Suptapadangushtasana: ऑफिस में बैठकर काम करने वाले जरूर करें सप्तपदंगुष्टासन, जानें लाभ

सप्तपदंगुष्टासन योगासन खासकर उन लोगों के लिए है जो डेस्‍क जॉब में हैं। यह उनके लिए भी है जो लंबे समय तक बैठे रहते हैं। आइए जानते हैं।

Atul Modi
Written by: Atul ModiPublished at: Mar 04, 2020Updated at: Mar 04, 2020
Suptapadangushtasana: ऑफिस में बैठकर काम करने वाले जरूर करें सप्तपदंगुष्टासन, जानें लाभ

एक ही स्‍थान पर अधिक समय तक बैठना और कम चलना आपके शरीर के निचले हिस्‍से को जाम कर सकता है, आपकी पीठ को कमजोर कर सकता है। गतिहीन जीवनशैली आपके घुटनों के चारों ओर मौजूद द्रव को सूखा सकती है। ऐसे में योग आपकी मदद कर सकता है। सेलेब्रिटी न्‍यूट्रिशनिस्‍ट, रिजुता दिवेकर के अनुसार, अगर आप डेस्‍क जॉब में हैं या ज्‍यादा देर तक बैठे रहते हैं तो आपको रोजाना सप्तपदंगुष्टासन करना चाहिए। ये योगासन आपको कई समस्‍याओं से छुटकारा दिला सकता है। यह एक स्‍ट्रचिंग एक्‍सरसाइज है। नियमित रूप से ऐसे स्‍ट्रचिंग एक्‍सरसाइज आपको अंदरूनी चोट के खतरों से बचाता है। 

दीवेकर के अनुसार, इस आसन को हर दिन हर किसी को करना चाहिए, खासकर अगर आप बैक पेन या किसी प्रकार के शारीरिक दर्द से गुजर रहे हैं। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि यह नियमित एक्‍सरसाइज आपके मानसिक थकान को कम करता है, जिससे आप एक तनाव और अवसाद मुक्‍त जीवन जीते हैं।

 
 
 
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Guideline 9 - Suptapadangushtasana daily for aches, pains and recovery For more reasons than one, stretching is the corner stone of any exercise program. For starters, it prevents injuries, but more importantly accelerates recovery from a bout of anything stressful in life - be it physical like exercise or mental like tension or a mixture of both like long travels. How stretching helps? One of the under-rated aspects of a workout is that right after exercise, your immunity is a bit down. Stretching post exercise ensures that it doesn’t crash or that you don’t catch infections or fall routinely sick just because you exercised. Also, people with conditions like fibromyalgia, chronic fatigue, BP, Diabetes, Thyroid, etc., will find stretching extremely useful and beneficial in managing their condition. So will people with bio-mechanical issues like - back pain, knee pain, weak joints, etc. In fact, anyone who has been advised to not exercise can also safely stretch, provided you do it right. Stretching also improves– 1. range of motion in joints 2. blood circulation 3. coordination 4. posture - The primary stretching routine that you all must adopt is the Suptapadangushtasana (SP) series. This is a group of 3 stretches which belong to the wisdom of yoga. They are done lying down and are so critical to good health that no one should be spending a day without them. The day to day sitting literally jams up the lower body, weakens the back and dries up the synovial fluid around the knees. But the SP series is a good starter to undo these damages. For best results do this stretch twice a day and here’s how you can adapt it - 1. For Diabetes and BP - once in the morning and once in the evening 2. If you workout regularly - Pre and post workout, hold post workout longer 3. For chronic fatigue or during Periods - at any time of the day, preferably around sunset, repeat twice on both sides 4. For weak and aching joints, Arthritis, Osteoporosis, back problems, cramping legs in the nights or pain in the heels in the morning - at bedtime and on rising, do it on the bed. Video in story. Week 8 form - link in bio. #12weekbook #12week2020 #iyengaryoga

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स्ट्रेचिंग आपके लिए क्‍यों महत्वपूर्ण है?

दिवेकर का कहना है कि एक्‍सरसाइज के बाद स्ट्रेचिंग यह सुनिश्चित करती है कि आप एक्‍सरसाइज के बाद किसी चोट के शिकार न हों। यदि आप लम्बे समय से थका हुआ महसूस करते हैं और रक्तचाप, मधुमेह और थायरॉइड की समस्या है, तो स्ट्रेचिंग योग आसन भी सहायक हो सकते हैं। यदि आपके घुटने में दर्द, जोड़ों में कमजोरी और पीठ में दर्द है, तो स्ट्रेचिंग आपके लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। वास्तव में, जिस किसी को भी व्यायाम नहीं करने की सलाह दी गई है, वह भी सुरक्षित रूप से स्‍ट्रचिंग कर सकते हैं, बशर्ते आप इसे सही से करें। 

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नियमित स्‍ट्रेचिंग एक्‍सरसाइज के लाभ:

1. जोड़ों में दर्द को सही करता है

2. ब्‍लड सर्कुलेशन में सुधार करता है

3. बैलेंस में सुधार करता है

4. पोज को बेहतर बनाता है 

5. दर्द को कम करता है

अपने इंस्‍टाग्राम वीडियो में, रूजुता दिवेकर ने सप्तपदंगुष्टासन के बारे में भी बात की है। उन्‍होंने बताया है कि, यह दर्द को कम करने में कैसे मदद कर सकता है? आसन में कुल तीन स्ट्रेच शामिल हैं। उन्हें फर्श पर लेटकर किए जाने की जरूरत है।

दिवेकर अपने पोस्‍ट में लिखती हैं कि, "हर दिन इस आसन को करना उन लोगों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जो डेस्क जॉब में हैं या जिनकी गतिहीन लाइफस्‍टाइल है, यानी लंबे समय तक बैठे रहना आदि। अधिक बैठना और कम चलना आपके निचले शरीर को जाम कर सकता है, आपकी पीठ को कमजोर कर सकता है और घुटनों को कमजोर कर सकता है। सुप्तपदंगुष्टासन श्रृंखला इन नुकसानों से बचाने का एक अच्‍छा माध्‍यम है।" 

सुप्तापदंगुष्टासन कब करें, और लाभ

  • आप इसे सुबह में एक बार और शाम को एक बार कर सकते हैं, यह उन लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है, जो मधुमेह और उच्च रक्तचाप से ग्रसित हैं। 
  • यदि आप नियमित रूप से वर्कआउट करते हैं, तो आपके वर्कआउट से पहले और बाद में सुप्तापदंगुष्टासन किया जाना चाहिए। कसरत के बाद, आपको इस स्ट्रेचिंग पोज़ को करना चाहिए। 
  • पीरियड्स के दौरान या जब आप थकान का अनुभव करते हैं, तो आप इसे दिन के किसी भी समय कर सकती हैं। दीवेकर सूर्यास्त में करने के लिए उपयुक्त समय मानती हैं। 
  • अगर आपको गठिया, बदन दर्द, पैरों में ऐंठन, गठिया या ऑस्टियोपोरोसिस है तो इसे सोते समय या सुबह सबसे पहले करें। 
  • किसी प्रकार की समस्‍या महसूस होने पर योग एक्‍सपर्ट की सलाह लें।

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