कैंसर मरीजों के लिए बुखार एक गंभीर समस्या क्यों है? जानें डॉक्टर से

कैंसर के दौरान बुखार को गंभीरता से लेना चाह‍िए। अगर कैंसर में बुखार के साथ दर्द, कमजोरी या अन्‍य लक्षण नजर आएं तो तुरंत डॉक्‍टर के पास जाएं

Yashaswi Mathur
Written by: Yashaswi MathurUpdated at: Jul 27, 2021 15:08 IST
कैंसर मरीजों के लिए बुखार एक गंभीर समस्या क्यों है? जानें डॉक्टर से

बुखार आना बहुत ही सामान्‍य सी समस्‍या मानी जाती है हालांक‍ि प‍िछले डेढ़ साल से कोव‍िड के चलते लोग बुखार को गंभीरता से लेने लगे हैं पर सामान्‍य व्‍यक्‍ति को बुखार आ जाए तो ये माना जाता है क‍ि वो दवाओं से ठीक हो जाएगा पर ऐसा कैंसर के मरीजों के साथ नहीं है। अगर कैंसर के मरीज को बुखार के साथ दर्द और कमजोरी भी है तो ये इंफेक्‍शन का कारण हो सकता है और ऐसे लक्षण नजर आने पर आपको तुरंत डॉक्‍टर के पास जाना चाह‍िए। कीमोथैरेपी के कारण भी कैंसर के मरीज को बुखार आ सकता है। इस लेख में हम कैंसर के मरीज को बुखार आने के गंभीर लक्षण, इलाज और इससे जुड़ी जरूरी ब‍िंदुओं पर चर्चा करेंगे। इस व‍िषय पर ज्‍यादा जानकारी के ल‍िए हमने लखनऊ के केयर इंस्‍टिट्यूट ऑफ लाइफ साइंसेज की एमडी फ‍िजिश‍ियन डॉ सीमा यादव से बात की।

cancer patient

कैंसर में क‍िन कारणों के चलते बुखार आ सकता है (Causes of fever during cancer)

कैंसर में बीमारी और इलाज के कारण व्‍यक्‍त‍ि की रोग प्रत‍िरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है और उसे अन्‍य संक्रमण होने लगते हैं। डॉ सीमा ने बताया क‍ि अगर आपके घर में कोई कैंसर का मरीज है तो उसका खास खयाल रखें और सामान्‍य से द‍िखने वाली परेशानी जैसे बुखार, ठंड लगना, पेट में दर्द या खांसी जैसी समस्‍या को भी गंभीरता से लें। कीमोथैरेपी और लो-इम्‍यून‍िटी के अलावा ज‍िन कैंसर मरीजों की हाल में ही सर्जरी हुई है या बायोप्‍सी हुई है उन्‍हें भी संक्रमण के कारण बुखार आ सकता है। कैंसर के साथ डायब‍िटीज, क्रॉन‍िक लंग्‍स ड‍िसीज, मैल्‍न्‍यूट्र‍िशन की समस्‍या होने के कारण भी बुखार आ सकता है। ज‍िन कैंसर के मरीजों को टीबी है उन्‍हें भी कैंसर के दौरान बुखार की समस्‍या हो सकती है। 

इसे भी पढ़ें- कैंसर मरीजों के लिए इंफेक्शन से बचाव के जरूरी टिप्स, किसी भी अंग में हो कैंसर, ऐसे बरतें सावधानी

कैंसर के मरीजों में बुखार के गंभीर लक्षण (Serious symptoms of fever during cancer)

fever and cancer

कैंसर के दौरान आपको मरीज का खास खयाल रखने की जरूरत है। ज‍िन मरीजों को कैंसर है या कीमोथैरेपी चल रही है और इन लक्षणों की पहचान होती है तो तुरंत डॉक्‍टर के पास ले जाएं- 

  • अगर बुखार 100.5 ड‍िग्री से ज्‍यादा है तो आपको तुरंत डॉक्‍टर से संपर्क करना चाह‍िए।
  • बुखार के साथ सांस लेने में परेशानी, उल्‍टी, डायर‍िया, कमजोरी, दर्द भी गंभीर स्‍थ‍ित‍ि के लक्षण हो सकते हैं। 
  • कैंसर के कुछ मरीजों को बुखार के साथ हार्ट रेट बढ़ना, द‍िमाग ठीक से काम न करना, यूरीन ज्‍यादा आने की समस्‍या भी हो सकती है। 

कीमोथैरेपी के कारण बुखार आना मेड‍िकल इमरजेंसी है (Kemotherapy causing fever is a medical emergency)

कीमोथैरेपी के कारण ब्‍लड काउंट कम हो जाता है और मरीज को न्‍यूट्रोपेन‍िया हो जाता है। कीमौथैरेपी से कैंसर सैल्‍स के साथ-साथ अच्‍छे सैल्‍स भी खत्‍म हो जाते हैं। न्‍यूट्रोपेन‍िया होने पर मरीज के बॉडी में रोग प्रत‍िरोधक क्षमता कम हो जाती है क्‍योंक‍ि वाइट ब्‍लड सैल्‍स की कमी हो जाती है ज‍िसके कारण इम्‍यून‍िटी नहीं बन पाती। कीमोथैरेपी ले रहे मरीजों में ये एक कॉमन समस्‍या है। अगर समय पर इलाज न क‍िया जाए तो स्‍थित‍ि गंभीर हो सकती है इसल‍िए डॉक्‍टर के संपर्क में रहें। उम्र और कैंसर के स्‍टेज पर मरीज की स्‍थ‍ित‍ि न‍िर्भर करती है। न्‍यूट्रोपेन‍िया के कारण कैंसर के मरीजों को बुखार आ सकता है।

इसे भी पढ़ें- ब्लड कैंसर (Blood Cancer) के लक्षण, कारण, जांच और इलाज के तरीके

कैंसर के मरीज को बुखार आने पर डॉक्‍टर क्‍या इलाज देते हैं? (Treatment of fever during cancer)

अगर एक सामान्‍य मरीज है तो हम उसे बुखार आने पर गले का स्‍वैब लेते हैं या चेस्‍ट एक्‍स-रे करते हैं पर कैंसर मरीज को बुखार आने पर हमें इंफेक्‍शन का पता लगाना होता है इसल‍िए ऐसे मरीजों को अस्‍पताल में भर्ती क‍िया जाता है। ऐसा भी हो सकता है क‍ि इंफेक्‍शन से बचने के ल‍िए मरीज को अलग रखा जाए। इसके बाद ब्‍लड और यूरीन का सैंपल लेकर जांच की जाती है। इसके बाद एंटीबायोट‍िक्‍स दी जाती हैं ताक‍ि बुखार का कारण पता लगाया जा सके। ऐसा भी हो सकता है क‍ि पहले से चल रही एंटीबायोट‍िक्‍स को डॉक्‍टर बंद कर दे। मुख्‍य बात ये है क‍ि आप ज‍ितना जल्‍दी मरीज को अस्‍पताल पहुंचाएंगे डॉक्‍टर उतना जल्‍दी इलाज शुरू कर सकेंगे।

कैंसर मरीजों को ब्‍लड सैल्‍स कम होने के कारण हो सकता है न्‍यूट्रोपेन‍िया फीवर 

fever causes

वाइट ब्‍लड सैल्‍स की कमी के कारण न्‍यूट्रोपेन‍िया की समस्‍या होती है और इस दौरान आने वाली बुखार को हम न्‍यूट्रोपेन‍िक फीवर (neutropenic fever) के नाम से जानते हैं। अगर कैंसर मरीज को न्‍यूट्रोपेनिक बुखार आया है तो डॉक्‍टर चेस्‍ट एक्‍स-रे, लैब टेस्‍ट आद‍ि से बुखार का पता लगाते हैं। मरीजों की जांच के ल‍िए सीटी-स्‍कैन भी क‍िया जाता है। कुछ केस में मरीज को एंटी-बायोट‍िक के साथ एंटी-फंगल ट्रीटमेंट भी देते हैं। एंटी-बायोट‍िक ट्रीटमेंट के बाद भी अगर बुखार न उतरे तो डॉक्‍टर एंटी-फंगल ट्रीटमेंट देते हैं। न्‍यूट्रोपेन‍िक फीवर अगर 7 द‍िन से ज्‍यादा रहता है तो ये मरीज के लि‍ए गंभीर स्‍थित‍ि हो सकती है।

कैंसर में बुखार से कैसे बचाव करें? (Prevention tips from fever during cancer)

fever in cancer

कैंसर के दौरान बुखार से बचने के लि‍ए इन बातों का ध्‍यान रखें-

  • साफ-सफाई का ध्‍यान रखें, कैंसर के मरीज को इंफेक्‍शन का खतरा ज्‍यादा होता है इसल‍िए मरीज के हाथ और मुंह को साफ रखें। 
  • कैंसर के मरीज के बर्तन और खाने का खास खयाल रखें, संक्रमण के कारण भी बुखार आ सकता है। 
  • अगर स्‍क‍िन में किसी तरह की कोई एलर्जी है तो तुरंत डॉक्‍टर को द‍िखाएं। 
  • कैंसर के मरीज को काम आने वाली सारी चीजें और उनके कमरे को ड‍िसइंफेक्‍टेंट करके रखें। 
  • अगर बुखार के ल‍िए कोर्स चल रहा रहा है तो दवाओं को समय पर दें। 
  • घर पर पैट्स हैं तो आपको उन्‍हें कैंसर के मरीजों से दूर रखना चाह‍िए, जानवरों से भी संक्रमण हो जाता है। 
  • कैंसर मरीज के कक्ष में आपको साफ-सफाई का ध्‍यान रखना होगा, अगर कमरे के साथ बाथरूम जुड़ा हुआ है तो ध्‍यान रखें क‍ि कमरे में ज्‍यादा सीलन न हो। 
  • खांसी-जुखाम जैसे लक्षण नजर आने पर इलाज खुद से न करें, डॉक्‍टर से सलाह लें। 
  • कैंसर के मरीजों की बैडशीट और कपड़े हर द‍िन बदलें और उन्‍हें साफ करने के ल‍िए ड‍िटर्जेंट के साथ ड‍िसइंफेक्‍टेंट का इस्‍तेमाल करें। 
  • संक्रमण के कारण कैंसर मरीजों में बुखार आता है इसल‍िए अगर मरीज के आसपास कोई अन्‍य बीमार व्‍यक्‍त‍ि है तो दूर कर दें। 

आपके घर में अगर कैंसर का मरीज हैं तो उनका खास खयाल रखें और समय-समय पर डॉक्‍टर से सलाह लेते रहें। 

Read more on Cancer in Hindi  

Disclaimer