सनग्लासेज खरीदते वक्त इस चीज का रखें ख्याल, नहीं तो हो सकता है अंधापन!

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Apr 11, 2018
Quick Bites

  • सूर्य की खतरनाक अल्ट्रावायलेट किरणों से हो सकता है मोतियाबिंद।
  • साधारण धूप के चश्मे का प्रयोग आंखों के लिए हानिकारक भी हो सकता है।
  • स का धुंधला होना और मैक्यूलन डीजेनरेशन जैसी समस्याएं पैदा हो जाती हैं

गर्मियों के मौसम में सनग्लासेज जहां फैशन के लिहाज से जरूरी है वहीं ये आंखों की भी इफाजत करते हैं। धूप के चश्मे यानी सनग्लासेज गर्मियों के लिए एक आवश्यक एक्सेसरी होते हैं। लेकिन आजकल इन्हें एक फैशन सिंबल समझा जाता है। सनग्लासेज सूरज की किरणों से निकलने वाली खतरनाक अल्ट्रावायलेट किरणों से होने वाली मोतियाबिंद की बीमारी की रोकथाम में भी काफी हद तक सहायक होते हैं। चिकित्सकों का मानना है कि अल्ट्रा वायलेट किरणें और सूरज की तेज रोशनी मोतियाबिंद का मुख्य कारण है, जिसकी रोकथाम धूप के चश्मे के नियमित उपयोग से की जा सकती है। लेकिन साधारण धूप के चश्मे का प्रयोग आंखों के लिए हानिकारक भी हो सकता है।

गॉगल्स की बढती मांग को देखते हुए आज बाजार में तमाम तरह के डिजाइनर सनग्लासेज उपलब्ध हैं, जो कि चीन निर्मित हैं। ब्रैंडेड सनग्लासेज के मुकाबले इन चश्मों की कीमत खासी कम होती है। ये लोकल शॉप्स और विक्रेताओं के पास आसानी से मिल जाते हैं।



करीब 70 प्रतिशत भारतीय या यूं कहें कि दस में से सात लोग लोकल या चीन में निर्मित चश्मे प्रयोग करते हैं। हालांकि ये सनग्लासेज की तरह ही दिखाई देते हैं, लेकिन यह सूर्य की यूवी किरणों से किसी तरह की सुरक्षा प्रदान नहीं करते। बल्कि ये चश्मे आंखों को खतरनाक अल्ट्रावायलेट रोशनी के संपर्क में ले आते हैं। इससे समय बीतने के साथ मोतियाबिंद, लेंस का धुंधला होना और मैक्यूलन डीजेनरेशन जैसी समस्याएं पैदा हो जाती हैं, जो कि वृद्धावस्था में आंखों की रोशनी खोने के मुख्य कारण हैं।

आंखों की प्यूपिल को होता है नुकसान

तेज रोशनी में आंखों की प्यूपिल सिकुड़ जाती हैं और कम प्रकाश में यह फैल जाती हैं। ऐसे में जब आप धूप के चश्मे पहनती हैं तो आंखों की पुतलियां फैल जाती हैं। बिना पर्याप्त यूवी सुरक्षा के खतरनाक यूवी किरणें आंखों में सीधे प्रवेश करती हैं और नुकसान पहुंचाती हैं। यह जानना जरूरी है कि यूवी प्रोटेक्शन के लिए लेंस की एक उपयुक्त मोटाई होना बहुत जरूरी है। जबकि नकली चश्मे बेहद पतले होते हैं। सस्ते नकली चश्मों में विकृत लेंस भी हो सकते हैं, जिससे देखने की क्षमता में समस्या उत्पन्न हो सकती हैं और दृष्टि में व्यवधान उत्पन्न होने के कारण सिर दर्द भी होने लगता है।

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ग्रे कलर के लेंस है बेहतर

धूप का चश्मा खरीदते समय यह ध्यान सबसे महत्वपूर्ण है कि सनग्लास कितनी यूवी किरणों के प्रभाव की रोकथाम कर सकता है। विकिरण को सोखने के मामले में ग्रे कलर के लेंस सबसे बेहतर समझे जाते हैं, क्योंकि यह चीजों के रंगों में किसी प्रकार का परिवर्तन किए बिना, रोशनी की तीव्रता को कम देते हैं। ऐसे में यह सबसे अधिक प्राकृतिक रंग की दृष्टि प्रदान करते हैं। वहीं न्यूट्रल ग्रे, एंबर, भूरे और हरे रंगों वाले सनग्लासेज का चयन भी सही होता है।

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लोकल चश्मों से रहें सावधान

रंग-बिरंगे और सुंदर फे्रम वाले आम चश्मे (सनग्लासेज) सस्ते में जरूर मिल जाते हैं, लेकिन यह आंखों को पूरी सुरक्षा नहीं देते। आंखों को नुकसान पहुंचाते हैं। बेहतरी इसी में है कि भले थोडा कीमती हो, लेकिन ब्रैंडेड और यूवी प्रोटेक्शन देने वाला सनग्लास ही खरीदें। अगर आप अपनी आंखों को पुरी सुरक्षा और सही स्टाइल स्टेटमेंट अपनाना चाहती हैं तो समझदारी इसी में है कि सही प्रोटेक्शन वाला चश्मा चुनें। ऐसा चश्मा चुनें जो यूवीए और यूवीबी दोनों तरह की किरणों से सौ फीसद सुरक्षा प्रदान करें। ताकि आगे चलकर जीवन में दृष्टि संबंधी समस्याओं से बचा जा सके।

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