मिनी हार्ट अटैक क्या है? डॉक्टर से जानें इसके लक्षण, कारण और इलाज के तरीके

मिनी हार्ट अटैक मुख्य रूप से कम गंभीर हार्ट अटैक की समस्या है। इसके लक्षण गंभीर हार्ट अटैक से काफी अलग होते हैं। चलिए जानते हैं इसके बारे में-

Kishori Mishra
Written by: Kishori MishraPublished at: Sep 21, 2021
मिनी हार्ट अटैक क्या है? डॉक्टर से जानें इसके लक्षण, कारण और इलाज के तरीके

हृदय हमारे शरीर का एक अहम अंग माना जाता है। एक स्वस्थ शरीर के लिए हृदय का स्वस्थ रहना बहुत ही जरूरी है। यह हमारे शरीर का एक ऐसा अंग है, जिसके संकुचन से ही शरीर के अन्य हिस्सों में रक्त का प्रवाह बेहतर तरीके से होता है। ऐसे में अगर हृदय में किसी भी तरह की परेशानी हो तो यह शरीर के अन्य अंगों को प्रभावित कर सकती है। अगर आप अपने शरीर को स्वस्थ रखना चाहते हैं, तो अपने हृदय को भी स्वस्थ रखने की कोशिश करें। हृदय स्वास्थ्य के प्रति जागरुक करने के लिए 29 सितंबर को दुनियाभर में वर्ल्ड हार्ट डे (World Heart Day 2021) यानी विश्व हृदय दिवस मनाया जाता है। आज हम आपको इस लेख में मिनी हार्ट अटैक (What is Mini Heart Attack) के बारे में विस्तार से बताएं। हम में से शायद अधिकतर लोग मिनी हार्ट अटैक से अनजान हैं, क्योंकि इसके लक्षण हार्ट अटैक के सामान्य लक्षण से काफी अलग होते हैं। साथ ही इसे लेकर कई लोग कंफ्यूज भी रहते हैं। कानपुर के हृदय रोग संस्थान में कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर अवधेश शर्मा से जानते हैं इस विषय के बारे में विस्तार से-

डॉक्टर अवधेश शर्मा बताते हैं कि बताते हैं कि मिनी हार्ट अटैक का टर्म, मुख्यतौर पर कम गंभीरता वाले हार्ट अटैक को कहा जाता है। हार्ट अटैक को 2 कटैगरी में वर्गीकृत किया जाता है। पहला है मैजर हार्ट अटैक, यह स्थिति तब आती है जब धमनी जो हार्ट की मांसपेशियों को ब्लड का सप्लाई करती है, उसमें 100 फीसदी तक की रुकावट आ जाए। इसके कारण मरीजों में गंभीर लक्षण दिख सकते हैं। वहीं, दूसरी कटैगरी में धमनियों में 100 फीसदी रुकावट नहीं होती है, इसमें करीब 70-80 फीसदी से कम धमनियां प्रभावित (Mini Heart Attack) होती हैं। इस स्थिति में मरीजों में गंभीर लक्षण नहीं दिखते हैं। इसमें हार्ट की मांसपेशियों को जितने ब्लड की आवश्यकता होती है, वह 20-30 फीसदी धमनियां सप्लाई कर रही होती हैं। जिससे उन्हें ज्यादा परेशानी महसूस नहीं होती है। इस स्थिति को ही मिनी हार्ट अटैक कहते हैं। साइलेंट हार्ट, मिनी हार्ट अटैक की ही कटैगरी होती है। इसमें आर्टरी 70 से 80 फीसदी तक प्रभावित होता है। 

मिनी हार्ट अटैक के लक्षण (Mini Heart Attack Symptoms in Hindi)

डॉक्टर बताते हैं कि हार्ट अटैक में नॉर्मली चेस्ट पेन होता है। लेकिन मिनी हार्ट अटैक से ग्रसित कुछ मरीजों के चेस्ट में पेन नहीं होता है, जिसकी वजह से मरीज समझ नहीं पाते हैं कि उन्हें हार्ट अटैक हुआ है। मिनी हार्ट अटैक से ग्रसित मरीजों में हार्ट अटैक से थोड़ा हटकर लक्षण दिखने लगते हैं, जिसकी वजह से मरीज कंफ्यूज हो जाते हैं कि उन्हें हार्ट अटैक है या फिर कोई अन्य बीमारी। जैसे-

पेट में परेशानी जैसे- पेट का भारी होना, गैस, बदहजमी, खट्टी डकार, पेट में जलन, पेट में दर्द। इससे मरीजों को लग सकता है कि उन्हें गैस्ट्रिक की समस्या हो गई है। लेकिन ऐसे कुछ लक्षण मिनी हार्ट अटैक के हो सकते हैं। 

सांस फूलना, चलने-फिरने या फिर काम ज्यादा करने पर सांस फूलने की शिकायत होने लगती है, जिससे मरीजों को लग सकता है कि उन्हें लंग्स से जुड़ी बीमारी हो गई है। लेकिन यह मिनी हार्ट अटैक के लक्षण हो सकते हैं। इस तरह के लक्षण दिखने वाले मरीजों को अचानक घबराहट महसूस होने लगती है, बंद कमरों से बाहर की ओर भागने लगते हैं, कुछ मरीजों को बहुत अधिक पसीना भी आ सकता है। अचानक से ब्लड प्रेशर बढ़ जाना। 

कुछ मरीजों को मिनी हार्ट अटैक के कारण बहुत ही अधिक थकावट महसूस हो सकती है। इसलिए अगर आपके शरीर में इस तरह के लक्षण दिखे, तो तुरंत अपने नजदीकी डॉक्टर से सलाह करें। क्योंकि यह मिनी हार्ट अटैक के लक्षण हो सकते हैं।

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किन लोगों को है मिनी हार्ट अटैक का खतरा?

डॉक्टर बताते हैं कि जिन लोगों की इम्यूनिटी कमजोर होती है। उन्हें मिनी हार्ट अटैक का खतरा अधिक होता है। खासतौर पर वृद्धावस्था में मिनी हार्ट अटैक का खतरा ज्यादा होता है।

डायबिटीज से ग्रसित मरीजों को भी साइलेंट या फिर मिनी हार्ट अटैक का खतरा ज्यादा रहता है। दरअसल, डायबिटीज से ग्रसित मरीजों की नब्ज सेंसेशन कमजोर हो जाती है। ऐसी स्थिति में मिनी हार्ट अटैक का खतरा रहता है। इसमें मरीजों को पेन लेस हार्ट अटैक हो सकता है।

इसके अलावा वृद्ध महिलाओं में भी मिनी हार्ट अटैक का खतरा रहता है। हाई ब्लड प्रेशर, क्रॉनिक किडनी डिजीज का मरीज और कैंसर से प्रभावित मरीजों को मिनी हार्ट अटैक का खतरा अधिक रहता है।  

मिनी हार्ट अटैक के कारण (Mini Heart Attack Causes)

  • बहुत अधिक स्मोकिंग और शराब का सेवन
  • फिजीकल एक्टिविटी कम होना।
  • खाने में अनहेल्दी चीजें शामिल करना।
  • वसायुक्त आहार का सेवन करना।
  • मोटापा अधिक होना
  • स्ट्रेस और डिप्रेशन में रहना
  • अनुवांशिक रूप से - डॉक्टर बताते हैं कि अगर किसी व्यक्ति के परिवार में पुरुष की 65 वर्ष और महिला की 45 वर्ष से पहले हार्ट अटैक से मृत्यु हुई है, तो इस स्थिति में उसके परिवार में अन्य सदस्य को मिनी हार्ट अटैक का खतरा रहता है। 

मिनी हार्ट अटैक का निदान

डॉक्टर बताते हैं कि अगर आपके फैमिली में किसी को हार्ट अटैक की समस्या हुई है या फिर कोई अन्य रिक्स फैक्टर मौजूद होने के साथ-साथ आपको मिनी हार्ट अटैक के लक्षण दिख रहे हैं, तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं। इस स्थिति में डॉक्टर आपको कुछ टेस्ट करवाने की सलाह दे सकते हैं। जैसे-

  • एलेक्ट्रोकार्डियोग्राम 
  • इकोकार्डियोग्राम
  • ब्लड टेस्ट 
  • ईसीजी इत्यादि।

मिनी हार्ट अटैक का इलाज (Mini Heart Attack Treatment)

डॉक्टर बताते हैं कि अगर आपको मिनी हार्ट अटैक की समस्या हो रही है, तो अपने कार्डियोलॉजिस्ट से उचित इलाज करवाएं। इसके इलाज के कुछ आसान तरीके होते हैं। जैसे-

एंजियोग्राफी - डॉक्टर बताते हैं कि अगर 50-60 फीसदी से अधिक धमनियां प्रभावित हुई हैं, तो इस स्थिति में एंजियोग्राफी की मदद ली जाती है।

दवाइयां - कुछ सामान्य स्थिति में डॉक्टर दवाइयों के जरिए मरीजों का इलाज करते हैं। इन दवाइयों के माध्यम से खून को पतला किया जाता है, जिससे हार्ट के ब्लड सप्लाई में रुकावट न पैदो हो।  

मिनी हार्ट अटैक से कैसे करें बचाव (Prevention of Mini Heart Attack in Hindi)

डॉक्टर का कहना है कि अगर आप मिनी हार्ट अटैक के खतरे से बचना चाहते हैं, तो एक हेल्दी लाइफस्टाइल को फॉलो करें। इसके लिए आप निम्न तरीके फॉलो कर सकते हैं। 

  • वजन को नियंत्रित रखें- आपका BMI 25 से अधिक न हो। कमर की गोलाई पुरुषों में 102 सेंटीमीटर महिलाओं में 88 सेंटीमीटर से ज्यादा न हो।
  • स्मोकिंग और शराब के लत से दूर रहने की कोशिश करें। 
  • खुद को खुश रखें। काफी ज्यादा स्ट्रेस और डिप्रेशन से बचें। स्ट्रेस से भरे वर्क प्लेस में काम न करें। 
  • हाइपरटेंशन और डायबिटीज को कंट्रोल करने की कोशिश करेँ। नियमित रूप से अपनी जांच करवाते रहें। 
  • नमक कम खाएं। 
  • देसी घी, मलाई मक्शन, अनफैचुरेट फैट का सेवन न करेँ। 
  • फ्रूट्स और नट्स का अधिक सेवन करें। 
  • रिफाइंड तेल और फूड्स का सेवन कम करें। 
  • नियमित रूप से एक्सरसाइज करें। 

डॉक्टर द्वारा बताए गए दिशा-निर्देशों का पालन करने आप मिनी हार्ट अटैक के खतरे से बच सकते हैं। इसके अलावा अगर आपको मिनी हार्ट अटैक के लक्षण जैसे- पेट फूलना, सांस फूलना महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। इस स्थिति में घरेलू नुस्खों को आजमाने से बचें।

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