कोरोना संक्रमण के बाद 'साइटोकाइन स्टॉर्म' के कारण गंभीर हो जाते हैं मरीज, जानें क्या है ये और कैसे बचें

शरीर में लगातार कमजोरी महसूस होना साइटोकाइन स्टॉर्म की स्थिति होती है। इसमें इम्यून सिस्टम ही शरीर को नुकसान पहुंचाने लगता है।

Anju Rawat
Written by: Anju RawatPublished at: May 18, 2021
कोरोना संक्रमण के बाद 'साइटोकाइन स्टॉर्म' के कारण गंभीर हो जाते हैं मरीज, जानें क्या है ये और कैसे बचें

देश में कोरोना की दूसरी लहर (Second Wave of Corona Viruse in India) ने भले ही कमर टोड़ना शुरू कर दी हो, लेकिन इससे जुड़ी तरह-तरह की दूसरी बीमारियों ने चिंता बढ़ा दी है। ब्लैक फंगस (Black Fungus), साइटोकाइन स्टॉर्म कोरोना मरीजों की जान पर भारी पड़ रहा है। क्या आपने कभी साइटोकाइन स्टॉर्म के बारे में सुना है (What is Cytokine Storm)? कोरोना संक्रमित मरीज के लिए यह वह स्थिति होती है, जब व्यक्ति के शरीर का इम्यून सिस्टम ही उसका दुश्मन बन जाता है। जबकि इम्यून सिस्टम बीमारियों से लड़ने में हमारी रक्षा करता है। आखिर साइटोकाइन स्टॉर्म क्या है? इससे कैसे बचा जा सकता है? इसके बारे में जानने के लिए हमने फोर्डा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर विवेक चौकसे (Dr. Vivek Chaukse, former National President of FORDA and Assistant Professor of Lady Hardinge Medical College) से बातचीत की-

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डॉक्टर विवेक बताते हैं कि किसी भी बीमारी से लड़ने के लिए शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) का मजबूत होना बहुत जरूरी है। कोरोना काल में हम सब ने इससे अपना बचाव करने के लिए अपनी इम्यूनिटी पर काफी ध्यान दिया है। मजबूत इम्यूनिटी वाला व्यक्ति कोरोना ही नहीं, बल्कि सभी तरह की बीमारियों से अपना बचाव कर सकता है। वह गंभीर से गंभीर बीमारियों को मात देने में काबिल होता है। लेकिन इन दिनों साइटोकाइन स्टॉर्म टर्म काफी चर्चा में है। गंभीर कोरोना मरीजों में साइटोकाइन स्टॉर्म की स्थिति पैदा हो रही है, जिसमें कोरोना रोगी की रोग प्रतिरोधक क्षमता धीरे-धीरे कमजोर (Weak Immunity of Covid Patients) होने लगती है और व्यक्ति या रोगी कमजोर होता चला जाता है। यह स्थिति कोरोना वायरस से पीड़ित रोगियों की जान तक ले लेता है। पिछले कुछ समय में यह काफी मरीजों में देखने को मिल रहा है, इसलिए इसका बचाव करना बहुत ही जरूरी है।

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साइटोकाइन स्टॉर्म क्या है ? (What is Cytokine Storm)

साइटोकाइन स्टॉर्म (Cytokine Storm) वह स्थिति है, जब हमारा इम्यून सिस्टम शरीर को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाने लगता है। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को काफी हद तक कमजोर कर देता है। जिससे कई बार इस स्थिति में कोरोना संक्रमित व्यक्ति की मौत भी हो जाती है। 

दरअसल, साइटोकाइन एक प्रतिरोधक प्रोटीन है, जो शरीर में गए वायरस या संक्रमण को मारने में मददगार होता है। लेकिन कई बार यह प्रोटीन अनियंत्रित हो जाता है, तो शरीर को नुकसान पहुंचाने लगता है। साइटोकाइन का अनियंत्रित होने पर व्यक्ति की जान जाने का खतरा भी बना रहता है। कोरोना से संक्रमित लोगों में भी यही देखने को मिल रहा है, जिसमें अचानक से व्यक्ति का साइटोकाइन अनियंत्रित हो जाता है। जिसमें वह वायरस को मारने के साथ-साथ शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं को भी मारने लगता है।

  • - साइटोकाइन एक प्रतिरोधक प्रोटीन है।
  • - साइटोकाइन स्टॉर्म में इम्यून सिस्टम शरीर का दुश्मन बन जाता है।
  • - साइटोकाइन के अनियंत्रित होने पर यह वायरस के साथ ही शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं को भी मारने लगता है।
  • - साइटोकाइन की स्थिति में व्यक्ति के कई अंग खराब होने लगते हैं और काम करना बंद कर देते हैं। 
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साइटोकाइन प्रोटीन क्यों है जरूरी (Importance of Cytokine Protein)

साइटोकाइन प्रोटीन हमारे खून में मौजूद होता है। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाने के लिए बेहद जरूरी होता है। साइटोकाइन प्रोटीन बीमारियों से लड़ने में भी हमारी मदद करता है। खून में इसकी सीमित मात्रा होने पर यह शरीर के लिए काफी फायदेमंद होता है, लेकिन अधिक मात्रा होने पर यह नुकसानदायक हो जाता है। इसका नियंत्रित होना बहुत ही जरूरी है, क्योंकि अनियंत्रित होने पर यह कई दूसरी बीमारियों को जन्म देने लगता है। कोरोना मरीजों में साइटोकाइन प्रोटीन अधिक होने से जोखिम काफी ज्यादा बढ़ जाता है।

  • - साइटोकाइन लेवल बढ़ने से यह वायरस को मारता है, लेकिन अधिक मात्रा में बढ़ने पर यह दूसरे अंगों की खराबी (Cytokine Storm Demage Organs) का कारण भी बन सकता है।  
  • - कोरोना से संक्रमित मरीजों में रासायनिक परिवर्तन होने की वजह से साइटोकाइन का स्तर बढ़ (Increase Cytokine Level) जाता है।  
  • - कोरोना मरीजों में साइटोकाइन का स्तर बढ़ने से कई लोगों की जान भी चली जाती है। 

किन लोगों को है ज्यादा खतरा (Who is at greater risk)

  • - साइटोकाइन स्टॉर्म का अधिक खतरा बुजुर्गों को होता है। 
  • - यह स्थिति ज्यादातर 60 साल से ऊपर के लोगों में देखने को मिल रही है। 
  • - इसके अलावा जो लोग डायबिटीज (Diabetes), किडनी रोग (Kidney Disease), हृदय रोग (Heart Disease), लिवर रोग (Liver Disease) और हाई ब्लड प्रेशर या हाइपरटेंशन (High Blood Pressure or Hypertension) से पीड़ित हैं, उन्हें इसका बहुत ज्यादा खतरा बना रहता है।
  • - साथ ही किसी अन्य गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों को भी इसका खतरा रहता है।
  • - कोरोना के गंभीर मरीजों (Covid Severe Patients) को साइटोकाइन का जोखिम अधिक होता है।
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कैसे करें साइटोकाइन स्टॉर्म से बचाव (How to Prevent Cytokine Storm)

डॉक्टर विवेक चौकसे कहते हैं कि साइटोकाइन स्टॉर्म से कैसे बचा जा सकता है, इसके बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है। लेकिन यह ज्यादा डायबिटीज (Diabetes), हाइपरटेंशन (Hypertension) और दूसरी बीमारी से पीड़ित गंभीर लोगों को हो रहा है। ऐसे में अगर इन बीमारियों से बचाव किया जा सके, तो काफी हद तक साइटोकाइन स्टॉर्म (Cytokine Storm) से भी बचा जा सकता है। इसके साथ ही बुजुर्गों को अपनी सेहत का खास ध्यान रखने की जरूरत होती है, ताकि वे इस स्थिति में आने से बच सकें। इसके अलावा आपको अपना ऑक्सीजन लेवल भी बार-बार चेक करते रहना चाहिए (Check Oxygen Level)। अगर आप कोरोना से ठीक भी हो जाते हैं, तो भी कुछ दिनों या महीनों तक अपना ऑक्सीजन लेवल बार-बार चेक करते रहें। अगर आपको ऑक्सीलन लेवल 95 से कम जाता है, तो ऐसे में आपको तुरंत अस्पताल जाने या डॉक्टर से सलाह (Consult to Doctor) लेने की जरूरत होती है।

साइटोकाइन स्थिति काफी गंभीर स्थिति होती है। इसमें ज्यादातर मामलों में मरीज की जान ही चली जाती है। ऐसे में आपको काफी ज्यादा सतर्क होने की जरूरत होती है और समय-समय पर अपने डॉक्टर को अपने स्वास्थ्य के बारे में जानकारी देनी चाहिए। जिससे आपकी तकलीफ को ज्यादा बढ़ने से पहले ही रोका जा सके।

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