Fri Oct 9, 2026 | 01:14 PM IST

Medically Reviewed by Archana Jain , Nutritionist

दोपहर के खाने के बाद नींद क्यों आती है? सुस्ती दूर करने के लिए क्या खाएं और क्या नहीं

कुछ लोग अक्सर शिकायत करते हैं कि दोपहर का खाना खाने के बाद आंखें भारी होने लगती हैं, काम में मन नहीं लगता और सुस्ती छा जाती है। यहां जानिए, इस समस्या से बचने के लिए दोपहर में क्या खाएं और क्या नहीं?
दोपहर के खाने के बाद नींद क्यों आती है? सुस्ती दूर करने के लिए क्या खाएं और क्या नहींदोपहर के खाने के बाद नींद क्यों आती है? सुस्ती दूर करने के लिए क्या खाएं और क्या नहीं

आज के समय में घर पर रहने वाले लोग हों या ऑफिस में काम करने वाले दोपहर का वक्त होते ही जैसे ही खाना खत्म होता है, कई लोगों को अचानक सुस्ती महसूस होने लगती है। आंखें भारी हो जाती हैं, काम में मन नहीं लगता और दिमाग बस यही चाहता है कि थोड़ी देर के लिए आंखें बंद कर ली जाएं। ऑफिस में कंप्यूटर स्क्रीन देखते हुए झपकी आना, घर पर बैठकर टीवी देखते-देखते ऊंघने लगना या फिर पढ़ाई के समय फोकस टूट जाना, ये सब दोपहर के बाद नींद आने के आम लक्षण हैं। दिलचस्प बात यह है कि यह समस्या सिर्फ उन लोगों को नहीं होती जो रात में कम सोते हैं, बल्कि उन्हें भी होती है जो पूरी नींद लेने के बाद भी दिन में थकान महसूस करते हैं। इस लेख में जयपुर स्थित Angelcare-A Nutrition and Wellness Center की निदेशक, डाइटिशियन एवं न्यूट्रिशनिस्ट अर्चना जैन से जानिए, दोपहर में नींद की समस्या से बचने के लिए दोपहर में क्या खाएं और क्या नहीं?

खाने के बाद नींद आने का कारण

डाइटिशियन अर्चना जैन बताती हैं कि खाना खाने के बाद शरीर का ब्लड फ्लो पाचन तंत्र की ओर ज्यादा हो जाता है। खासकर जब लंच भारी, ऑयली या ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाला हो, तो पाचन के लिए शरीर को ज्यादा एनर्जी लगती है। इसके कारण दिमाग तक ऑक्सीजन और ब्लड सप्लाई थोड़ी कम हो जाती है, जिससे सुस्ती और नींद महसूस होती है।

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लंच में क्या खाएं जिससे बनी रहे एनर्जी?

डाइटिशियन अर्चना जैन बताती हैं कि दोपहर के खाने के बाद भी शरीर में एनर्जी बनी रहे, तो अपने लंच को बैलेंस्ड बनाना बेहद जरूरी है।

  • लंच में कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और फाइबर का सही संतुलन होना चाहिए।
  • इसके लिए ब्राउन राइस, मल्टीग्रेन रोटी, दाल, पनीर, दही, हरी सब्जियां और सलाद को शामिल करें।
  • प्रोटीन और फाइबर पाचन को धीमा करते हैं, जिससे ब्लड शुगर लेवल स्थिर रहता है और सुस्ती नहीं आती।

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लंच में क्या नहीं खाना चाहिए?

डाइटिशियन अर्चना जैन बताती हैं कि दोपहर के समय बहुत ज्यादा तला-भुना, मसालेदार और ऑयली खाना खाने से बचना चाहिए।

  • समोसा, कचौड़ी, फास्ट फूड, बटर-नान, ज्यादा घी-तेल में बनी सब्जी और मिठाई लंच के लिए सही विकल्प नहीं हैं।
  • ये फूड्स पचने में भारी होते हैं और शरीर को सुस्त बना देते हैं।
  • इसके अलावा ज्यादा कोल्ड ड्रिंक या शुगर से भरा जूस भी तुरंत एनर्जी देने के बजाय थकान बढ़ा सकते हैं।

लंच करने का सही तरीका क्या है?

डाइटिशियन अर्चना जैन कहती हैं कि बहुत जल्दी-जल्दी खाना, जरूरत से ज्यादा मात्रा में खाना या खाना खाते समय मोबाइल देखना पाचन को बिगाड़ता है। इससे शरीर को भोजन को पचाने में ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जो थकान और नींद का कारण बनती है। हमेशा धीरे-धीरे चबा कर खाना चाहिए और ओवरईटिंग से बचना चाहिए।

निष्कर्ष

डाइटिशियन अर्चना जैन कहती हैं कि अगर आप अपने लंच को हल्का, बैलेंस्ड और पोषण से भरपूर रखते हैं, तो दोपहर में नींद आने की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है। साथ ही नियमित समय पर खाना, सही नींद लेना और हल्की फिजिकल एक्टिविटी को डेली रूटीन में शामिल करना भी जरूरी है। सही डाइट और लाइफस्टाइल से न सिर्फ एनर्जी लेवल बना रहता है, बल्कि काम में फोकस और प्रोडक्टिविटी भी बढ़ती है।

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FAQ

  • शरीर में थकान क्यों महसूस होती है?

    दिन में बार-बार थकान आने की वजह गलत डाइट, अनियमित नींद, डिहाइड्रेशन, ज्यादा शुगर का सेवन और फिजिकल एक्टिविटी की कमी हो सकती है।
  • क्या खाने के तुरंत बाद नींद आना नॉर्मल है?

    हल्की सुस्ती नॉर्मल हो सकती है, लेकिन अगर रोज खाना खाने के बाद ज्यादा नींद आती है, तो यह गलत डाइट या लाइफस्टाइल का संकेत हो सकता है।
  • 24 घंटे में कितनी बार खाना खाना चाहिए?

    एनर्जी बनाए रखने के लिए दिन में 3 मेन मील्स के साथ 1-2 हेल्दी स्नैक्स लेना बेहतर होता है, ताकि ब्लड शुगर लेवल स्थिर रहे।

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Akanksha Tiwari

Health & Lifestyle Journalist

आकांक्षा तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। वह पोषण, आयुर्वेद, प्रेगनेंसी, हार्ट हेल्थ और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखती हैं और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह India TV, India Ahead और News Nation के साथ काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Feb 09, 2026 12:03 IST

    Modified By : Akanksha Tiwari
  • Feb 09, 2026 12:03 IST

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