ज्यादातर अचानक मौत का कारण होता है पल्मोनरी एम्बोलिज्म, ये हैं इसके लक्षण और बचाव

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Feb 19, 2018
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Quick Bites

  • अचानक होने वाली मौतों की एक प्रमुख कारण पल्मोनरी एम्बोलिज्म नामक एक मेडिकल अवस्था है।
  • सर्जरी और चोट लगने के बाद पल्मोनरी एम्बोलिज्म का खतरा बढ़ जाता है।
  • समय रहते इस मेडिकल समस्या का इलाज संभव है।

अक्सर आपने सुना या देखा होगा कि आपके रिश्तेदार या मित्र जो अस्पताल में भर्ती थे, उनकी स्थिति ठीक-ठाक थी, पर अचानक उनकी सांसें फूलने लगीं और और उनकी मौत हो गयी। आपको तब समझ में नहीं आया होगा कि क्यों और कैसे यह हादसा हो गया। कभी यह भी देखा होगा कि आपके कोई जान पहचान वाले या पारिवारिक सदस्य की टांगों में अचानक सूजन आयी, दर्द उठा और दो तीन दिनों तक उनकी मालिश होती रही और लेप का सिलसिला जारी रहा और फिर अचानक सांस फूलने लगी और आनन-फानन में उनकी मौत हो गयी। लोगों की समझ से यह बात परे थी कि मामूली सी बात थी और इतना बडा हादसा कैसे घटित हो गया।

अचानक मौत का कारण हो सकती है ये गंभीर बीमारी

दरअसल अस्पतालों या घरों में अचानक होने वाली ऐसी मौतों की एक प्रमुख कारण पल्मोनरी एम्बोलिज्म नामक एक मेडिकल अवस्था है। 'पल्मोनरी एम्बोलिज्म' का साधारण भाषा में आशय है फेफड़े की रक्त नली का जाम हो जाना। इस रुकावट का कारण खून के कतरों का या अन्य पदार्थों का फेफड़े की रक्त नली में एकत्र हो जाना है। समय रहते इस मेडिकल समस्या का अब इलाज संभव है। आमतौर पर जब किसी व्यक्ति की अचानक मौत हो जाती है, तो लोग जाने-अनजाने मौत का कारण हार्ट अटैक बता देते हैं। यह तो सभी जानते हैं कि मौत होने की घोषणा दिल की धड़कन पूरी तरह से बंद होने के बाद ही हो पाती है।

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इन लोगों को है ज्यादा खतरा

  • सर्जरी और चोट लगने के बाद पल्मोनरी एम्बोलिज्म का खतरा हमेशा मंडराता रहता है।
  • गर्भवती महिलाएं गर्भावस्था के दौरान या फिर प्रसव के बाद तीन-चार हफ्तों तक पल्मोनरी एम्बोलिज्म के खतरे की सीमा में रहती हैं।
  • कैंसर के मरीज हमेशा पल्मोनरी एम्बोलिज्म के खतरे के साये में रहते हैं।
  • अगर आप मोटापे से पीडि़त हैं और व्यायाम या शारीरिक गतिविधियां नहीं कर रहे हैं, तो पल्मोनरी एम्बोलिज्म का खतरा बढ़ जाता है।
  • जो लोग किसी वजह से ज्यादा दिनों तक घर में या अस्पताल के आई. सी. यू. में बिस्तर पर पड़े रहते है, वे लोग पल्मोनरी एम्बोलिज्म के जल्दी शिकार हो जाते हैं

बीमारी के अन्य कारण

कुछ मरीजों के रक्त में जन्मजात कुछ ऐसे तत्वों की कमी पायी जाती है, जो खून को आवश्यकता से अधिक गाढ़ा होने से रोकते हैं। ये तत्व हैं- प्रोटीन 'सी' प्रोटीन 'एस' और 'एन्टी थ्रोम्बिन 3'। अगर इन तत्वों की मात्रा किसी के खून में कम हैं, तो खून को ज्यादा गाढ़ा व जल्दी से थक्का बनने में देर नहीं लगेगी। अगर शरीर को किसी तनावपूर्ण स्थिति में डाला गया या अगर किसी के खून में एक तत्व 'फैक्टर वी लीडेन' की मात्रा जन्म से ही कम है, तो ऐसे मरीजों के शरीर को चोट लगने या किसी सर्जरी के बाद पल्मोनरी एम्बोलिज्म का खतरा बना रहता है!

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पल्मोनरी एम्बोलिज्म के लक्षण

  • अगर आपकी टांगों में अचानक सूजन आ चुकी है या दो तीन दिनों से अचानक चलने में दर्द व खिंचाव महसूस हो रहा है।
  • जब सांस लेने में अचानक दिक्कत आने लगे।
  • अगर कोई व्यक्ति कैंसर से पीडि़त है और कीमोथेरेपी या रेडियोथेरेपी करवा रहा है और उसे अचानक सांस फूलने की समस्या पैदा हो सकती है।
  • अगर कोई व्यक्ति लंबी बीमारी (जैसे फालिज या कमर की हड्डी टूट गयी हो) की वजह से ज्यादा दिनों तक बिस्तर पर है और वह सांस की तकलीफ से ग्रस्त हो जाए, तो पल्मोनरी एम्बोलिज्म की संभावना को नकारा नहीं जा सकता।

रोकथाम और इलाज

अगर पैरों में अचानक सूजन आ चुकी हो, तो सांस की दिक्कत होने से पहले शीघ्र ही किसी अनुभवी वैस्कुलर सर्जन से परामर्श लें, ताकि पल्मोनरी एम्बोलिज्म जैसी जानलेवा मेडिकल स्थिति को पहले से ही रोका जा सके। ऐसा इसलिए, क्योंकि इस बीमारी में इलाज से ज्यादा रोकथाम की जरूरत है। इलाज के अंतर्गत रक्त को पतला करने वाली दवाएं दी जाती हैं। कभी-कभी फेफड़े की रक्त नली से क्लॉट या अन्य रुकावट को दूर करने के लिए ऑपरेशन भी करना पड़ता है। कभी-कभी एंजियोग्राफी के जरिये तार या ट्यूब से खून के कतरों को खींच लिया जाता है। इलाज के दौरान दिल और फेफड़ों की क्रिया-प्रणाली पर पूरी नजर रखी जाती है। याद रखें, पल्मोनरी एम्बोलिज्म के इलाज के लिए एक अत्याधुनिक आई सी.यू. का होना नितांत आवश्यक है।

पल्मोनरी एम्बोलिज्म की शुरुआत

अगर चोट की वजह से या कम चलने-फिरने की आदत की वजह से पैर या हाथ की अशुद्ध रक्त ले जाने वाली रक्त नलियों में खून के कतरों का जमाव हो जाता है, तो ऐसी अवस्था को डीप वेन थ्रॉम्बोसिस कहते हैं। यह अवस्था पल्मोनरी एम्बोलिज्म होने की संभावना का संकेत है। अगर पैरों की शिराओं में जमा हुए खून के कतरों को सही ढंग और उचित इलाज से नियत्रिंत नहीं किया गया, तो यही खून के कतरे जानलेवा बन जाते हैं। जब ये खून के कतरे उस समय अपने स्थान से सरक कर ऊपर जाकर फेफड़े की रक्त नली में पहुचते हैं और वहां जाकर रक्त नली को जाम कर देते हैं, तब इसके परिणामस्वरूप दिल से फेफड़ों को शुद्धिकरण के लिए जाने वाला अशुद्ध रक्त पहुंचना बंद हो जाता है, जिससे दिल पर अनावश्यक दबाव पडऩे लगता है, जो जानलेवा सिद्ध हो सकता है।

दुर्घटना में शारीरिक चोट लगना

अगर किसी दुर्घटना में शरीर चोट ग्रस्त हो गया हो या हाथ या पैर की हड्डी टूट गई हो, तो भी पल्मोनरी एम्बोलिज्म होने का खतरा मंडराता रहता है। आपने अक्सर सुना या देखा होगा कि सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को जब अस्पताल में भर्ती कर दिया जाता है और वह मरीज दो तीन दिनों तक ठीक-ठाक रहता है, फिर अचानक खबर आती है कि उस घायल मरीज की मौत हो गयी। पहले सांस अचानक फूली फिर मौत। ऐसे ज्यादातर मामलों में फेफड़े की रक्त नली को अवरुद्ध करने में खून के कतरे नहीं बल्कि चर्बी के टुकड़े कारण बनते हैं। इसे मेडिकल भाषा में फैट एम्बोलिज्म कहते हैं।

डॉ.के. के.पांडेय
सीनियर वैस्कुलर व कार्डियो थोरेसिक सर्जन
इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल, नई दिल्ली

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