स्वर्ण प्राशन से बढ़ाएं बच्चों की इम्यूनिटी, आयुर्वेदाचार्य से जानें इसका सही तरीका

Swarna Prashana  : आयुर्वेद में बच्चों की इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए स्वर्ण प्राशन करवाया जाता है। इससे बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास तेजी से होता है

Anju Rawat
Written by: Anju RawatPublished at: Jul 02, 2021Updated at: Jul 02, 2021
स्वर्ण प्राशन से बढ़ाएं बच्चों की इम्यूनिटी, आयुर्वेदाचार्य से जानें इसका सही तरीका

कोरोना वायरस से बचाव करने के लिए इम्यूनिटी का मजबूत होना बहुत जरूरी है। हेल्थ एक्सपर्ट कोरोना की पहली और दूसरी लहर के बाद तीसरी लहर आने की बात कह रहे हैं। अंदाजा लगाया जा रहा है कि कोरोना की तीसरी लहर बच्चों के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक हो सकती है। ऐसे में आपको अपने बच्चों की इम्यूनिटी को मजबूत करना बहुत जरूरी है। आयुर्वेद में बच्चों के शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए स्वर्ण प्राशन को बेहद फायेदमंद बताया गया है। जन्म के 6 महीने बाद से बच्चों का स्वर्ण प्राशन करवाया जा सकता है। राम हंस चेरिटेबल हॉस्पिटल के आयुर्वेदाचार्य डॉक्टर श्रेय शर्मा (Dr Shrey Sharma, Ayurvedacharya of Ram Hans Charitable Hospital) से जानते हैं, स्वर्ण प्राशन के फायदे और इसे करने का तरीका-

क्या है स्वर्ण प्राशन (What is Swarna Prashana)

स्वर्ण प्राशन संस्कार आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथों में वर्णित ऐसी विधि है, जो प्राकृतिक तरीके से बच्चों में स्वास्थ्य एंव बुद्धिमता प्रदान करती है। स्वर्ण प्राशन का मतलब है, स्वर्ण को शहद, घी के साथ या अन्य द्रव्यों के साथ बच्चों को देना है। स्वर्ण प्राशन बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़ाने के लिए की जाने वाली एक विधि है। इसमें बच्चों के नाजुक, कोमल शरीर के अनुसार स्वर्ण को बहुत सूक्ष्म या बारीक किया जाता है। डॉक्टर श्रेय कहते हैं कि किसी अच्छी कंपनी के ही स्वर्ण भस्म का इस्तेमाल करना चाहिए। क्योंकि इसकी गुणवत्ता में अंतर हो सकता है। 

कितने साल के बच्चों को करवाना चाहिए स्वर्ण प्राशन? (Which Age Group Children Should Get Swarna Prashan)

स्वर्ण प्राशन में बच्चों को स्वर्ण की न्यूनतम मात्रा दी जाती है। इससे बच्चों का शारीरिक विकास तेज होता है। वे सुदृढ़ और मजबूत बनते हैं। डॉक्टर श्रेय बताते हैं कि 6 महीने से लेकर 16 साल तक के बच्चों को स्वर्ण प्राशन दिया जा सकता है। स्वर्ण प्राशन को हमेशा सुबह खाली पेट करना चाहिए। इसका खाली पेट सेवन करना सर्वोत्तम माना जाता है।

swarna prashan increase Immunity

स्वर्ण प्राशन के फायदे (Swarna Prashan Benefits)

इम्यूनिटी बढ़ाए स्वर्ण प्राशन (Swarna Prashan Increase Immunity)

आयुर्वेद में स्वर्ण प्राशन का उपयोग बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए ही किया जाता है। कोरोना काल में इम्यूनिटी का मजबूत होना बहुत जरूरी है, ऐसे में स्वर्ण प्राशन करवाना लाभकारी हो सकता है। कोरोना की तीसरी लहर से अपने बच्चों का बचाव करने के लिए आप स्वर्ण प्राशन करवा सकते हैं। 

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मानसिक-शारीरिक विकास में फायदेमंद स्वर्ण प्राशन (Swarna Prashan Beneficial in Mental-Physical Development)

बच्चों इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए इसे लगातार 6 महीने तक किया जा सकता है। इसमें बच्चों को कुछ ऐसे चीजों का सेवन करवाया जाता है, जिससे उनका विकास तेजी से होता है। आप भी अपने बच्चे का शारीरिक और मानसिक विकास तेज करने के लिए स्वर्ण प्राशन का इस्तेमाल कर सकते हैं। आयुर्वेद में अकसर बच्चों के बेहतर विकास के लिए इसका उपयोग किया जाता है। 

दूसरों बच्चों से तेज विकास (Swarna Prashan Helps in Faster Growth)

स्वर्ण प्राशन लेने वाले बच्चों का विकास दूसरे बच्चों की तुलना से तेजी से होता है। साथ ही वे उनसे शारीरिक और मानसिक रूस से जल्दी विकसित होते हैं। ये बच्चे दूसरों की तुलना से ज्यादा बुद्दिमान होते हैं। 

मेमोरी पावर बढ़ाए स्वर्ण प्राशन (Swarna Prashan Increase Memory Power)

अगर आप अपने बच्चे की मेमोरी पावर बढ़ाना चाहते हैं, तो स्वर्ण प्राशन करवाया जा सकता है। डॉक्टर की सलाह पर इसे करवाने से बच्चे की मेमोरी पावर बढ़ती है। साथ ही यह इंफेक्शन से भी बच्चों को दूर रखता है।

ताकतवर बनाता है स्वर्ण प्राशन

स्वर्ण प्राशन में स्वर्ण भस्म के साथ ही शहद और घी का भी इस्तेमाल किया जाता है। जो बच्चों की हड्डियों को मजबूत बनाकर उन्हें ताकतवर बनाता है।

निरोगी बनाए स्वर्ण प्राशन

स्वर्ण प्राशन लेने वाले बच्चे निरोगी होते हैं। दरअसल, कमजोरी रोग प्रतिरोधक क्षमता होने पर ही बच्चे या बड़े बीमार होते हैं। लेकिन स्वर्ण प्राशन लेने वाले बच्चों की इम्यूनिटी मजबूत होती है, जिससे वे निरोगी रहते हैं।

आयु बढ़ाता है स्वर्ण प्राशन

बचपन में स्वर्ण प्राशन करवाने से बच्चे निरोगी रहते हैं, जिससे उनकी आयु लंबी होती है। एक निरोगी व्यक्ति रोगी व्यक्तियों की तुलना में ज्यादा समय तक जी सकता है। स्वर्ण प्राशन बच्चों की पाचन क्रिया को भी तंदुरुस्त रखने में मदद करता है।

swarna prashna

कैसे किया जाता है स्वर्ण प्राशन? (How to Do Swarna Prashan)

स्वर्ण प्राशन में बच्चों को स्वर्ण भस्म, शहद और घी चटाया जाता है। इसकी मात्रा बच्चों के शरीर की प्रकृति के आधार पर डॉक्टर तय करते हैं। इन तीनों चीजों को मिलाकर सूर्योदय होने पर बच्चे को इसे चटा दिया जाता है। इसके बाद बच्चे को 6 घंटे तक कुछ भी खाने को नहीं दिया जाता है। स्वर्ण प्राशन के दौरान बच्चों को सात्विक भोजन करवाना चाहिए। इस दौरान तला-भुना, फास्ट फूड वर्जित है।

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कब करना चाहिए स्वर्ण प्राशन? 

डॉक्टर श्रेय शर्मा बताते हैं कि वैसे तो बच्चों को स्वर्ण प्राशन प्रतिदिन भी दिया जा सकता है। लेकिन पुष्य नक्षत्र के दिन स्वर्ण प्राशन करना सबसे ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। 28 दिन के बाद यह पुष्य नक्षत्र आता है, इस दिन बच्चों को स्वर्ण प्राशन जरूर करवाना चाहिए।  

कितने समय के अंतराल में करवाएं स्वर्ण प्राशन? 

डॉक्टर श्रेय शर्मा बताते हैं कि वैसे तो स्वर्ण प्राशन को प्रतिदिन भी दिया जा सकता है। लेकिन भोजन या पाचन की अच्छी ऋतु यानी शरद ऋतु में इसे रोजाना किया जा सकता है। गर्मी के मौसम में इसे डॉक्टर की सलाह पर ले सकते हैं। अगर कोई बच्चा किसी गंभीर बीमारी से ठीक हुआ है, तो वे उसे प्रतिदिन दिया जा सकता है, जिससे बच्चा दोबारा बीमार न पड़ें। साथ ही ही डॉक्टर बच्चे की स्वास्थ्य स्थिति को देखकर ही बताते हैं कि उसे कितने दिन के अंतराल में देना चाहिए।

बच्चे को सर्दी, खांसी, जुकाम और बुखार होने पर स्वर्ण प्राशन नहीं करवाना चाहिए। ये समस्याएं ठीक होने पर आसानी से स्वर्ण प्राशन करवाया या किया जा सकता है। लेकिन अगर बच्चा किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित है, तो इसे डॉक्टर के परामर्श में किया जा सकता है।

डॉक्टर श्रेय शर्मा बताते हैं कि स्वर्ण प्राशन को डॉक्टर की सलाह और देखरेख में ही करना चाहिए। यह बाजार में नहीं मिलता है, डॉक्टर ही इसे बच्चे की प्रकृति के आधार पर तैयार करते हैं।

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