तन-मन को सुकून पहुंचाती है चमत्कारिक विपश्यना, जानें कैसे

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jun 14, 2017
Quick Bites

  • शारीरिक-मानसिक थकान होना स्वाभाविक है।
  • आत्मनिरीक्षण और आत्मशुद्धि संभव है।
  • सांस के प्रति भाव रखना ही इसका मूलमंत्र है।

व्यस्त जीवनशैली के चलते शारीरिक-मानसिक थकान होना स्वाभाविक है। इससे बचने में ध्यान बहुत मददगार होता है। विपश्यना ऐसी ही प्रमुख क्रिया है, जो तन-मन को सुकून पहुंचाती है। इसके लिए सबसे जरूरी यह है कि अगर आप अपने भीतर छिपी नकारात्मक बातों को बाहर निकालना चाहते हैं, तो अपनी खामियों को पहचान कर उन्हें बाहर निकालने की कोशिश करनी चाहिए। अब सवाल यह उठता है कि इसे करने का सही तरीका क्या है? और यह कैसे फायदा पहुंचाती है?

meditation in hindi

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चमत्कारिक ध्यान विपश्यना  

यह ध्यान साधना की ऐसी पुरातन प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से ही आत्मनिरीक्षण और आत्मशुद्धि संभव है। इसके लिए प्राचीनकाल से ही योगियों द्वारा विपश्यना की विधि अपनाई जाती रही है।  अपने ही शरीर और चित्तधारा पर पल-पल होने वाली परिवर्तनशील घटनाओं को तटस्थभाव से निरीक्षण करते हुए चित्तविशोधन का अभ्यास हमें सुख-शांति का जीवन जीने में मदद करता है। जिससे हम अपने भीतर शांति और सामंजस्य का अनुभव कर सकते हैं।
विपश्यना बड़ा सीधा-सरल प्रयोग है। अपने आते-जाते सांस के प्रति भाव रखना ही इसका मूलमंत्र है। इसमें सांस को इतनी ज्यादा अहमियत इसीलिए दी जाती है, क्योंकि यही हमारा जीवन है। सांस  अनेक अर्थों में महत्वपूर्ण है। यह तो आपने भी महसूस किया होगा कि क्रोध और करुणा जैसी अलग-अलग मन:स्थितियों में सांस अलग-अलग ढंग से चलती है। इसी तरह दौडऩे या चलने जैसी शारीरिक क्रियाओं के दौरान भी सांसों की गति तेज और धीमी होती रहती है।

बेहद सरल है यह क्रिया

  • विपश्यना के साथ सबसे अच्‍छी बात यह है कि आप इसे कहीं भी कर सकते हैं। यहां तक कि आपके आसपास बैठे लोगों को भी इस बात का पता नहीं चलेगा कि आप क्या कर रहे हैं?
  • बस-ट्रेन में यात्रा करते समय या अपने घर में बिस्तर पर लेटे-लेटे भी आप इसे बड़ी सुगमता से कर सकते हैं।
  • इससे आपके आसपास के लोगों को भी कोई असुविधा नहीं होगी क्योंकि न तो इसमें किसी मंत्र के उच्चारण की जरूरत है और न बार-बार शारीरिक मुद्रा बदलनी है।
  • यह प्रक्रिया बाहर से देखने में जितनी सरल है, इसमें उतनी ही अधिक गहराई है, जिसे अपनाने के बाद ही महसूस किया जा सकता है।
  • गौतम बुद्ध द्वारा बताई गई इस साधना को एक बार अपने जीवन में उतार कर देखें, निश्चित रूप से आपको अपने भीतर सकारात्मक बदलाव महसूस होगा।

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विपश्यना करने का तरीका

  • विपश्यना बड़ा सीधा-सरल प्रयोग है। अपनी आती-जाती सांसों पर ध्‍यान दिया जाता है।
  • पहले अभ्यास में उठते-बैठते, सोते-जागते, बात करते या मौन रहते किसी भी स्थिति में बस सांस के आने-जाने को नाक के छिद्रों में महसूस करते है।
  • जैसे सांसों के आने-जाने को स्वाभाविक रूप से देखें या महसूस करें कि ये सांस छोड़ी और ये ली।
  • सांस लेने और छोड़ने के बीच जो गैप है, उस पर भी सहजता से ध्यान दें। जबरदस्‍ती इस काम को नहीं करना है।
  • सब कुछ बंद करके इसी पर ध्यान देना ही विपश्यना ध्‍यान है।

 

विपश्यना के फायदे

  • आपके मन में यह सवाल जरूर आ रहा होगा कि भला सिर्फ सांसों की गति को महसूस करने से क्या लाभ होगा? लेकिन इसके फायदे आपको धीरे-धीरे महसूस होंगे।
  • इसे नियमित रूप से देखते-देखते ही आपके सारे रोग दूर हो जाएंगे है।
  • शरीर के रोगों के साथ-साथ आपका मन भी शांत हो जाएगा।

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Image Source : peacequarters.com & karanbajaj.com

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