World Hemophilia Day 2022: खतरनाक हीमोफीलिया रोग में बंद नहीं होता शरीर से बहता खून, जानें अन्य लक्षण

हीमोफीलिया खून से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है। हर साल 17 अप्रैल को वर्ल्ड हीमोफीलिया डे यानि विश्व हीमोफीलिया दिवस मनाया जाता है।

Anurag Anubhav
Written by: Anurag AnubhavPublished at: Apr 17, 2018Updated at: Apr 14, 2022
World Hemophilia Day 2022: खतरनाक हीमोफीलिया रोग में बंद नहीं होता शरीर से बहता खून, जानें अन्य लक्षण

हीमोफीलिया खून से जुड़ा एक रोग है जो अनुवांशिक होता है। हर साल 17 अप्रैल को World Hemophilia Day (वर्ल्ड हीमोफीलिया डे) यानी विश्व हीमोफीलिया दिवस मनाया जाता है, ताकि इस खतरनाक रोग के बारे में लोगों को जागरूक किया जा सके। ये रोग कुछ खास प्रोटीन्स की कमी से होता है। इस रोग में चोट लगने या त्वचा के कट जाने पर रोगी के शरीर से एक बार खून निकलना शुरू हो जाए, तो इसे बंद होने में समय लगता है। तब तक बहुत मात्रा में खून बह चुका होता है इसलिए ये कई बार जानलेवा भी होता है।

क्या है खून का गुण

हमारा खून कई तरह के सेल्स से मिलकर बना होता है। सामान्य स्थिति में किसी तरह की चोट लगने पर या कट जाने पर ये खून शरीर से बाहर निकलने लगता है। चूंकि खून तरल होता है इसलिए गुणों के अनुसार शरीर में किसी एक जगह भी कट जाने या चोट लग जाने पर शरीर का पूरा खून निकल जाना चाहिए। मगर ऐसा नहीं होता है क्योंकि प्रकृति ने खून को इस तरह बनाया है कि शरीर से बाहर आने पर ये गाढ़ा होकर जमने लगता है और एक थक्के के रूप में एक सुरक्षा कवच बना लेता है ताकि शरीर के अंदर मौजूद बाकी खून को सुरक्षित किया जा सके। इससे शरीर का बाकी खून संक्रमण के प्रभाव से भी बच जाता है।

इसे भी पढ़ें:- ये हैं हीमोफीलिया ए के लक्षण

क्यों खतरनाक है हीमोफीलिया रोग

हीमोफीलिया रोग में शरीर में ऐसे प्रोटीन्स की कमी हो जाती है जो खून को गाढ़ा बनाने में सहायक होते हैं। ऐसे में हीमोफीलिया के रोगी के शरीर पर एक बार चोट लगने या कटने पर उसका खून रुकना मुश्किल हो जाता है क्योंकि ब्लड को क्लॉट होने में ज्यादा समय लगता है। जरूरी नहीं है कि हीमोफीलिया के रोगी को चोट या कटने से ही खतरा हो। कई बार हीमोफीलिया के कारण रोगी को आंतरिक स्राव या इंटरनल ब्लीडिंग भी होने लगती है। अंदर जमने वाले रक्त का कई बार पता नहीं चलता है और ये जमकर धीरे-धीरे ट्यूमर बन जाता है।

क्या है हीमोफीलिया

हीमोफीलिया एक अनुवांशिक बीमारी है जो माता पिता से बच्चों में फैलती है। इसका पूरी तरह इलाज अभी संभव नहीं हुआ है मगर कुछ खास ट्रीटमेंट्स के द्वारा इस रोग के लक्षणों और इससे होने वाले नुकसान को बहुत हद तक कम किया जा सकता है। किसी बड़ी चोट या एक्सीडेंट की स्थिति में हीमोफीलिया के रोगी को खून बह जाने के कारण जान जाने का खतरा होता है इसीलिए इस रोग में बहुत सावधानी की जरूरत होती है। हीमोफीलिया 3 तरह का होता है- हीमोफीलिया ए, हीमोफीलिया बी और हीमोफीलिया सी। हीमोफीलिया ए के रोगी सबसे ज्यादा पाए जाते हैं। हीमोफीलिया के हर 10 में से 8 रोगी हीमोफीलिया ए का शिकार होता है।

इसे भी पढ़ें:- डॉक्टर के सवाल जिनका झूठा जवाब देना सेहत के लिए भारी पड़ सकता है

भारत में इलाज की संभावनाएं

भारत में तकरीबन 1.5 लाख लोग इस खतरनाक बीमारी से प्रभावित हैं। हीमोफीलिया का इलाज बहुत मंहगा है। सरकारी अस्पतालों में इस रोग के लिए कुछ दवाइयां और इंजेक्शन उपलब्ध हैं। चूंकि इस रोग में रोगी को हफ्ते में दो-तीन इंजेक्शन लगवाने पड़ते हैं इसलिए लोगों को इसके इलाज के लिए कठिनाई भी उठानी पड़ती है। अब तक हीमोफीलिया ए के मरीज को सप्ताह में तीन और हीमोफीलिया बी के मरीज को सप्ताह में दो इंजेक्शन लेने पड़ते थे, मगर अब ऐसे इंजेक्शन ईजाद कर लिया गया है जिसे सप्ताह में एक बार लगाने से भी हीमोफीलिया के रोग से बचाव संभव हो सकेगा। इसके साथ ही अब मरीज को नसों में इंजेक्शन लगाने की पीड़ादायक स्थिति से नहीं गुजरना पड़ेगा क्योंकि नए शोध में ऐसे इंजेक्शन को भी ईजाद कर लिया गया है जिसे इंसुलिन की तरह सीधे त्वचा पर लगाया जा सकेगा और खास बात ये है कि इस इंजेक्शन को महीने में सिर्फ एक बार लेना पड़ेगा।

हीमोफीलिया रोग के लक्षण

  • पेशाब के साथ खून आना
  • गुदा द्वार से खून आना
  • छोटी-मोटी चोट लगने पर गहरा घाव होना
  • कई बार बिना किसी वजह से शरीर में घाव होना
  • चोट लगने पर बहुत मात्रा में खून निकलना
  • अक्सर नाक से खून निकलने लगना
  • जोड़ों में अकड़ और दर्द
  • बच्चों में चिड़्चिड़ापन
  • कई बार आंखों से धुंधला दिखने की भी समस्या हो जाती है।
Disclaimer