इन 7 कारणों से होता है मूड स्विंग, जानें इसके लक्षण और उपचार

मूड स्विंग के पीछे क्या कारण होते हैं इस बात को जानना जरूरी हैं। साथ ही लक्षण और इलाज भी समझना जरूरी है। जानते हैं इनके बारे में..

Garima Garg
Written by: Garima GargPublished at: Feb 08, 2021Updated at: Feb 08, 2021
इन 7 कारणों से होता है मूड स्विंग, जानें इसके लक्षण और उपचार

ज्यादातर लोग यह समझते हैं कि बाइपोलर डिसऑर्डर ही मूड स्विंग है पर ऐसा नहीं है। इस बात में कोई शक नहीं है कि बाइपोलर डिसऑर्डर से ग्रस्त मरीजों को मूड स्विंग होता है यानी उनके व्यवहार और भावनाओं में अचानक से बदलाव आते हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि मूड स्विंग के पीछे केवल यही कारण है। इसके पीछे कई अन्य कारण भी हैं, जिनको समझना बेहद जरूरी है। आज हम आपको इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि क्या है मूड स्विंग? क्या है मूड स्विंग के लक्षण? मूड स्विंग के पीछे क्या कारण और उपचार हैं। पढ़ते हैं आगे...

क्या है मूड स्विंग (what is mood swing in Hindi)

जब किसी व्यक्ति के व्यवहार, उसके मन, उसकी मूड में अचानक से परिवर्तन देखने को मिलता है तो उसे मूड स्विंग कहते हैं। आसान शब्दों में समझा जाए तो कभी व्यक्ति अचानक से खुश है तो कभी चिड़चिड़ा, कुछ इस तरह के अनुभव देखने को मिलते हैं। कभी कभी मूड स्विंग आपके आसपास की परिस्थिति वातावरण पर निर्भर करता है। कभी कभी मूड स्विंग शरीर में होने वाले बदलाव के कारण भी होता है।

मूड स्विंग के लक्षण (symptoms of mood swing)

बता दें कि मूड स्विंग किसी बीमारी या परिस्थिति की वजह से अगर हो रहा है तो कुछ इस प्रकार के लक्षण नजर आ सकते हैं-

1 - शरीर में ऊर्जा की कमी होना

2 - हर वक्त थकान का महसूस करना

3 - अत्यधिक खाना खाना या बिल्कुल भी भूख ना लगना

4 - नींद ना आना, अनिद्रा की समस्या पैदा होना

5 - बेचैनी महसूस होना, चिड़चिड़ापन महसूस करना

6 - हर वक्त उदास महसूस करना

7 - वातावरण के विपरीत व्यवहार रखना

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8 - भ्रम की स्थिति पैदा होना

9 - चीजें भूल जाना

10 - बोलने, लिखने, सोचने, पढ़ने में दिक्कत महसूस करना

11 - आत्मविश्वास का कम होना

मूड स्विंग के कारण (causes of mood swing in Hindi)

1 - पीएमडीडी यानी प्रीमेन्स्ट्रुअल डिस्फोरिक डिसऑर्डर

यह पीएमएस का एक ऐसा प्रकार है जो 5 से 6% महिला को ही प्रभावित करता है। इसके लक्षणों में मूड बदलना भी आता है। वहीं ऐसी महिलाएं कभी डिप्रेशन का शिकार हो जाती हैं तो कभी उनमें चिड़चिड़ापन देखने को मिलता है ऐसे में अगर यह महिलाएं तनाव को कम करने के साथ-साथ अपनी डाइट में बदलाव करेंगी तो मूड स्विंग के लक्षणों को रोका जा सकता है।

2 - तनाव के कारण

इस परेशानी का सबसे मुख्य कारण तनाव है। मूड स्विंग में चिंता और बेचैनी आपके शरीर को प्रभावित करती हैं। ऐसे में इंसान का व्यवहार बदलने लगता है वो चिड़चिड़ापन महसूस करता है। यही कारण होता है कि व्यक्ति के मूड में अचानक परिवर्तन आ जाता है और व्यक्ति लगातार उदास रहना शुरू कर देता है। ऐसे में स्ट्रेस को दूर करना बेहद जरूरी है।

3 - प्रेगनेंसी के कारण

जो महिलाएं गर्भवती हैं उनके शरीर में हॉर्मोंस की अधिकता ज्यादा होती है, जिसका सीधा असर उनके मूड पर पड़ता है। यही कारण होता है कि वह कभी रोने जैसा महसूस करते हैं तो कभी अकेलापन, कभी खुशी महसूस करते हैं तो कभी उदासी, गर्भवती महिला को कई तरह के शारीरिक बदलाव और भावनात्मक तनाव महसूस की समस्या और बढ़ जाती है।

4 - हॉर्मोन के असंतुलन के कारण

बता दें कि हार्मोन से जुड़ी सामान्य बीमारी हाइपोथायराइडिज्म में थायराइड ग्लैंड पर्याप्त मात्रा में हार्मोन का उत्पादन नहीं कर पाता है। इसका असर मूड पर देखने को मिलता है। इसके अलावा अगर आप हार्मोन थेरेपी ले रहे हैं, तब भी बिना किसी वजह के व्यक्ति उदास या गुस्सा महसूस करता है।

5 - मानसिक रोग से संबंधित समस्या के कारण

मानसिक कई ऐसी बीमारियां हैं जिनकी वजह से मूड स्विंग जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं। इन बीमारियों में बाइपोलर डिसऑर्डर डिप्रेशन, एडीएचडी यानि अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर आदि आते हैं। इनके कारण भी मूड स्विंग होता है। अगर इन विकारों का इलाज सही समय पर किया जाए तो इस समस्या को भी रोका जा सकता है।

6 - डिमेंशिया

यह मानसिक बीमारी है जिसमें व्यक्ति की याददाश्त कमजोर होने लगती है। इसके कारण भी व्यक्ति का मूड स्विंग देखने को मिलता है। वह कभी खुश होता है तो कभी उदास। चूंकि इस समस्या के चलते व्यक्ति भूलने लगता है इसलिए वे हर वक्त निराश महसूस करता है। डिमेंशिया के कारण कई व्यक्ति डिप्रेशन से भी ग्रस्त हो जाते हैं।

7 - मेनोपॉज के कारण

महिलाओं के जीवन में मेनोपॉज एक अहम समय होता है जब उन्हें अपने मूड में कई तरह के बदलावों को झेलना होता है। बता दें कि एस्ट्रोजेन हार्मोन के लेवल में कमी की वजह से ये बदलाव देखने को मिलते हैं। हॉट फ्लैश, अनिद्रा और कामेच्छा में कमी भी मूड स्विंग के कारण होते हैं। ऐसे में लाइफस्टाइल से जुड़े परिवर्तन के कारण अपने मूड को अच्छा बना सकती हैं। ऐसी महिलाओं को समय समय पर अपना चेकअप करवाना चाहिए। 

मूड स्विंग का उपचार (Treatment of Mood Swings)

मूड स्विंग के लिए अगर अपनी जीवनशैली में थोड़े से बदलाव किए जाएं तो इस समस्या को बढ़ने से रोका जा सकता है। जानते हैं इन बदलावों के बारे में-

1 - स्ट्रेस को कम करें

मूड स्विंग का बड़ा कारण चिंता, तनाव और बेचैनी है। ऐसे में मूड को अच्छा करने के लिए स्ट्रेस को मैनेज करना बेहद जरूरी है। इसके लिए आप मेडिटेशन का सहारा ले सकते हैं। आप प्राणायाम को भी अपनी दिनचर्या में जोड़ सकते हैं। साथ ही आप मसाज थेरेपी के माध्यम से भी स्ट्रेस को कम कर सकते हैं।

2 - भरपूर मात्रा में नींद लेने से

रोजाना 7 से 8 घंटे की नींद लेना बेहद जरूरी है। इसके चलते बीमारियों को दूर करने में मदद मिलती है। साथ ही आप मूड को स्विंग करने से भी रोक सकते हैं।

3 - कैफीन, शुगर, अल्कोहल का सेवन करने से

जिन लोगों की डाइट में कैफीन, शुगर, अल्कोहल ज्यादा है वह तुरंत इन चीजों को अपनी डाइट से निकाल दें क्योंकि इसकी वजह से शरीर में घबराहट, बेचैनी बढ़ने लगती है। वहीं इनकी अधिकता से मूड स्विंग होने लगता है। खराब मोड को और खराब करने के लिए अल्कोहल एक बड़ा कारण है। वही शुगर की चीजों का ज्यादा सेवन करने से ब्लड शुगर लेवल भी बिगड़ सकता है।

4 - नियमित रूप से एक्सरसाइज करने से

अपनी दिनचर्या में एक्सरसाइज को जोड़ें। ऐसा करने से आपके शरीर में फील गुड हार्मोन का निर्माण होता है, जिससे आपका मूड बेहतर होता है।

नोट - हम सब जानते है कि मूड स्विंग के कारण हमारे रोजमर्रा के काम भी प्रभावित होते हैं। ऐसे में इसका समय पर ठीक होना बेहद जरूरी है। अगर ऊपर बताए गए उपायों से आपका मूड स्विंग में कोई बदलाव न आए तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें। और ये जानें कि मूड स्विंग का कारण क्या है? जब आपको इसका कारण पता चल जाएगा तो उसके बाद उसका इलाज करवा पाना भी आसान होगा। वैसे तो लाइफस्टाइल में बदलाव से ही आपका मूड बदलने लगता है लेकिन कई बार दवाइयों की भी जरूरत पड़ती है, जिससे समस्या को रोका जा सकता है।

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