर्डर को जानने और समझने में मदद मिलती है और एक सकारात्मक समाज को बढ़ावा देता है।
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वर्ल्ड बाइपोलर डे का महत्व - Importance Of World Bipolar Day in Hindi
बाइपोलर डिसऑर्डर, जो मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी एक गंभीर स्थिति है। इस समस्या से पीड़ित लोगों में मूड स्विंग्स, जैसे हल्के और डिप्रेसिव लक्षण नजर आ सकते हैं। यह डिसऑर्डर व्यक्ति के जीवन को गंभीर रूप से प्रभावित करता है, जिससे उनकी मानसिक स्थिति, ऑफिस वर्क और रिश्तों पर असर पड़ता है। वर्ल्ड बाइपोलर डे का आयोजन इस डिसऑर्डर को लेकर लोगों को जागरूकता बढ़ाने, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी गलतफहमियों को दूर करने के लिए बहुत जरूरी है। इस दिन का महत्व-
- जागरूकता बढ़ाना: बाइपोलर डिसऑर्डर के लक्षण, समस्याओं और इलाज के बारे में लोगों को शिक्षित करना है।
- मिथक को कम करना: मानसिक स्वास्थ्य पर खुली चर्चा को बढ़ावा देकर बाइपोलर डिसऑर्डर से जुड़ें मिथकों और भेदभाव को दूर करना।
- सपोर्ट बढ़ाना: बाइपोलर डिसऑर्डर से पीड़ित व्यक्तियों और उनके परिवारों को इलाज और सही लाइफ जीने के लिए जरूरी संसाधन देना है।
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वर्ल्ड बाइपोलर डे का इतिहास - History Of World Bipolar Day in Hindi
वर्ल्ड बाइपोलर डे की शुरुआत साल 2014 में हुई थी। इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर बायपोलर डिसऑर्डर्स (ISBD), एशियन नेटवर्क ऑफ बायपोलर डिसऑर्डर (ANBD), और इंटरनेशनल बायपोलर फाउंडेशन (IBPF) ने मिलकर इस दिन को मनाने का फैसला लिया। वर्ल्ड बाइपोलर डे मनाने के लिए यह दिन विन्सेंट वान गॉग के योगदान को पहचान देने और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से चुना गया था। वान गॉग, जिन्हें खुद बाइपोलर डिसऑर्डर था, उनकी कड़ी मेहनत और कला ने मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज में बदलाव लाने में मदद की। 30 मार्च को वान गॉग का जन्म हुआ था, इसलिए इस दिन वर्ल्ड बाइपोलर डे के रूप में मनाने के लिए चुना गया।
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