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हार्ट अटैक क्यों और कैसे आता है? समझें दिल की ये समस्या कैसे ले लेती है इंसान की जान

जानें हार्ट अटैक कैसे आता है और क्यों इसके कारण इंसान की जान चली जाती है। समझें हार्ट अटैक की प्रक्रिया और हार्ट का फंक्शन आसान भाषा में।

Anurag Anubhav
Written by: Anurag AnubhavPublished at: Jun 21, 2022Updated at: Jun 21, 2022
हार्ट अटैक क्यों और कैसे आता है? समझें दिल की ये समस्या कैसे ले लेती है इंसान की जान

Heart Attack in Hindi: हार्ट या हृदय यानी दिल हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। सीने में बाईं तरफ स्थित हमारी मुट्ठी जितना बड़ा ये अंग हमारे जीवन का आधार है क्योंकि हार्ट ही पूरे शरीर में खून को पंप करता है, जिससे सभी अंग जीवित रहते हैं। हार्ट अटैक (Heart Attack) इसी हार्ट में आने वाली एक गड़बड़ी का नाम है, जिसके मामले पिछले कुछ सालों में बहुत तेजी से बढ़े हैं। मेडिकल साइंस में हार्ट अटैक को मायोकार्डियल इंफार्क्शन (Myocardial Infarction)कहते हैं। आपने भी अपने आसपास लोगों को हार्ट अटैक से मरते देखा या सुना होगा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हार्ट अटैक क्यों और कैसे आता है? ओनलीमायहेल्थ की स्पेशल सीरीज 'बीमारी को समझें' में आज हम आपको बता रहे हैं हार्ट अटैक के बारे में। इस गंभीर बीमारी को आसानी से समझने के लिए हमने बात की है मुंबई के एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट के सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर संतोष कुमार डोरा से।

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हार्ट या हृदय कैसे काम करता है? (How Does Heart Function?)

हार्ट अटैक को समझने से पहले आपके लिए यह जानना जरूरी है कि हार्ट काम क्या करता है। हृदय हमारे कार्डियोवस्कुलर सिस्टम का महत्वपूर्ण अंग है, जो 24 घंटे काम करता रहता है (इसे आप किसी भी समय अपने सीने के दाएं हिस्से में हाथ रखकर धड़कता हुआ महसूस कर सकते हैं)। हार्ट का काम है एक रास्ते से शरीर के अंगों को ऑक्सीजन और न्यूट्रिएंट्स वाला खून सप्लाई करना और दूसरे रास्ते से कार्बन डाई ऑक्साइड और शरीर के लिए गैर जरूरी तत्वों वाले खून को वापस लाना। ये काम रक्त वाहिकाओं (Blood Vessels), धमनियों (Arteries), नसों (Veins) और कोशिकाओं (Capillaries) के माध्यम से होता रहता है।

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आपके हार्ट का दायां हिस्सा विभिन्न अंगों से चलकर आए खून (जिसमें गंदगी और कार्बन डाई ऑक्साइड है) को लेता है और आपके फेफड़ों में पंप करता है। यहां खून से कार्बन डाई ऑक्साइड अलग किया जाता है (जिसे आप सांस छोड़ते समय बाहर निकाल देते हैं) और फ्रेश ऑक्सीजन को खून में मिला दिया जाता है (जिसे आप सांस लेते समय अंदर खींचते हैं)। इसके बाद ये खून फेफड़ों से हार्ट के बाएं हिस्से में भेज दिया जाता है और वहां से पंप करके मस्तिष्क (Brain) और दूसरे अंगों में पहुंचता है। इसी रास्ते में आपकी किडनी आती है। किडनी का काम है खून को छानकर टॉक्सिन्स को अलग करना (जिसे आप पेशाब के रूप में शरीर से बाहर निकाल देते हैं)।

हार्ट अटैक क्या है और कैसे आता है? (What Is Heart Attack In Hindi)

अब आप समझ चुके हैं कि हार्ट ही हमारे पूरे शरीर में ऑक्सीजन की सप्लाई करता है। ऑक्सीजन सभी मसल्स और सेल्स को जीवित रखने के लिए जरूरी है। ऐसे में दूसरे अंगों तक ऑक्सीजन कम पहुंचे तो शरीर कुछ समस्याएं महसूस करता है पर जीवन चलता रहता है। लेकिन अगर हार्ट तक ही ऑक्सीजन कम पहुंचे या पूरी तरह रुक जाए तो हार्ट की मसल्स मरने लगती हैं, जिससे हार्ट दूसरे अंगों तक भी ऑक्सीजन नहीं पहुंचा पाता और धीरे-धीरे सारे अंग मरने लगते हैं। इसी स्थिति को ही हार्ट अटैक कहते हैं। हार्ट तक ऑक्सीजन की इस सप्लाई में कई चीजें बाधा बन सकती हैं, जैसे- आर्टरीज में जमा फैट, कोलेस्ट्रॉल, प्लाक या ब्लड क्लॉट (खून का थक्का) आदि। कोलेस्ट्रॉल फैटी फूड्स के कारण शरीर में जमा होने वाला चिपचिपा पदार्थ होता है, जो धमनियों में जमा होकर खून की सप्लाई को रोकता है।

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हार्ट अटैक के बाद भी लोग कैसे बच जाते हैं?

ऐसा जरूरी नहीं है कि हार्ट अटैक आने पर व्यक्ति की मौत निश्चित ही है। ज्यादातर मामलों में सही समय पर इलाज मिलने से व्यक्ति को बचाया जा सकता है। दरअसल हार्ट अटैक से मसल्स कितनी डैमेज होगी, ये इस बात पर निर्भर करता है कि हार्ट अटैक के समय व्यक्ति के हार्ट के कितने हिस्से में खून की सप्लाई बाधित हुई और उसे कितनी जल्दी मेडिकल ट्रीटमेंट मिला। अगर ब्लड सप्लाई पूरी तरह बंद हो जाए, तो कई बार हार्ट अटैक मरीज को हॉस्पिटल तक पहुंचने का भी समय नहीं देता है। लेकिन अगर डैमेज धीरे-धीरे हो रहा है, तो इलाज शुरू करके इस डैमेज को रोका जा सकता है और जीवन बचाया जा सकता है। 

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क्या हार्ट अटैक के बाद डैमेज हो चुकी मसल्स फिर ठीक नहीं होती हैं?

प्रकृति ने हमारे शरीर को ऐसा बनाया है कि वो अपनी ज्यादातर समस्याओं का इलाज स्वयं कर सकता है। आपको जानकर संतोष होगा कि हार्ट अटैक के बाद डैमेज हुई मसल्स को स्कार टिश्यू के जरिए शरीर खुद ही ठीक कर लेता है। लेकिन इसमें 7-8 सप्ताह या कुछ महीने का समय लग सकता है। लेकिन ये स्कार टिश्यूज हेल्दी मसल टूश्यूज की तरह सिकुड़ते और खुलते नहीं हैं यानी ऑक्सीजन सप्लाई के लिए पंपिंग में ये टिश्यूज मदद नहीं करते, जिससे हार्ट की क्षमता जरूर प्रभावित होती है।

हार्ट जितना नाजुक अंग है, उतना ही समझदार भी है। सामान्य स्थिति में अगर हार्ट के किसी छोटे से हिस्से में कोई समस्या हो भी जाए, तो भी ये अपना काम करता रहता है लेकिन इसकी क्षमता में कमी आ जाती है। इस स्थिति में व्यक्ति को हार्ट अटैक के हल्के-फुल्के लक्षण महसूस हो सकते हैं, जिसे माइल्ड हार्ट अटैक (Mild Heart Attack) या मिनी हार्ट अटैक (Mini Heart Attack) कहते हैं। अगर इस संकेत को समझकर सही समय पर इलाज कराया जाए और लाइफस्टाइल में बदलाव किए जाएं, तो हार्ट को आगे चलकर होने वाले डैमेज से बचाया जा सकता है। 

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