नवजात में स्वाइन फ्लू चिकित्सा

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jun 06, 2011

नवजात शिशु यदि दुनिया में आते ही किसी बीमारी का शिकार हो जाए तो बच्चे के स्‍वास्‍थ्‍य के लिए सही नहीं है। स्वाइन फ्लू ऐसी महामारी है जो व्यस्कों के साथ-साथ बच्चों और नवजात को भी अपनी चपेट में ले लेती है। स्वाइन फ्लू के शिकार नवजात बच्चें की देखभाल में जरा सी चूक उनमें उम्रभर के लिए कोई विकार पैदा कर सकती है या फिर उनमें उम्रभर के लिए कमजोरी पैदा कर सकती है। इसीलिए नवजात शिशु की देखभाल में बिलकुल भी लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। खासकर तब जब बच्चे पर स्वाइन फ्लू का कहर बरपा हो। आइए जाने नवजात में स्वा‍इन फ्लू चिकित्सा कैसे की जाती है।

 

  • स्वाइन फ्लू का कहर बच्चों को भी नहीं बख्शता। नवजात भी इनफ्लूएंजा एच1एन1 वायरस से ही पीडि़त होते है।
  • नवजात में स्वाइन फ्लू संक्रमण होते ही उसका तुरंत इलाज करवाना चाहिए। पहले तो यह सुनिश्चत करना ही बहुत मुश्किल होता है कि बच्चे को स्वाइन फ्लू है या नहीं, है तो कितना बढ़ गया है। ये सुनिश्चत करने के बाद ही आगे की कार्यवाही करनी चाहिए।
  • अगर बच्चा गंभीर स्वाइन फ्लू का शिकार है तो बच्चे को तेज बुखार होता है और खांसी-जुकाम भी कम नहीं होता। 
  • शिशु में स्वाइन फ्लू के लक्षण पाए जाने पर शारीरिक कमजोरी भी आ जाती है।
  • बच्चे को सांस लेने में परेशानियां हो सकती है। 
  • यदि बच्चे में स्वाइन फ्लू के लक्षण पुख्ता हो जाते हैं तो बच्चे में स्वाइन फ्लू की रोकथाम के लिए डॉक्टर की सलाह पर टीका लगाया जा सकता है।
  • यदि बच्चे को बुखार होता है तो तुरंत डॉक्टर्स से संपर्क करें और डॉक्टर्स की सलाह पर शिशु की रक्त जांच करवाएं।
  • बच्चे‍ में पानी की कमी न होने दे। शिशु को समय-समय पर पानी देते रहें।
  • स्वाइन फ्लू होने के बावजूद खान-पान में कमी न रखे अन्यथा बच्चे में कमजोरी होने का खतरा पैदा हो जाएगा।
  • मां के दूध देने में कोई कोताही न बरते।
  • बच्चें को अधिक देर तक गीला न रखें और बहुत ठंडे माहौल में न रखें।
  • समय-समय पर बच्चे का चेकअप कराते रहें।
  • नवजात शिशु चिकित्सा के दौरान नवजात को बाहर न धूमाएं और कम से कम लोगों से मिलने दें।
  • बहुत देर तक बच्चें को अकेला न छोड़ें।
  • स्वाइन फ्लू में सामान्य से अधिक देखभाल करें व डॉक्टर के संपर्क में लगातार बनी रहें और नवजात की हालत का ब्यौरा डॉक्टर को देते रहें।
  • बच्चें को स्तनपान कराते समय या कुछ भी खिलाते-पिलाते समय एंटीबायोटिक क्लींजर से हाथ धोएं।
  • बच्चें के इस्तेमाल के लिए साफ-सुथरे तौलिए और रूमाल का प्रयोग करें।
  • नवजात शिशु बहुत ही नाजुक होता है। घड़ी-घड़ी उसकी देखभाल जरूरी होती है। नवजात बच्चे की सुरक्षा के लिए बच्चे की समय-समय ठीक से सफाई करते रहें।

 

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